07-Apr-2020 10:03

पढ़िए बिहार पुलिस एसोसिएशन के अध्यक्ष मृत्युंजय कुमार सिंह के कलम से

* फ़ुर्सत के पल में ✍🏻* *एक प्रेरक उदाहरण “ साहस “ *

हर इतिहास की पन्नो एवं पुरानी कहानियों में एक संदेश छुपा होता है। जो वर्तमान के साथ आने वाली पीढ़ियों को संघर्ष में विजय पाने का हिम्मत और साहस देता है। इटली में एक 5 स्टार होटल के मालिक ने बिल्डिंग से कूदकर अपनी जान दे दी क्योंकि उसका पूरा खानदान कोरोना वायरस से मर गया, देखा मेरे दोस्तों यह दुनिया की दौलत किसी काम ना आ सकी अभी भी समय है हम लोग संभल जायें।ग़रीबों के लिए कुछ दान करना पुण्य कार्य होता है ।हिम्मत और साहस विजय पथ का मार्ग होता है । जापान में पुरानी कथा है।एक छोटे से राज्य पर एक बड़े राज्य ने आक्रमण कर दिया।उस राज्य के सेनापति ने राजा से कहा कि आक्रमणकारी सेना के पास बहुत संसाधन है हमारे पास सेनाएं कम है संसाधन कम है हम जल्दी ही हार जायेंगे बेकार में अपने सैनिक कटवाने का कोई मतलब नहीं। इस युद्ध में हम निश्चित हार जायेंगे और इतना कहकर सेनापति ने अपनी तलवार नीचे रख दिया।अब राजा बहुत घबरा गया अब क्या किया जाए, फिर वह अपने राज्य के एक बूढे फकीर के पास गया और सारी बातें बताई।फकीर ने कहा उस सेनापति को फौरन हिरासत में ले लो उसे जेल भेज दो। नहीं तो हार निश्चित है।यदि सेनापति ऐसा सोचेगा तो सेना क्या करेंगी। आदमी जैसा सोचता है वैसा हो जाता है। फिर राजा ने कहा कि युद्ध कौन करेगा।फकीर ने कहा मैं,वह फकीर बूढ़ा था, उसने कभी कोई युद्ध नहीं लड़ा था और तो और वह कभी घोड़े पर भी कभी चढ़ा था। उसके हाथ में सेना की बागडोर कैसे दे दे। लेकिन कोई दूसरा चारा न था।

वह बूढ़ा फकीर घोड़े पर सवार होकर सेना के आगे आगे चला। रास्ते में एक पहाड़ी पर एक मंदिर था। फकीर सेनापति वहां रुका और सेना से कहा कि पहले मंदिर के देवता से पूछ लेते हैं कि हम युद्ध में जीतेंगे कि हारेंगे। सेना हैरान होकर पूछने लगी कि देवता कैसे बतायेंगे और बतायेंगे भी तो हम उनकी भाषा कैसे समझेंगे। बूढ़ा फकीर बोला ठहरो मैंने आजीवन देवताओं से संवाद किया है मैं कोई न कोई हल निकाल लूंगा। फिर फकीर अकेले ही पहाड़ी पर चढा और कुछ देर बाद वापस लौट आया। फकीर ने सेना को संबोधित करते हुए कहा कि मंदिर के देवता ने मुझसे कहा है कि यदि रात में मंदिर से रौशनी निकलेगी तो समझ लेना कि दैविय शक्ति तुम्हारे साथ है और युद्ध में अवश्य तुम्हारी जीत हासिल होगी। सभी सैनिक साँस रोके रात होने की प्रतीक्षा करने लगे। रात हुई और उस अंधेरी रात में मंदिर से प्रकाश छन छन कर आने लगा। सभी सैनिक जयघोष करने लगे और वे युद्ध स्थल की ओर कूच कर गए। 21 दिन तक घनघोर युद्ध हुआ फिर सेना विजयी होकर लौटीं।रास्ते में वह मंदिर पड़ता था।जब मंदिर पास आया तो सेनाएं उस बूढ़े फकीर से बोली कि चलकर उस देवता को धन्यवाद दिया जाए जिनके आशीर्वाद से यह असम्भव सा युद्ध हमने जीता है। सेनापति बोला कोई जरूरत नहीं। सेना बोली बड़े कृतघ्न मालूम पड़ते हैं आप जिनके प्रताप से आशीर्वाद से हमने इस भयंकर युद्ध को जीता उस देवता को धन्यवाद भी देना आपको मुनासिब नही लगता।तबउस बूढ़े फकीर ने कहा,वो दीपक मैंने ही जलाया था जिसकी रौशनी दिन के उजाले में तो तुम्हें नहीं दिखाई दिया पर रात्रि के घने अंधेरे में तुम्हे दिखाई दिया। तुम जीते क्योंकि तुम्हे जीत का ख्याल निश्चित हो गया। विचार अंततः वस्तुओं में बदल जाती है। विचार अंततः घटनाओं में बदल जाती है ।

