25-Apr-2018 05:06

डांसिंग की दुनिया में खास पहचान बनायी राकेश राज ने

 खोल दे पंख मेरे, कहता है परिंदा, अभी और उड़ान बाकी है,

  बंदे है हम उसके हम पर किसका जोर | उम्मीदो के सूरज, निकले चारो और ||         इरादे है फौलादी, हिम्मती है कदम ||| अपने हाथो किस्मत लिखने आज चले है हम।        अपनी मेहनत और लगन से राकेश राज आज के दौर में डांस की दुनिया में धूमकेतु की तरह छा गये हैं ।उनकी ज़िन्दगी संघर्ष, चुनौतियों और कामयाबी का एक ऐसा सफ़रनामा है, जो अदम्य साहस का इतिहास बयां करता है। राकेश राज ने अपने करियर के दौरान कई चुनौतियों का सामना किया और हर मोर्चे पर कामयाबी का परचम लहराया।       वर्ष 1996 में राजधानी पटना में जन्में राकेश राज के पिता सत्य नारायण चौधरी और मों कौशल्या देवी घर के लाडले छोटे बेटे को अपनी राह खुद चुनने की आजादी थी। राकेश जब महज 10 वर्ष के थे तब उनके सर से पिता का साया उठ गया । इसके कुछ वर्ष मां भी चल बसी। बड़े भाई उमेश कुमार और राजेश कुमार ने राकेश की परवरिश की। बचपन के दिनों से ही राकेश राज को गीत और संगीत के प्रति गहरी रूचि रही थी। मशहूर धमेन्द्र लांडे को आदर्श मानने वाले राकेश राज उन्ही की तरह बतौर डांसर अपनी पहचान बनाना चाहते थे और इसी को देखते हुये उन्होंने वर्ष 2010 में डांस सीखना शुरू कर दिया।          वक़्त आने दे दिखा देंगे तुझे ऐ आसमाँ             हम अभी से क्यूँ बताएँ क्या हमारे दिल में है। राकेश राज की मेहनत रंग लायी और जल्द ही वह बतौर डांसर अपनी पहचान बनाने में कामयाब हो गये।राकेश राज ने इसके बाद डांस कंपटीशन में हिस्सा लेना शुरू कर दिया। वर्ष 2013 में राकेश राज को हाजीपुर में हुये डांस कंपटीशन उत्सव में शिरकत करने का अवसर मिला और उन्होंने विजेता का ताज अपने नाम कर लिया। वर्ष 2014 में भी राकेश राज ने उत्सव डांस कंपटीशन में हिस्सा लिया और इस बार भी विजेता का ताज अपने नाम कर लिया।                 जुनूँ है ज़हन में तो हौसले तलाश करो                 मिसाले-आबे-रवाँ रास्ते तलाश करो इज़्तराब रगों में बहुत ज़रूरी है                 उठो सफ़र के नए सिलसिले तलाश करो 2014 मे राकेश राज को राजधानी पटना में हुये डांस टैलेंट हंट शो द वेस्ट डांसर ऑफ बिहार में शिरकत करने का अवसर मिला और उन्होंने विजेता का ताज अपने नाम कर लिया। वर्ष 2015 राकेश राज के करियर के लिये अहम वर्ष साबित हुआ। इस वर्ष उन्हें डासिंग शो बिहार सुपर डांसर में परफार्म करने का अवसर मिला । दिलचस्प बात है कि राकेश राज को उनके आदर्श धर्मेश लांडे के सामने डांस करने का अवसर मिला जहां वह दूसरे स्थान पर रहे। भले ही राकेश राज ने विजेता का ताज अपने नाम नही किया लेकिन धर्मेश लांडे ने उनकी मुक्त कंठ से प्रशंसा की और कहा कि तुम तुम्हारे अंदर वह काबलियत है कि तुम रियलिटी शो के विजेता बन सकते हो।          खोल दे पंख मेरे, कहता है परिंदा, अभी और उड़ान बाकी है,         जमीं नहीं है मंजिल मेरी, अभी पूरा आसमान बाकी है,         लहरों की ख़ामोशी को समंदर की बेबसी मत समझ ऐ नादाँ,        जितनी गहराई अन्दर है, बाहर उतना तूफ़ान बाकी है…         कुछ कर गुजरने का जज्बा हो तो कोई भी काम नामुमकिन नहीं। इस बात को साबित कर राकेश राज ने।राकेश राज ने जानी मानी कोरियोग्राफर और डांसर नीलम सिंह के साथ मिलकर वर्ष 2016 में बार्न टू डांस एकेडमी  शुरूआत की। इसके बाद राकेश राज  कॉलेज और स्कूल में होने वाले डासिंग कार्यक्रम को कोरियोग्राफ करने लगे। राकेश राज बतौर कोरियोग्राफर अपनी पहचान बना चुके थे। राकेश राज को अब बतौर जब डांस शो में आमंत्रित किया जाने लगा। हाजीपुर में हुये डांस कंपटीशन उत्सव में जहां उन्हें परफार्म करने का अवसर मिला था अब उन्हें जज के तौर पर आमंत्रित किया गया। इसके साथ ही राकेश राज ने बनारस में हुये चुनार कंपटीशन के अलावा गीत गाता चल , आई फिल समेत कई डांसिंग शो मे बतौर जज शिरकत करने का अवसर मिला।      राकेश राज आज डासिंग की दुनिया में  कामयाबी की बुलंदियों पर है। राकेश राज अपनी सफलता का श्रेय अपने दो बड़े भाई उमेश कुमार और राजेश कुमार को देते है जिन्हें हर कदम उन्हें सपोर्ट किया है। राकेश राज अपनी सफलता का मूल मंत्र इन पंक्तियों में समेटे हुये हैं। राकेश राज का मानना है कि कामयाबी के सफ़र में मुश्किलें तो आएँगी ही  परेशानियाँ दिखाकर तुमको तो डराएंगी ही, चलते रहना कि कदम रुकने ना पायें।         अरे मंजिल तो मंजिल ही है एक दिन तो आएगी ही।

25-Apr-2018 05:06

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