13-Oct-2019 12:48

अवैध हथियार बंदी की जगह हथियार मुक्त भारत बनाने का प्रयास करें

यह कौन सी राष्ट्रवादी अभिव्यक्ति चल रही है। यह कौन सा राष्ट्रवाद है जो भारत के अंदर लगातार आम आदमी की हत्या हो रही है।

नोट बंदी की हिम्मत हो सकती है राफेल उड़ाने की हिम्मत हो सकती है। बुलेट ट्रेन की हिम्मत हो सकती है। लेकिन यह औकात नहीं हो सकती है कि हम अवैध हथियारों का व्यापार भारत में बंद करें। यह कौन सी राष्ट्रवादी अभिव्यक्ति चल रही है। यह कौन सा राष्ट्रवाद है जो भारत के अंदर लगातार आम आदमी की हत्या हो रही है। और देश के प्रधानमंत्री से लेकर के गृह मंत्री राष्ट्रवाद के गुणगान गाते हैं। जो राष्ट्र के अंदर भारत के लोग ही नहीं रहेंगे। तो क्या राष्ट्रवाद अमेरिका के ट्रंप के साथ अपना संबंध बनाकर निभाएगा। यह कभी संभव नहीं है ना तो चीन आपके साथ आकर खड़ा होगा ना। आपके साथ दुनिया का कोई राष्ट्र जब भारत ही नहीं होगा।  तो हम करेंगे, क्या इन रफेल का अब भी वक्त है। राष्ट्रवाद के नाम पर रफेल के नाम से सुरक्षा के नाम पर और सेनाओं के नाम पर आम आदमी को पीसना बंद करें। अगर बंद करने की औकात है तो अवैध हथियारों का सरजमी मातृभूमि से खत्म राष्ट्रवादीता, तब सफल होगी। जब भारत के आम आदमी अवैध हथियारों से मरना बंद करें।

यह राष्ट्रवादी व्यवस्था आम आदमी से होकर क्या नहीं जाती कि आप राष्ट्र की सुरक्षा के नाम पर। देश के अंदर अवैध हथियारों का जखीरा बनाकर रखा हुआ है और इस जखीरे का स्थिति यह है। कि हर दिन लोग मर रहे या मर रहे हैं या मारे जा रहे हैं। इसके लिए है कौन जिम्मेवार एक मामूली सी बात बताता हूं। पिछले हफ्ते जो महनार में एक आदमी पर गोली चलाई गई। महनार के थाना प्रभारी से हमने पूछा कि क्या वह गोली लाइसेंसी हथियार से चलाई गई थी। उन्होंने कहा नहीं तो हमने पूछा कृपया अवैध हथियार आता कहां से ? उन्होंने जवाब दिया, बहुत लोगों के पास हैं। अवैध हथियार तब मेरा सवाल था तो इस अवैध हथियार का लोगों तक पहुंचने की जिम्मेवारी या पहुंचाने की जिम्मेवारी या इस अवैध व्यवस्था को खत्म करने की जिम्मेदारी किसकी है। अवैध हथियार से गोलीबारी हुई, हत्या हो रही है। उसके लिए जिम्मेदार कौन है ? तो महनार थाना प्रभारी कहते हैं कि आप हमें ही मान लें ? कि हम ही जिम्मेवार हैं और इतने में जिम्मेवारी या आप आगे बोलने लायक नहीं बचते हैं ।  क्यों नहीं वैशाली पुलिस अधीक्षक उन सभी थाना प्रभारियों पर कार्रवाई करते हैं ? जिनके क्षेत्र में अवैध हथियार से किसी की हत्या होती है। थाना प्रभारियों पर अपने क्षेत्र में अवैध हथियार के सप्लाई के लिए दोषी करण करते हुए, उन्हें 5-10 सालों की सजा हो।

यह समस्या सिर्फ वैशाली की नहीं है, यह समस्या आज पूरे भारत में अपना अस्थाई घर बना चुकी है और बहुत आसानी से। लोगों को हथियार मिल जाते हैं जबकि लाइसेंस लेने जाए, तो एक साधारण थाना अध्यक्ष से लेकर के पुलिस अधीक्षक और उसके बाद जिलाधिकारी ऐसे प्रश्न करते हैं। जैसे एक अपराधी द्वारा अपनी सुरक्षा की बात कर रहा हो। जबकि अपराधियों के साथ प्रशासनिक तंत्र की रिश्ते बहुत मजबूत होते हैं ।  क्योंकि उनका मार्गदर्शन उनके राजनीतिक गुरु करते हैं ।  अगर अपने राजनीतिक गुरुओं की बात नहीं मानेंगे। तुम्हें जिले में पदस्थ अपना नहीं मिलेगी। तो क्या राजनीतिक दोनों की या सत्ता भोगियों की शक्ति के सामने प्रशासनिक तंत्र अपने आप को विवश और नंगा समझती हैं। यह बहुत दुर्भाग्य है कि लोकतंत्र की भूमि वैशाली क्षेत्र में लगातार हत्याओं का दौर चल रहा है। लूट, डकैती दिन प्रतिदिन लगातार बढ़ रहा है। लेकिन किसी भी प्रकार से पुलिस की भूमिका नजर नहीं आती है।

बड़े ही मजेदार बात यह है कि पिछले कुछ महीने पहले बिहार के प्रमुख पुलिस विभाग के पदाधिकारियों द्वारा बिहार वैशाली जिले का समीक्षा हुआ। वह कैसे पुलिस पदाधिकारी थे और कैसी समीक्षा करके गए। अपराध उनके जाने के साथी और तेजी से बढ़ गया। बहुत लोग कहते हैं कि मानवजीत सिंह ढिल्लों संवैधानिक तौर से तो नहीं। लेकिन गैर संवैधानिक ढंग से अपराधियों पर नियंत्रण करने के लिए अपराधियों के माध्यम से उनकी हत्या करा रहे थे। क्योंकि वह खुद एनकाउंटर करने में सरकार को जवाब नहीं दे पाते। बड़े मजेदार सी बात यह है कि लगातार 2 % के से ज्यादा अपराधी तो नहीं मरे, लेकिन 98% आम आदमी लगातार मर रहे। फिर भी वैशाली पुलिस की कार्यशैली अंग्रेजी परंपराओं के समकक्ष ही नजर आती है। दुर्भाग्य की बात यह है की वैशाली जिला से सांसद देश के सर्वोच्च पद पर बैठे हुए हैं। और खुद के जिले के प्रति उनकी जिम्मेवारी कहीं नजर नहीं आती। देश की आम जनता को यह समझना पड़ेगा कि राष्ट्र आपके रहने के बाद ही राष्ट्र आपका होगा। इसलिए राष्ट्रवाद की का नशा क्षेत्रवाद की मजबूती के साथ ही संभव है।

13-Oct-2019 12:48

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