मोदी जी पूरे देश के लोगों को दिया जलवाकर वस्तुतः उपरोक्त प्रक्रिया का ही प्रयोग है। क्योंकि यह निश्चित है कि बाह्य संसाधनों के बल पर कोरोना से आप नहीं जीत सकते , अमेरिका एवं यूरोपियन देशों का उदाहरण आपके सामने है ।अमेरिका एवं यूरोपियन देश एक ताकतवर परंतु डरा हुआ देश हो गए है। इतिहास गवाह है वह युद्ध अपनी धरती पर नहीं लड़ता कि उसके लोग मारे जायेंगे।आधुनिक काल के इतिहास में यह पहला युद्ध है जिसे उसको अपनी धरती पर लड़ना पड़ रहा है।यह वह मुल्क है जहां एक बार 6 घंटे बिजली आपूर्ति ठप्प हो गई थी तो सैकड़ों लोग डिप्रेशन से मर गए थे।अतः हे भारत के अदम्य जिजीविषा से भरे हमारे बहनों एवं भाईयों हम यह युद्ध आधी जीत चुके हैं हमारे यहां कोरोना पीड़ितो की मृत्यु दर कम है वही मृत्यु को प्राप्त हो रहे है जिन्हें कोई अन्य बीमारी हो या जो जीवन से निराश हो चुके हैं।आज कोरोंना युद्ध लड़ रहे सभी सरकारी डॉक्टर उनकी टीम, अन्य सहयोगी व्यक्ति , संगठन एक मिशाल पेश कर रहे है।अपनी जान की परवाह किए बिना मानवता की रक्षा में दिन रात लगे है। साथ ही धन्य है पुलिसकर्मी और उनका कर्तव्य धर्म।आपका कार्य स्वर्ण अक्षरों से अंकित होना चाहिए। कुछ लोग इस पुलिस पर कर्तव्य के दौरान पथर फ़ेक कर मारते है।

प्रतिकार करते है,गोली मारते है। थोड़ी भी इंसानियत यदि है तो ख़ुद शर्म आनी चाहिए वैसे लोगों को। कुछ लोग कहते थे कि चौराहो पर कमाई के लिए खड़ी होती है पुलिस, आज सारे चौराहे , गली वीरान पड़े हैं और संकल्प के साथ कर्तव्य धर्म पथ पर पुलिस आज भी वही खड़ी है। वर्तमान समय की गंभीरता को देखते हुए पूरी जिम्मेदारी के साथ पुलिसकर्मी डटे है। और अंतिम साँसों तक डटे रहने का संकल्प सपथ जो सेवा में आने के समय लिए थे । पुलिस के प्रति सोच बदले एवं राष्ट्र कि एकता अखंडता , विकसित एवं शक्तिशाली भारत बनाने का दृढ़ संकल्प लेकर एक दूसरे के प्रति विश्वाश, भरोसे के साथ कार्य करे।अतः हे भारत के महामानव आपका कोरोना कुछ नहीं बिगड़ेगा , आपके लिए कोरोना सिजनल फ्लू जैसा बनकर रह जायेगा।बस कुछ सावधानियां बरतें।सामाजिक दूरी बनाए रखें।गाईडलाइन का फाँलो करे।प्रधानमंत्री जी ने विडियो संदेश में लम्बी लड़ाई के लिए तैयार रहने को बोला है।अपने आत्मविश्वास को मजबूत करें अभी बहुत कुछ करना है।

07-Apr-2020 10:03

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