11-Oct-2019 12:05

इंतजार करें आपकी हत्या की बारी भी आयेंगी, यहीं अनुरोध मुद्रा में वैशाली पुलिस अधीक्षक

अगला नंबर किसका, आपका तो नहीं, घर परिवार से मिलकर संतुष्ट हो लें, पता नहीं कब आपका गोली पर नाम लिख जाए।

बहुत हिम्मत और हौसले की बात है की वैशाली के लोग अपनी-अपनी मौत के इंतजार में लगातार वैशाली पुलिस के साथ हैं। बड़ी इच्छाशक्ति के बल पर आज वैशाली के लोग वैशाली पुलिस का साथ दे पा रही है। इतनी इच्छाशक्ति शायद आज विश्व में किसी कोने में नाम देखने को मिले। जब राजनीतिक और मानसिक असंतुलन को मजबूती प्रदान करने के लिए आम जनता, वह भी लोकतांत्रिक भूमि की। बहुत सही अंत के साथ वैशाली पुलिस का साथ दे रही है। वाकई में हमें गर्व होना चाहिए कि वैशाली लोकतंत्र की जननी ही नहीं मौत के सबसे बड़े सौदागर जिलों के रूप में भी अपना एक सुनहरा इतिहास लिखेगा। वैशाली में हर कोई अपनी-अपनी हत्या की बारी का इंतजार करते रह रही है। बहुत आश्चर्य की बात है कि इतनी इच्छा शक्ति, इतना प्रबल कैसे हो गया। लोग अब गैरकानूनी कामों की जगह, अपने हत्या के लिए वैशाली पुलिस प्रशासन के साथ कदम से कदम मिलाकर डटी हुई है। पिछले कुछ वर्षों में जिस तरीके से हत्या का दौर चल रहा है और वैशाली पुलिस अधीक्षक के रूप में जो नेतृत्व प्राप्त हुआ हो रहा है, वह अद्वितीय है। शायद यह इतिहास कुछ समय बाद बने या ना बने। इसलिए वैशाली का हर व्यक्ति वैशाली पुलिस अधीक्षक के रूप में आने वाले सभी लोगों का साथ देती है। वैशाली पुलिस अधीक्षक के रूप में वैशाली में आने वाले पदाधिकारी को जो सहयोग हत्या के साथ मिल रहा है, शायद वह समर्थन सहयोग विश्व इतिहास में किसी को ना प्राप्त हुआ होगा। वाकई यह गर्व करने की बात है कि हम ऐसे वैशाली में रहते हैं। जहां के लोग रोज हो रही हत्याओं पर चुप्पी साधे बैठे हैं। वैशाली पुलिस अधीक्षक का मनोबल बढ़ा रहे हैं। आप धन्य हैं वैशाली की जनता और आप निरंतर ऐसे ही करते रहेंगे, तो बहुत जल्द वैशाली की 40 लाख की जनसंख्या 4 लाख में बदल जाएगी और तब जाकर कहीं आपके यहां खुशहाली और अच्छे दिन आ जाएगी।

जिस तरीके से सुरेश कुमार चौधरी, राकेश कुमार, मानवजीत सिंह ढिल्लों के बाद जगुन्नाथ रेड्डी पुलिस अधीक्षक के रूप में काम किया है या कर रहे हैं, वह काबिले तारीफ है। जनसंख्या नियंत्रण को लेकर पूरा विश्व जहां संकट में है वही वैशाली के लोग इस कदम से बहुत खुश एवं संतुष्ट नजर आते हैं। वैशाली पुलिस के खिलाफ या वैशाली पुलिस अधीक्षक के खिलाफ कहना, लिखना, बोलना एक अपराध होते चला जा रहा है। जहां आम लोग को लगता है कि मैं परेशान हूं। लेकिन कुछ लोग पुलिस अधीक्षक के चाटुकारिता दलाली के चक्कर में पुलिस का जो मनोबल बढ़ाते हैं। वह दुर्भाग्यपूर्ण है, वह दिन दूर नहीं होगा, जब उनके घरों में भी लाशें बिछी होंगी और तब वह नहीं कह पाएंगे, कि आपने पुलिस के खिलाफ लिखकर गलती की। वैशाली को ऐसे पुलिस अधीक्षक की जरूरत नहीं है। जो एक ड्यूटी निभाने के रूप में जिला का कमान अपने हाथ में रखे। पुलिस अधीक्षक के रूप में आने वाले प्रत्येक व्यक्ति को यह ध्यान में होना चाहिए, कि वह एक जिला में नहीं सीधे-सीधे संविधान एवं लोकतंत्र के जन्मदाता जिले में उसकी पदोन्नति हो रही है। वैशाली पुलिस अधीक्षक के रूप में बनने वाले हर व्यक्ति को याद ध्यान में होना चाहिए कि आपके लिए नहीं, आपकी पूरे वजूद के लिए वैशाली से बड़ा महत्वपूर्ण जिला आपको कभी ना मिलेगा। आपको याद रखना चाहिए, यह लोकतंत्र की जननी भूमि है और जब आप इसके साथ इंसाफ ना कर पाएंगे, तो आपकी पूरी जिंदगी, आपके साथ नाइंसाफी करती रहेगी। यह मत भूलना चाहिए, पुलिस अधीक्षक के रूप में जो भी आते हैं, इस पृथ्वी पर ही आपके कर्म और कर्मों की सजा मिलेगी और याद रखें। यह वैशाली है जो लोकतांत्रिक रूप से स्वयंग में मजबूत है।

