07-Aug-2019 11:07

खुशियों की दुनिया घरों के बाहर निकल कर आत्मीय संतुष्टि प्राप्त होता हैं : आलोक राय

दो मिनट का समय निकाल कर पूरा अवश्य पढ़े ! हो सकता है आपका दो मिनट किसी पीड़ित बुजुर्ग महिला-पुरुष की जिंदगी बदल सकता है

यह एक सोच़ जो किसी किताबों में नहीं मिलती, यह तो संस्कार हैं जो पूर्वजों के आशीर्वाद से ही प्राप्त होता हैं। आलोक राय जो मुलत: बलिया के रहने वाले इलाहाबाद में रहकर एक अनुभव ले रहें हैं। एक ऐसा अनुभव जो खुद महसूस कर कर रहे हैं। आलोक बताते हैं कि मेरी आप सभी से एक विनती है की आप के आस-पास पड़ोस, ग्रामसभा, शहर में कोई ऐसा *बुजुर्ग जो 60 वर्ष या इससे अधिक आयु के निराश्रित अथवा परिवार से पीड़ित महिला या पुरुष हो* ! उनकी आर्थिक स्थिति बेहद दयनीय हो एवं जिसके लड़के बुज़ुर्ग माता-पिता को प्रताड़ित करते हो तो ऐसे बुजुर्ग के लिये मंझँनपुर, जनपद- कौशाम्बी में निःशुल्क वृद्धा आश्रम* में रह सकते हैं।

आलोक राय लगातार अपने रूटिन जीवन में से समय निकाल कर वृद्धों के साथ खुशियां बांटने निकल पड़ते हैं। उनका आग्रह है कि यदि इस तरह के *वृद्धजन (माता-पिता)* जो किन्ही कारणों से *कठिन परिस्थितियों* का सामना कर रहे है ! उन्हें *वृद्धा आश्रम* के पते पर भेजने, सूचना देने अथवा पहुंचाने का कष्ट करें। ताकि हम उन्हें खुशहाल जिंदगी दे सके ! आप सभी का सहयोग वृद्धजनों के जीवन में नया सबेरा ला सकते है ! नई नई उम्मीद के साथ बुजुर्ग अपने को पालते हैं, पर उन्हें पालने के वक्त सड़कों पर छोड़ जाते हैं। अपने माता-पिता को किसी को छोड़ना ही हैं, हम तक पहुंचने का काम करें या हमें सूचना ही दें।

एक वाकया बताया कि कैसे प्रयागराज में रोड के किनारे मिली बुज़ुर्ग महिला को वृद्धाश्रम संचालक ने बिस्कुट खिला कर पानी पिलाया। वे बोलने में बहुत असमर्थ थी, क्योंकि बहुत दिनों से ना ही खाना खाईं थी, ना ही पानी पी थी। आज के समय मे बुज़ुर्गों की सेवा नहीं करना चाहता है कोई। क्योंकि यह ऐसा उम्र होता है कि बुज़ुर्ग कुछ काम तो नहीं करते, लेकिन परेशान होते है। और परेशान करते भी है, इसका ये मतलब नहीं की घर से बाहर निकाल दे। ख़ैर बुज़ुर्गों की सेवा करने में बहुत ही मुझे मन लगता है। बच्चे और बूढ़े एक समान होते है। इस उम्र में इनको सब कुछ का ख़्याल रखते हुए ख़ुश रखना पड़ता है।क्योंकि बुज़ुर्ग तो सबको एक दिन होना है, यही सच्चाई है।

छोटे-छोटे टुकड़े में खुशियों को संग्रह करते हैं। कभी भारत देश में पेड़-पौधों का आध्यात्मिक मूल्य समझकर तो कभी अन्य रचनात्मकता के साथ। बुजुर्ग अभिभावक बताते हैं और आगे बढ़ कर कहते हैं, हमारे देश भारत में वृक्षों की पूजा की जाती है। कुछ महत्वपूर्ण पेड़-पौधे जैसे बरगद, पीपल, आम, बेल, केला है। जिन्हें भगवान का दर्जा दिया गया है। पेड़ पौधे हमारे जीवन और पर्यावरण में एक शांत और आरामदायक वातावरण को बनाए रखते है।इससे जीवन का स्तर भी बढ़ जाता है। वृद्धाश्रम संचालक आलोक राय ने वृद्घजनो के साथ मिलकर संयुक्त चिकित्सालय कौशाम्बी में आम और जामुन का पेड़ लगवाया। आलोक राय लगातार बुजुर्ग अभिभावक को अपने जीवन का अंग बनाकर सेवारत हैं। एक और बातों में बताया कि हमारी बंगाल की दादी रेखा बनर्जी जी उम्र 80 वर्ष है। इनको ख़ुश रखने के लिए बच्चों की तरह कभी कल खेलाना पड़ता है। बच्चे और बुज़ुर्ग एक समान होते है जैसे उनको ख़ुश रखा जाए।

07-Aug-2019 11:07

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