09-Oct-2019 11:06

एक अधूरी प्रेम कहानी, जिसने तोड़ा था अकबर का अभिमान

सुल्तान बाज बहादुर और रानी रूपमती के प्यार के साक्षी मांडू में 3500 फीट की ऊंचाई पर बना रानी रूपमती का किला है

इतिहास के पन्नों से निकलकर एक प्रेम कहानी दस्तक दे रही है। प्रेम कहानी एक मुस्लिम राजा और मानी हिंदू लड़की की। गांव की एक बेहद खूबसूरत अल्हड़ सी लड़की अपनी सहेलियों के साथ कुछ गुनगुनाते हुए जा रही थी। तभी एक कलाप्रेमी सुल्तान की इस लड़की पर जा टिकी। वह इस अप्रतिम सौंदर्य औऱ सुरीले कंठ का दीवाना हो गया और मांडू के सुल्तान ने सांरगपुर की इस मानी लड़की के सामने विवाह का प्रस्ताव रख दिया। इस जादुई प्रेम कहानी में युद्ध, प्यार, संगीत और कविता का अद्भुत मेल है। रुपमती एक किसान की बिटिया, मालवा की गायिका थी सुल्तान बाजबहादुर उनके इश्क में गाफिल। बाज बहादुर मांडू के अंतिम स्वतंत्र शासक थे । रूपमित अपने गुण के अनुसार बेहद खूबसूरत और सुरीले कंठ की मल्लिका। उनके रूप औऱ गुण के मुरीद बाज बहादुर ससम्मान उन्हें महल में लाए और दोंनो ने हिंदू औऱ मुस्लिम दोनों ही रीति-रिवाजों से शादी कर ली। रूपमती इतनी मानवती थी कि विवाह के बाद भी उन्होंने ना हिंदू धर्म छोड़ा ना ही मां नर्मदा के दर्शन के बाद भोजन लेने का अपना व्रत। अपनी माशूका से शादी करने के लिए बाजबहादुर नर्मदा की नहर को महल तक लेकर आए थे।

कहते हैं ना इश्क और मुश्क छिपाए नहीं छिपता। रानी रूपमती के रूप और कंठ की चर्चा बादशाह अकबर तक भी पहुंची। वो बिना देखे ही रूपमती पर मोहित हो गया औऱ यह प्रेम कहानी परवान चढ़ने से पहले ही मिटा दी गई। अकबर ने बाजबहादुर को एक खत लिखा। खत में रानी रूपमती को दिल्ली दरबार में भेजन का हुक्म था। इस खत को पढ़कर बाजबहादुर तिलमिला उठे। उन्होंने अकबर को पत्र लिखकर कहा कि वे अपने हरम की रानियां मांडू भिजवा दें। बाजबहादुर के जवाब से अकबर तिलमिला उठा। अंहकार औऱ गुस्से से भरे अकबर ने अपने सिपहसालार आदम खां को मालवा पर चढ़ाई करने का हुक्म दे दिया। आदम खां ने मालवा में खूब कत्लेआम मचाया और बाज बहादुर अपनी छोटी से सेना के साथ उसका मुकाबला नहीं कर पाया। भीषण युद्ध में बाजबहादुर की हार हुई और आदम खां ने सुल्तान को बंदी बना लिया। इसके बाद अकबर के सिपाहियों ने रानीवास की और कदम बढ़ाया। वे रूपमती को लेने मांडू की ओर चल पड़े। इसकी सूचना जैसे ही मानवती रानी रूपमती को चली, उन्होंने खुद को अकबर के हाथों में सौंपने की जगह जहर खाकर जान दे दी। उन्होंने हीरा निगल कर अपना जीवन समाप्त कर दिया। रानी रूपमती की मौत से अकबर को बड़ा सदमा लगा।

पछतावे की आग में अकबर ने बाजबहादुर को कैद से आजाद कर दिया। बाज बहादुर ने कहा कि वह वापस अपनी राजधानी सांरगपुर जाना चाहते हैं। सांरगपुर जाने के बाद बाजबहादुर ने अपनी प्रेमिका रानी रूपमती की मजार पर सिर पटक-पटक कर अपनी जान दे दी। इस घटना के बाद अकबर को अपने किए पर बेहद पछतावा हुआ। शर्मिंदिगी से भरे अकबर ने 1568 में सांरगपुर के समीप इन प्रेमियों के लिए एक मकबरे का निर्माण करवाया । बाज बहादुर के मकबरे पर अकबर ने 'आशिक ए सादिक' और रूपमती की समाधि पर 'शाहीद ए वफा' लिखवाया।इस तरह यह अधूरी प्रेम कहानी पूरी होने से पहले ही मिटा दी गई। लेकिन सदियों पहले एक हिंदू लड़की और मुस्लिम सुल्तान की यह प्रेम कहानी हमें सिखाती है कि धर्म औऱ मजहब से बड़ा प्रेम है। रानी रूपमती जब तक जीवित रहीं अपने संस्कारों को निभाती रहीं लेकिन सुल्तान के प्रति उनकी निष्ठा और प्रेम भाव सर्वोपरी था। वहीं बाजबाहादुर ने अपनी प्रेमिका को पत्नी बनाने के लिए नर्मदा को महेश्वर से मांडू तक लेकर आने का बीड़ा पूरा किया।

कहते हैं ये दोनों प्रेमी एक दूसरे से इतना प्यार करते थे कि बिना बोले हर बात समझ जाते थे। सुल्तान बाज बहादुर और रानी रूपमती के प्यार के साक्षी मांडू में 3500 फीट की ऊंचाई पर बना रानी रूपमती का किला है। यहां के झरोखे से रानी रूपमती नर्मदा के दर्शन करती थी उसके बाद ही अन्न ग्रहण करती थी। रानी रूपमती की रक्षा के लिए राजा बाजबहादुर ने पहले अपना महल बनवाया था उसके बाद रूपमती का। रानी रूपमती के महल में जाने के लिए पहले बाजबहादुर के महल से होकर गुजरना पड़ता है। आज भी रानी रूपमती के किले को राजा बाजबहादुर और रानी रूपमती की प्रेम कहानी का प्रतीक माना जाता है। कहने वाले तो यह भी कहते हैं कि दोनों प्रेमियों की पवित्र रूहें आज भी इन्हीं खंडहर हो चुके महल में रहती हैं।

09-Oct-2019 11:06

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