16-Oct-2019 11:29

आपदा प्रबंधन विभाग चाटुकारिता, राजनीतिक और दलाली में व्यस्त : सुनील पाण्डेय

सुनील पाण्डेय राष्ट्रीय अध्यक्ष ब्राह्मण विकास मोर्चा सह राष्ट्रीय सहसंयोजक राष्ट्रीय समान अधिकार संघर्ष समिति ने कहा कि मैं भी इस देश का एक जिम्मेदार नागरिक हूं

पूरा बिहार डूब गया ? सरकार, जनप्रतिनिधि और नौकरशाही सब की चुप्पी यह साबित करती हैं कि राजनीतिक दलों की कुंठा, उनकी भक्ति, चाटुकारिता, दलाली में सब खत्म हो गया। पटना पप्पू यादव की राजनीति में विश्व विख्यात हो गया और मिडिया के ख़ास वर्ग इसी को दिखाने में कामयाबी हासिल की। जबकि बिहार की 11 अरब आबादी में 75% लोग पानी से किसी ना किसी तरह प्रभावित हुआ। बिहार के उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी भी लगभग 15 सालों से सत्ताभोग रहे हैं और जब सुशील कुमार मोदी की जो गत हुआ, वह बिहार की पूरी दशा-दिशा व्यक्त कर दिया। बिहार में उपमुख्यमंत्री के रूप में सुशील कुमार मोदी का इतना लंबा सफ़र कितना सुहावना रहा है वह उनकी हाफ पैंट ने बिहार की दशा को नंगा कर रख दिया। वहीं राजनीतिक दलों की राजनीतिक षड्यंत्र के तहत सिर्फ आम आदमी परेशान हुआ, पर हाफ पैंट वाले जनता का पैसा की लूट का सही स्थिति दर्शा दिया।

बिहार की इस जल-जमाव और उत्तर बिहार की स्थिति पर प्रकाश डालते हुए, सुनील पाण्डेय, राष्ट्रीय अध्यक्ष, ब्राह्मण विकास मोर्चा सह राष्ट्रीय सहसंयोजक राष्ट्रीय समान अधिकार संघर्ष समिति ने कहा कि मामूली बरसात ने सरकार के आपदा प्रबंधन विभाग की कलई खोल दी। अभी-अभी बाढ़ के कहर से बिहार के लोग उबर भी नहीं पाये थे कि इस बरसात ने वही स्थिति ला कर लोगों को तबाह कर दिया। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में कहीं उचित राहत कार्य नहीं चल पाया। जिला के पदाधिकारी ने सरकार के निर्देश पर  आंशिक बाढ़ प्रभावित होने का गलत रिपोर्ट भेजा।  सुखाड़ के बाद बाढ़ और अब बरसात। बिहार के किसानों के लिए शनि, राहु और केतु तीनों मिलकर कंगाली का कारण बन गया। जिनके घर में बाढ़ का पानी नहीं घुसा वो बाढ़ प्रभावित नहीं माना गया। पर भाई, अनाज क्या घर में उपजता है ? मुजफ्फरपुर जिले के कई प्रखंड न तो बाढ़ प्रभावित माना गया न सुखाड़ और अब न बरसात। तो इन क्षेत्रों में कौन सी स्थिति थी, इसकी व्याख्या तो सरकार के तंत्र ही कर सकते हैं। मासुम जनता ये नहीं समझ पायी कि इसमें कौन सी बाजीगरी है, कारण साफ है, देश कंगाली में है, अर्थव्यवस्था चरमरा चूकी है, जिस सरकार को इतनी बड़ी जनादेश देकर भेजा, वो इनके उम्मीदों को लूटते का काम किया।

जनता बाढ़, सुखाड़ और बरसात से परेशान हैं और जनता के होनहार करिश्माई प्रधानमंत्री विदेशी टुर पर कंगाल देश के पैसों से मौज कर वाहवाही लूट रहें हैं।  इस स्थिति पर बचपन का एक प्रसंग याद दिलाना चाहता हूं --- गांव, देहात में रात में जब कोई बच्चा  भूख से तड़पते हुए अपने मां, नानी-दादी को परेशान करता, तो उसकी मां, नानी-दादी उसे बहलाते हुए, फूसलाते हुए, एक लोड़ी सुनाती। चंदामामा अरे, आव पारे आव सोना के कटोरा में दुध भात लेले, आव बबुआ के मूंह में घुटुक और अपना हाथ बच्चे के मूंह में हटाती और बच्चा यैसे सो जाता जैसे उसका पेट भर गया हो। ठीक यही सोना की कटोरी वाला दुध-भात, मोदी जी भारतीयों, उद्योगपतियों और किसान,  नौजवानों के लिए लाने का जूमला सुना रहे हैं। भारत की जनता, बिहार की जनता, अब ऐसे बहकावे में नहीं आएगी। वंशवाद का विरोध का ढोंग कर वंशवादियों, जातिवादियों के साथ ही मिलकर सरकार चलाने का खेल अच्छे दिन की सरकार चल रही हैं। लोग अब धीरे-धीरे समझ रहे हैं, जनता अब विकल्प तलाश रही है, अगर नहीं संभले, तो जूमला बाबू के चक्कर में सुसाशन सरकार की भी विदायी तय है।

सुनील पाण्डेय राष्ट्रीय अध्यक्ष ब्राह्मण विकास मोर्चा सह राष्ट्रीय सहसंयोजक राष्ट्रीय समान अधिकार संघर्ष समिति ने कहा कि मैं भी इस देश का एक जिम्मेदार नागरिक हूं। सुनील पाण्डेय ने कहा कि एक जिम्मेदार नागरिक के नाते बता रहा हूं कि देश की राजनीति को एक बहुत बड़े बदलाव की जरूरत है। वहीं अब यह मौका 2024 में ही मिलेगा, जब भारत के एक लोकतांत्रिक राष्ट्र को एक लोकतांत्रिक प्रधानमंत्री दे पाएगा। लेकिन अब सही वक्त पर बिहार को बारिश ने आगाह कर दिया और रही सही कसर सुशील कुमार मोदी ने हाफ पैंट में आकर संकेत दे दिया। बिहार को यह समझ लेना चाहिए कि अब हम विचार, विश्वास और अच्छे दिन की बात पर आगे बढ़ने से कदम रोकेंगे। अच्छे दिन आने वाले दिनों की आस में लगभग 6 साल बाद भी स्मार्ट सिटी पटना, भागलपुर और पटना की दशा नरेंद्र मोदी की रैली पर पानी फेर दिया। वहीं लगभग 75% आबादी इससे प्रभावित हुई और आज वर्तमान स्थिति में बिहार की दिशा हमें समझना होगा। अब कोई चुनावी चुनौती नहीं और ना जुमलेबाजी। अब परिवर्तन की बात और युवाओं का भविष्य, युवाओं का बिहार बनेगा।

16-Oct-2019 11:29

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