14-Dec-2019 03:06

महिला उत्पीड़न जैसे संवेदनशील मुद्दे का राजनीतिकरण लेकिन महिला आरक्षण की जरूरत : मेनका रमन

महिला आरक्षण बिल को लेकर पूर्व से दिखायी होती तो शायद महिलाओं के सांख्यिकीय ताकत में बढ़ोतरी होने का मार्ग प्रशस्त होता लेकिन ऐसा ये इसलिए नही करेंगी क्योंकि इनको महिलाओं की चिंता कम और अपनी राजनीतिक रोटी सेंकने की चिंता अधिक है

संसद सत्र का आखिरी दिन जहां महिला सुरक्षा जैसे मुद्दों पर सार्थक चर्चा होनी चाहिए थी वहां आज महिला एवम बाल विकास मंत्री ने जिस तरीके से ऑफेनसिव होकर महिला सुरक्षा जैसे संवेदनशील मुद्दे पर सरकार का एवं अपने मंत्रालय का डिफेंस किया और और जिस तरीके से शब्द को विस्तारित किया वो राहुल गांधी के दिये गए बयान से भी शर्मनाक है क्योंकि स्मृति ईरानी के द्वारा राहुल गांधी के द्वारा तीन घृणित शब्दों को सैकड़ो घृणित शब्दों से विस्तार किया जिसे मैं अगर यूं कहूँ की विरोध का अंदाज काबिले तारीफ था लेकिन घृणित शब्दों और उन शब्दों से बने वाक्यों ने तो भारत की महिलाओं की आत्मा को झकझोड़ के रख दिया ।

हद तो तब हो गयी जब राहुल गांधी अपने बचाव में माननीय प्रधानमंत्री जी के पूर्व के ब्यान जो दिल्ली में दिए गए थे को लेकर उनका वीडियो ट्वीट किए और जब ये वीडियो देखा तो ऐसा लग की हमारा देश कहाँ जा रहा है ,देश के दो बड़े नेताओं के बयान एक ने रेप इन इंडिया कहा तो वही दूसरे ने रेप कैपिटल और रही सही कसर महिला बाल विकास मंत्री ने शब्दों को विस्तार देकर पूरी कर दी । क्या अब यही देखना बाकी रह गया था कि देश की दो बड़ी पार्टियाँ महिला उत्पीड़न से बचाव करने के बदले अपनी अपनी राजनीतिक रोटियां सेकती नजर आएंगी और नारी सम्मान दम तोड़ते हुए दिखाई देगा और सबसे बड़ी बात की महिला बाल विकास मंत्री ने जो तेवर आज दिखाए ।

वो महिला आरक्षण बिल को लेकर पूर्व से दिखायी होती, तो शायद महिलाओं के सांख्यिकीय ताकत में बढ़ोतरी होने का मार्ग प्रशस्त होता। लेकिन ऐसा ये इसलिए नही करेंगी, क्योंकि इनको महिलाओं की चिंता कम और अपनी राजनीतिक रोटी सेंकने की चिंता अधिक है और ये सिर्फ इन्ही के लिए नही संसद में पहुंची जितनी भी महिलाएँ है। उनके लिए भी है क्योंकि ये SC ST के आरक्षण के 10 % बढ़ोतरी को तो हँसते हँसते स्वीकार कर लेती है। लेकिन महिला आरक्षण बिल के लिए हिम्मत नही जुटा पाती है । वर्तमान परिपेक्ष्य में महिलाओं के साथ हो रहे जघन्य अपराध एक कैंसर की तरह है जो समाज को खोखला कर रहा है । इस देश मे महिलाओं को देवी का स्थान दिया गया था लेकिन आज इसी देवी स्वरूप माताओं बहनों की अस्मत लूटकर उन्हें जिंदा जला दिया जा रहा है । इसमें सुधार के लिए सबसे पहले लोगों को अपनी मानसिकता में सुधार की जरूरत है । अपने बेटों में संस्कार समाहित करने की जरूरत है और एकल परिवार से संयुक्त परिवार की तरफ बढ़ने की जरूरत है ।

हालांकि ये इतनी बिकट परिस्थिति है कि बेटियों को अपनी सुरक्षा के लिए खुद ही कमर कसनी होगी ।अपने आप को झांसी की रानी के रूप में पेश करना होगा नही तो ये क्रूर दानव रूपी समाज प्रत्येक दिन बेटियों ,बहुओं का शिकार करता रहेगा और ये नेता चाहे पक्ष में बैठे हो या विपक्ष में अपनी राजनीतिक रोटियां सेकते रहेंगे और आम जनता सिर्फ मोमबत्तियां जलाकर ,प्रदर्शन करके अपने गुस्से का इजहार करती रहेगी जैसा होता आया है । तो अब जरूरत आन पड़ी है हर बाप को अपनी बेटी को झांसी की रानी बनाना होगा तब ही जाकर ये अंधेरा खत्म होगा ।और निर्भया , डॉ दिशा और इनके जैसी हजारों महिलाओं के साथ हुए अत्याचार से न्याय दिलाना ताकि देश की आत्मा सुरक्षित राह सके ।

14-Dec-2019 03:06

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