14-Aug-2019 12:02

बिहार की जनता गुप्तेश्वर पाण्डेय के भरोसे कभी सुरक्षित नहीं हैं ?

पुलिस महानिदेशक गुप्तेश्वर पाण्डेय की संवैधानिक और नैतिकता जिम्मेदारी कर्त्तव्यता से कोसों दूर, तो सुरक्षित समाज कैसे

फेसबुकिया पुलिस महानिदेशक गुप्तेश्वर पाण्डेय फिर एकबार अपनी जिम्मेदारियों का बोझ आम जनता पर मढ़ गये। एक पुलिस महानिदेशक की भूमिका इतनी गैर जिम्मेदाराना हो सकता है, यह बहुत ही दुखद है।गुप्तेश्वर पांडे की गतिविधियां लगातार राजनीतिक रहती है। ऐसा कभी नहीं लगता है, कि गुप्तेश्वर पांडेय की कोई भी जिम्मेवारी पुलिस व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए हो सकती है। आम आदमी की सुरक्षा के प्रति गुप्तेश्वर पांडेय की जिम्मेवारी कभी महत्वपूर्ण नहीं दिखता है। हर समारोह में गुप्तेश्वर पांडेय यह कह कर निकल जाते हैं, आप हमें सहयोग दें। युवाओं से आह्वान करते हैं कि आप मुझे यह बताएं कि, आपके क्षेत्र में कौन अपराधी हैं, कौन दारु-शराब बेच रहा है, कौन अवैध धंधे चला रहे हैं? आखिर गुप्तेश्वर पांडे युवाओं को या तो अपराधी बनाने के लिए प्रेरित करते हैं या युवा पुलिस का मुखबिर बन कर पुलिस की दलाली करने के लिए उकसा रहे हैं। समाज का भला करने के लिए कदम बढ़ाने के तरफ मुखातिब होते गुप्तेश्वर पाण्डेय नहीं दिख रहे है? क्या यही लक्ष्य है, बिहार के पुलिस महानिदेशक गुप्तेश्वर पांडे का ?

गुप्तेश्वर पांडे बिहार के पुलिस महानिदेशक होने से पहले भी लगातार फेसबुकिया ड्रामा करते नजर आते रहे। आज तक उनके आईपीएस बनने के बाद का अगर सही रिपोर्ट निकाला जाए, तो शायद सभी आईपीएस अधिकारियों का रिकॉर्ड उनके सामने अपराध नीति बैना पड़ जाएगा। गुप्तेश्वर पांडेय के कार्यकाल में कभी जिले की सुरक्षा या भला नहीं हुआ होगा। आज तक ना कभी डीआईजी, आईजी और अब डीजीपी जैसे पदों पर रहते हुए इन्होंने अपने क्षेत्र का सुरक्षा की जिम्मेवारी अपने ऊपर कभी ली हो ? गुप्तेश्वर पांडे की राजनीतिक पृष्ठभूमि कमजोर है उसे मजबूत करने के चक्कर में अपनी जिम्मेदारियों से मुंह मोड़ के चलते हैं। राजनैतिक विचारधारा चली है कि हर बात में राजनेता से लेकर या यूं कहें प्रधानमंत्री से लेकर एक राज्य के पुलिस महानिदेशक तक युवाओं पर ही अपनी सारी राजनीतिक सामाजिक या अपने दायित्वों का निर्वहन न करने की जिम्मेदारी उनके कंधों पर थोप देते हैं। वहीं चकाचौंध में युवा लगातार इनके पीछे अपना समय बर्बाद कर रहे हैं।

बड़े ही आश्चर्य की बात है, वैशाली जैसे लोकतांत्रिक भूमि पर लगातार अपराधियों का वर्चस्व बढ़ता जा रहा है। लगातार दिनदहाड़े गोली मारने की प्रक्रिया जारी है। लगातार दिनदहाड़े पैसा लूटने की प्रक्रिया भी जारी है। बालू माफिया - दारू माफिया का एक बड़ा सरगना काम कर रहा है। वैशाली पुलिस किसी भी काम को या यूं कहें कि आम आदमी की सुरक्षा के प्रति उनकी किसी भी प्रकार की जिम्मेवारी नजर नहीं आती। फेसबुक पर आकर बिहार के पुलिस महानिदेशक गुप्तेश्वर पांडेय जो कुछ कर रहे हैं, इससे क्या ? क्या इससे राज्य का कभी भला होगा ? एक ऐसा पदाधिकारी जिस के कंधों पर पूरे राज्य के एक-एक व्यक्ति की सुरक्षा की जिम्मेवारी है, वह यह कह दे आम आदमी के सहयोग से ही हम आप को सुरक्षित रखेंगे। तो ऐसे पुलिस व्यवस्था का होना या ना होना क्या महत्व रखता है ?

लगातार सवाल उठाता रहा हूं, कि क्यों यह अंग्रेजीयत वाली पुलिस व्यवस्था भारत में लागू है ? लगातार एक ऐसी पुलिस व्यवस्था का निर्माण को मजबूती दी जा रही है, जो आम आदमी की सुरक्षा के लिए कहीं से जिम्मेवार नहीं हैं। पुलिस व्यवस्था पूर्णरूपेण खोखली है, जैसे अंग्रेजों ने शासन करने के लिए एक पुलिस नीति बनाई और आम आदमी को उसके अधीन जबरदस्ती घेरने का प्रयास किया। वही नीति आज बिहार के पुलिस महानिदेशक गुप्तेश्वर पांडे भी कर रहे हैं। जिन्हें खुद की जिम्मेवारी की समझ ही नहीं है। अगर उनकी कार्यशैली या कार्यक्षमता पुलिस महानिदेशक के लायक नहीं है, तो तत्कालीन स्वरूप में उन्हें इस पद से इस्तीफा दे देना चाहिए। ताकि पुलिस जैसी अविश्वसनीय संस्था, एक अविश्वसनीय पदाधिकारी से मुक्त हो सकें। अब बिहार की पुलिस पर भरोसा शायद आम आदमी रखता होगा ? बिहार के पुलिस महानिदेशक यह कहते हो, आम आदमी आम लोग सहयोग करें, तभी समाज अपराध मुक्त हो सकता है ? हद है ऐसी पुलिस व्यवस्था को तत्कालीन रूप से इसे बंद कर देना चाहिए। पुलिस व्यवस्था एक दुकान चला रही है। पुलिस वाले अपनी नैतिक मूल्य खो बैठे और आज पुलिस या थानों तक जाना मजबूरी ही हैं। तो और गुप्तेश्वर पांडेय पुलिस महानिदेशक होते हुए, दिन रात युवाओं को आह्वान कर पुलिस की गरिमा गिराने का प्रयास करते रहते। पुलिस महानिदेशक गुप्तेश्वर पाण्डेय की फेसबुकिया विचार का परिणाम है कि आज पूरा बिहार अपराध युक्त हो चुका है।

14-Aug-2019 12:02

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