11-Apr-2018 06:52

महिला है सम्मान हमारा और इसे समझों शिक्षा का द्वार

बहुमुखी प्रतिभा से लोगों के दिलों में खास पहचान बनायी अर्चना कुमारी ने जीने का अरमान है नारी , हम सबका सम्मान है नारी नारी नहीं तो जग सुना है कण कण में विद्यमान है नारी तुम इसको निर्बल ना समझो गीता फोगाट जैसी पहलवान है नारी निर्बल को सबल करती यह प्रबल स्

        जानी मानी समाजसेवी और शिक्षिका अर्चना कुमारी करीब एक दशक से शिक्षा के साथ ही महिला पर हो रहे अत्याचारों के खिलाफ और महिला सशक्तिकरण के लिए कई महत्वपूर्ण कार्य करने में लगी हुयी है। अर्चना अपनी व्यस्त जीवनशैली से समय निकालकर समाजसेवा में भी अपना पूरा योगदान देती हैं।         सपने उन्ही के पूरे होते है, जिनके सपनो मे जान होती है.        पँखो से कुछ नही होता, ऐ मेरे दोस्त!! हौंसलो से ही तो उड़ान होती है सपने उन्ही के पूरे होते है,         बहुमुखी प्रतिभा की धनी अर्चना कुमारी को  हाल ही में एनजीटाउन का फाउंडेशन डे और सीसीएल 2 के जर्सी लांच पर यंग अचीवर्स अवार्ड से सम्मानित किया गया है। इस समारोह का आयोजन एनजी टाउन के सीएमडी (संजय सिंह और नमिता सिंह ) द्वारा प्रायोजित कॉर्पोरेट क्रिकेट लीग (सी.सी.एल.) सीजन-2 की जर्सी लॉन्चिंग के उपलक्ष्य में किया गया जिसमे यंग अचीवर्स अवार्ड से उन 25 महिलाओं एवं पुरुषों को सम्मानित किया गया। जिन्होंने अपने-अपने क्षेत्र में राज्य एवं देश का नाम रौशन करने के साथ-साथ समाज के लिए प्रेरणादायी कार्य किया है।         बिहार के नवादा शहर की रहने वाली अर्चना कुमारी ने वर्ष 1991 में अर्चनाने टीचर्स ट्रेनिंग की शिक्षा पूरी की। इसके बाद उन्होंने भागलपुर यूनिवर्सिटी से स्नातक की पढ़ाई पूरी की। अर्चना कुमारी उन दिनों पहली महिला आईपीएस किरण बेदी को अपना रोल मॉडल मानती थी और उन्हीं की तरह बनना चाहती थी। वर्ष 1996 में अर्चना शादी के अटूट बंधन में बंध गयी। उनके पति श्री विपीन कुमार प्रशासनिक अधिकारी है जो उन्हें हर कदम सर्पोट करते हैं। जहां आम तौर पर युवती की शादी के बाद उसपर कई तरह की बंदिशे लगा दी जाती है ।लेकिन अर्चना के साथ ऐसा नही हुआ। अर्चना के पति के साथ ही ससुराल पक्ष के लोगों न उन्हें हर कदम सर्पोट किया।         कुछ कर गुजरने का जज्बा हो तो कोई भी काम नामुमकिन नहीं। इस बात को साबित कर दिखाया अर्चना कुमारी ने। बचपन के दिनों में फैशन की भी रूचि रखने वाली अर्चना वर्ष 2004 में दिल्ली आ गयी जहां उन्होंने फैशन डिजाइन का कोर्स किया। वर्ष 2007 में अर्चना बतौर शिक्षिका काम करने लगी।अर्चना की प्रतिभा को देखते हुये वर्ष 2010 में उन्हें एससीईआरटी में ट्रेनर का पदभार भी दिया गया। अर्चना कला के क्षेत्र में भी अपनी पहचान बनाना चाहती थी और इसी को देखते हुये वह रंगमंच से जुड़ गयी। इसके बाद अर्चना ने डांस की ट्रेनिंग भी ली।         दुनियां में बहुत सी ऐसी बातें होती हैं जो नामुमकिन नज़र आती हैं …. लेकिन अगर इंसान हिम्मत से काम करे और वो सच्चा है ……तो जीत उसी की होती है। अर्चना शिक्षा के साथ ही सामाजिक क्षेत्र मे अपनी गहरी पहचान बना चुकी है। पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को प्रेरणा मानने वाली अर्चना महिला सशक्तीकरण को बढ़ावा देना चाहती थी और इसी को देखते हुये वह स्वंय सेवी संगठन सामायिक परिवेश से जुड़ गयी और महिलाओं और बच्चों के स्वास्थ्य एवं शिक्षा पर काम किया। अर्चना का मानना है कि  महिलाएं समाज का मूल स्तंभ हैं। महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए शिक्षा बेहद जरूरी है, महिलाओं की सुरक्षा के लिए कानूनों में भी विशेष प्रावधान किए गए हैं। लेकिन, जब तक महिला शिक्षित नहीं होगी तब तक ना सिर्फ उनका विकास अवरुद्ध रहेगा, बल्कि सामाजिक स्तर पर हो रहे अत्याचारों को रोकना भी कठिन होगा। जब तक समाज महिलाओं के प्रति अपना नजरिया नहीं बदलेगा, तब तक समाज में महिलाओं की स्थिति में परिवर्तन नहीं आ सकता। अर्चना का सपना वृद्धाश्रम और अनाथालय खोलने का भी है।         अर्चना कुमारी आज कामयाब महिलाओं में शुमार की जाती है। अर्चना कुमारी के सपने  सपने यूं ही पूरे नही हुये , यह उनकी कड़ी मेहनत का परिणाम है।   मुश्किलों से भाग जाना आसान होता है, हर पहलू ज़िन्दगी का इम्तेहान होता है। डरने वालो को मिलता नहीं कुछ ज़िन्दगी में, लड़ने वालो के कदमो में जहां होता है। अर्चना कुमारी भले ही कला के क्षेत्र में अपनी पहचान अबतक नही बना सकी है। जो लोग अपने सपने पूरे नहीं करते ना …..वो दूसरों के सपने पूरे करते हैं।अर्चना चाहती है कि उनके बेटे उनके अधूरे सपने को पूरा करे। अर्चना के दो बच्चे अजितेश और अनिमेश उन्हें सुपर मॉम और एंजलकहकर पुकारते हैं।

11-Apr-2018 06:52

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