03-Apr-2018 06:28

भारत से बड़ा होता देश में जातिवाद

राजनीति के स्तर में तेजी से आई गिरावट ने भारत को भारत रहने देने को तैयार नहीं, कब हम जाति की जगह भारत लिखना और सोच़ना शुरू करेंगें।

आरक्षण अभिशाप नहीं हैं वरदान है, मगर उसके लिए जिसको दो जून की रोटी के लिए तरसना पड़ता हैं। कौन है वो लोग जिन्हें भारत में आस्था नहीं है और जाति का बीज बोये जा रहा हैं। मानवीय मूल्यों को लेकर संवेदना मर सी गई हैं, तो उसका मूल स्वरूप है शिक्षा और शिक्षण प्रतिष्ठानों का अपने मूल में ना आ पाना। सोमवार को पूरा भारत जला और नहीं जला तो राजनेताओं की अंदर का रावण। एक दूसरे को नीचा दिखाने की होर ने मानवता और मानव को एक दूसरे से दूर कर दिया है। जिनकी जिम्मेदारी है कि अपने समाज और जाति का पेट भरें वहीं उनके रोटियों में सेंधमारी कर रहे हैं। जिम्मेदारी भरे लोग ही सदन के हर स्वरूपों को दलाली का अड्डा बना दिया हैं। जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक हाथ पर हाथ रखें किसी चमत्कार का इंतजार करते रह रहे हैं। लेकिन चमत्कार के नाम पर अपने ही लोगों का वजूद खत्म कर रहे हैं। अब समय आ गया है कि हम सब सुधर जाए और धर्म, जाति के नाम पर भारत माता पर आघात नहीं करें। मानवीय मूल्यों को जीवंत करें।

03-Apr-2018 06:28

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