25-Mar-2018 03:16

मदरना मे लगा भव्य रामनवमी मेला ।

अत्याचारी का विनाश कर समाज में शांति और भाईचारा स्थापित किया।

भगवान श्री राम के जन्मोत्सव के अवसर पर आज हिन्दूओ के द्वारा भव्य श्री राम जन्मोत्सव शोभायात्रा निकाली गई.यह शोभा यात्रा मंगुराही से निकलकर रामचौरा मंदिर पहुंची.इस भव्य शोभायात्रा में हजारों युवक भगवा झंडे के साथ जय श्रीराम का नारा लगाते हुए चल रहे थे.आज पूरा शहर भगवामय नजर आ रहा था. वही जिले के मदरना गाँव मे मेला का आयोजन किया गया , मेला का आनंद बहुत ही शानदार रूप से उठाए मौके पर हाजीपुर से चलकर पहुचे लोगो ने भी मेले का आनंद उठाऐ। क्यों मनाया जाता है रामनवमी ? मनु और शतरूपा के अथक और कठोर तपस्या करने पर भगवान विष्णु प्रकट हुए और वरदान मांगने को कहा.वरदान में मनु और शतरूपा ने मांगा की हे भगवान! हमें आपके जैसे ही पुत्र रत्न की प्राप्ति हो.भगवान सोच में पड़ गए."आप सरिस कहां खोजन जाऊं", लेकिन वचनबद्ध होने के कारण वरदान तो देना ही था,तो भगवान ने कहा कि त्रेता युग में मनु राजा दशरथ होंगे और शतरूपा आप की रानी कौशल्या होगी तब आपके यहां मैं स्वयं जन्म लूंगा.अपने वचनानुसार भगवान विष्णु राजा दशरथ और कौशल्या के घर सातवें अवतार के रूप में प्रकट हुए."भए प्रगट कृपाला,दीन दयाला कौशल्या हितकारी",लेकिन महारानी कौशल्या भगवान के उस रूप को देखकर डर गई और हाथ जोड़कर बोली.इस रूप में नहीं, बालक के रूप में मेरी गोद में. तब भगवान मुस्कुराए और अबोध बालक बनकर कौशल्या की गोद में खेलने लगे.यह प्रगटीकरण चैत मास के नवमी के दिन हुआ था. इसी दिन को हम श्री राम के जन्म दिवस के रुप में मनाते हैं और यह रामनवमी कहलाता है.समुंद्र को उसके उचित सम्मान देने और उसकी मर्यादा को बरकरार रखने के कारण भगवान राम को मर्यादा पुरुषोत्तम भी कहा गया.भीलनी जाति की महादलित स्त्री शबरी के जूठे बेर खाकर राम ने जात-पात ऊंच-नीच का महत्व ना देकर उसके स्वच्छ हृदय और भक्ति को महत्व दिया.गिद्ध जन्मजात मांसाहारी जीव होता है,गिद्ध जटायु को सीता हरण जैसे आपराधिक कांड में बाधक बनने और रावण द्वारा घायल किए जाने पर सद्गति की प्राप्ति कराई.इस प्रकार शाकाहार-मांसाहार का महत्व ना देते हुए कर्म की प्रधानता की सीख सिखाई.राम का संपूर्ण जीवन शोषण, अत्याचार,उत्पीड़न और विषमता के खिलाफ संघर्ष करने और सरलता -समता लाने में लगा रहा. ताड़का और सुबाहू जैसे अत्याचारी का विनाश कर समाज में शांति और भाईचारा स्थापित किया.हम अपेक्षा करते हैं कि देश दुनिया में लोग मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के जीवन का अंश मात्र भी आचरण अपने जीवन में लाने में अगर सफल रहते हैं तो निसंदेह हमारा जीवन धन्य हो जाता है.और सही मायनों में धरती पर राम राज्य स्थापित हो जाएगा. रविशंकर शर्मा

25-Mar-2018 03:16

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