आज फिर जिस तरीके से जिले में गोलीबारी और हत्या एवं लूट हुई, बहुत ही निंदनीय है। यह बात उन दलालों को क्यों नहीं समझ में आती है, जो वैशाली पुलिस की चाटुकारिता में व्यस्त रहते हैं। उन्हें यह समझना चाहिए कि पिछले 6 महीनों में कितनी ज्यादा हत्या हो चुकी है और लगातार होती जा रही है। जिसके बावजूद आप अगर पुलिस अधीक्षक और पुलिस टीम के साथ खड़े हैं तो आप से बड़ा अपराधी कोई ना होगा। वैशाली पुलिस अपने कामचोरी, निकम्मेपन और कर्तव्यहिनता के कारण सर्वोच्च स्थान पर आज हैं। आपको ज्ञात होगा, वैशाली, पटना यानी बिहार की राजधानी से सबसे नजदीक है। साथ ही साथ हाजीपुर, वैशाली जिला पूरे उत्तर बिहार का आधार स्तंभ है। यही वह जगह है जहां से पूरे बिहार को हम एक सूत्र बांध पाते हैं। हमारा दायित्व बनता है कि हम अपने उत्तर बिहार के तमाम लोगों का नेतृत्व करें एवं एक सुदृढ़ प्रशासन की व्यवस्था प्रदान करें। अपने जिला के माध्यम से उत्तर बिहार ही नहीं पूरे भारत पूरे विश्व को संदेश दे। जिस लोकतांत्रिक भूमि पर लोकतंत्र की मर्यादा का हनन हो रहा हो, जिस धरती पर लोकतंत्र की आस्था पर चोट होती हो, जिस धरती पर लोकतंत्र के प्रति प्रशासन की आस्था ना हो, जिस धरती पर पुलिस व्यवस्था और अलोकतांत्रिक हो जाए, जिस भूमि पर पुलिस की भूमिका चाटुकारिता और दलालों के इर्द-गिर्द घूमते हुए नजर आए। तो ऐसे वैशाली के लिए और ऐसे प्रशासन के लिए वैशाली के लोगों का चुप रहना कितना घातक हो सकता है। शायद एक-दो साल में समझ में आ जाएगा। जब आपकी ना जनसंख्या रहेगी और ना ही आपके लोग, जिनके कंधों पर आप सर रखकर रोने के लायक भी ना बचेंगे।

बहुत दुर्भाग्य की बात है कि वैशाली जिले से आज भी पांच सांसद और 8 विधायक हैं। आठ विधायकों और तीन सांसदों वाला वैशाली आज नपुंसक नेतृत्व के कारण डरा हुआ हैं। यहां केन्द्रीय मंत्री तक वैशाली से आते-जाते हैं पर वैशाली को अपराधियों का अड्डा बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। यहां नपुंसक शब्दों का प्रयोग शायद बहुत लोग उचित नहीं मानेंगे, पर जब लगातार हत्याकांड में बढ़ोतरी हो रही हो और पुलिस अधीक्षक नींद से सोया हुआ हो तो क्या कहेंगे। सांसद आरक्षण के मार से दबा है, कहा जाता है कि नशे की बारी लत हैं वर्तमान हाजीपुर सांसद को। जिसके कारण ही सांसद महोदय कहीं आना जाना नहीं चाहते हैं। उजियारपुर सांसद भी वैशाली के एक क्षेत्र के एक विधानसभा से ही जुड़े हैं, लेकिन हाजीपुर के विधायक रहते हुए अपराध का ग्राफ खुब ऊंचा बढ़ाया। आज भले ही केन्द्र राज्य मंत्री हैं लेकिन स्वभाव वहीं। वैशाली सांसद को क्षेत्र का ज्ञान नहीं है वहीं उन्हें इन सब से क्या लेना देना है। इस हत्या और अपराधी को संभालने के लिए उनके संगे रिश्ते मजबूत हैं। अब ईश्वरीय शक्ति ही वैशाली की जनता को पार घाट उतार सकती हैं। इस पर्व के मौसम में जहां लगातार घरों के घर दुख और संकट में घिरे हुए हैं। वही राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं की भूख ने इस जिले को एक सही नेतृत्वकर्ता देने में असक्षम रही हैं। चाहे वह राजनीतिक रूप से हो या प्रशासनिक रूप से। कोई भी जिलाधिकारी, पुलिस अधीक्षक वैशाली जिला का नेतृत्व करने में आवश्यक से नजर आ रहा है । खासकर पुलिस की स्थिति बद से बदतर है और इसका कारण यह होता जा रहा है कि हर कोई रोज यही सोचकर सहरिया अलग-अलग जाता है। हर कोई आज शाम तक हम लौट कर घर आ पाए, बहुत ही नाजुक स्थिति से वैशाली गुजर रहा है। अगर पुलिस अधीक्षक जैसी चीज वैशाली में काम के लायक नहीं है। तो वाकई में पुलिस मुक्त वैशाली की नींव रखनी चाहिए। जिनको जैसे जीना हो, ऐसे जीने के तरफ लोगों को बढ़ना चाहिए। डर और अपराध की दुनिया को लेकर वैशाली अब शायद एक कदम भी आगे बढ़ाने के मूड में ना हो। लेकिन बस यही है कि कुछ चाटुकार और दलालों से पुलिसगिरी हुई है और खामियाजा यहां की आम जनता को भुगतना पड़ रहा है। बस यही है हर कोई अपने अपने बारी के इंतजार में हैं कि कल या अगला नंबर हमारा तो नहीं।

11-Oct-2019 12:05

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