10-Feb-2019 03:06

बैंड मास्टर के किरदार को जीवंत किया रवि मिश्रा ने

पटना 10 फरवरी जाने माने रंगकर्मी और अभिनेता रवि मिश्रा ने बैंड मास्टर में अपने निभाये टाइटिल किरदार को जीवंत कर दिया।

राजधानी पटना के कालिदास रंगालय में अदाकार ख्वाहिश संस्था की ओर से ‘बैण्ड मास्टर’ नाटक का सफल मंचन हुआ। प्रशांत चटर्जी लिखित और रवि मिश्रा निर्देशित नाटक बैंडमास्टर में रवि मिश्रा ने बैंड मास्टर का टाइटिल किरदार निभाकर दर्शकों को रोमांचित कर दिया। रवि मिश्रा के अलावा आजाद शक्ति, सुभाष चंद्रा, ओम कपूर, नवीन कुमार अमूल, विवेक ओझा, दीपक श्रीवास्तव , रंजन कुमार और शिव प्रसाद ने अपनी बेहतरीन अदाकारी से दर्शकों का दिल जीत लिया। संगीत श्रीमती लक्ष्मी मिश्रा का रहा। इसके अलावा संगीत संचालन हर्ष आजाद , मंच व्यवस्था सुभाष चंन्द्रा ,वस्त्र सज्जा माधुरी शर्मा, प्रकाश ,रीतेश परमार ,रूप सज्जा रवि मिश्रा ,छाया चित्र राजू मिश्रा पार्श्व सहायिका सुनंदा सिन्हा रही। उदघोषक की भूमिका में संजय किशोर रहे।

इस अवसर पर वरिष्ठ रेल पदाधिकारी दिलीप कुमार, अनु आनंद कंस्ट्रक्शन के सीएमडी विमल कुमार, समाज सेवी अजीत चौधरी, फरीद हुसैन खान और गायिका नीतू नवगीत उपस्थित रहीं। आंगतुंक अतिथियों को फूल का गुलदस्ता देकर सम्मानित किया गया। नाटक ‘बैण्ड मास्टर’ में दिखाया गया कि संगीत एक पूजा है। इबादत है इसे पाने के लिए अपने आप को खोना पड़ता है, साधना करनी पड़ती है, रियाज करना पड़ता है। आजकल के शौकिया गायक और वादक बिना अभ्यास के केवल और केवल कमाई करना चाहते हैं।

यह बात जब बैंड मास्टर नरसू मियां अपने शिष्यों को क्लेरनेट सिखाने के समय डांटते हैं तो उसके चेहरे का भाव बताता है कि वह कितना दुखी है। आज की युवा पीढ़ी, जिसके पास सीखने के लिए न समर्पण है, न समय है, वह तो आनन-फानन में आधा-अधूरा शिक्षा लेकर पैसे कमाने की होड़ में शामिल होना चाहता है।

आधुनिकता के दौर में लोगों की मांग कम होने से आज की नई पीढ़ी बैंड मास्टरी या इससे जुड़े साजों से दूर हो रहे हैं। यहां तक कि एक अनाथ अली को पाल-पोसकर बैण्ड मास्टर बनाने का सपना तब उसे टूटता दिखता है, जब अली कहता है कि क्या रखा है बैंड में, इससे दो जून की रोटी भी नसीब नहीं होती। कितने सट्टा मिलते हैं मियां, यह सुनकर वह टूट जाता है। इस दिन के लिए उसने अपनी जिंदगी खराब कर दी। वह पुरानी दिनों के याद में खो जाता है। कुछ दिनों बाद एक ग्राहक सट्टा लेकर आता है। शिष्य हजरत के बेसुरे धुन से जब ग्राहक वापस जाने लगता है, तभी उसे अपमानित ना करते हुए और पार्टी का नाम खराब ना करते हुए बैंड मास्टर क्लेरनेट पर तान छेड़ता है, आवाज में वही कशिश, वही सुर सुनकर सभी मंत्रमुग्ध हो जाते हैं। पार्टी की शान बरकरार रखने के लिए जान न्यौछावर कर देता है।

10-Feb-2019 03:06

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