24-Sep-2019 11:14

मेरा समाज बुद्धिजीवी है, इन मुद्दों को समझ जाने की उम्मीद रखता हूँ : विकेश कुमार

सिर्फ राजनीत और लोकतंत्र की ही नही बल्कि प्रकृति का भी यह स्वरूप है कि जब तक आप किसी चीज को हासिल करने को प्रयत्न नही करेंगे तब तक आपको वह मिलना बहुत मुश्किल है।

उदाहरण लीजिये:- 1. माँ और बेटे से गहरा रिश्ता किसी का नही होता फिर भी जब तक बच्चा रोता नही है माँ उसे दूध नही पिलाती है। ( प्राकृतिक स्वरूप). 2. सरकार चाहे कांग्रेस की हो या भाजपा की हो दलित समाज हमेशा उनके खिलाफ खड़े होते हैं और इसका परिणाम है कि सारी योजनाएं उन्ही के नाम से बन कर आती है। (राजनैतिक स्वरूप). समझने की बात यह है कि जो साथ मे बिना किसी मांग के हैं उनके लिए कार्य करने की क्या जरूरत? कोई भी राजनैतिक पार्टी कार्य उनके लिए करेगी जो उनके साथ नही हैं और वो राजनैतिक पार्टी उन्हें साथ लाना चाह रही हो.... आज तो संघ जैसी संस्था भी मुसलमान भाइयों को लुभाने के प्रयत्न में उन्हें लिए एक विभाग की शुरुआत कर दी है।

मैं खुले तौर पर कहता हूँ मैं किसी राजनैतिक दल का समर्थक नही फिर भी आज के तारिक में कुछ भाजपा समर्थक का सवाल होता है कि भाजपा का विरोध क्यों ? उनके सवालों का जवाब यही होगा कि जब आज के तारीख में नीति निर्धारण करने का अधिकार भाजपा के हाथों में है तो फिलहाल अन्य पार्टियों के विरोध से मुझे क्या मिलेगा?? हमारा हमेशा यही कहना है कि सारी राजनैतिक पार्टियों की एक ही इच्छा की सवर्ण समाज मांगे भिक्षा... कल जो अगर कांग्रेस सत्ता में आती है तो भाजपा का विरोध करने से कोई मुनाफ़ा नही आने वाला इस लिए उस वक़्त कांग्रेस के विरोध की जरूरत होगी।

इसी विरोध के सिलसिले में कोई राजनैतिक दल हमे ऐसा मिल जाएगा चाहे वो भाजपा हो या कांग्रेस या फिर कोई भी अन्य राजनैतिक दल जिन्हें सवर्णों के वोट की आवश्यकता होगी। और जब आवश्यकता होगी तो वो हमारे लिए आवाज उठाएंगे, और इसी पहलू की हमे अत्यंत आवश्यकता है कि कोई भी एक राजनैतिक पार्टी तो मिले जो सदन से लेकर संसद तक हमारे अधिकार की बात करे...

जब तक हम एक स्वतंत्र वोट बैंक नही बनेंगे, जब तक हम ये ज्ञात नही कराएंगे की हम स्वतंत्र हैं न कि किसी के बंधुआ मजदूर। और जब तक हम खुद को एक स्वतंत्र वोट बैंक के रूप में खुद को स्थापित नही कर लेते की हम वोट वही करेंगे जो हमारे अधिकार की बात करेगा तब तक हमारे लिए आवाज उठाने को कोई राजनैतिक दल खड़ा नही मिलेगा...और जब आप और हम स्वतंत्र हो जाएंगे तब भरोषा रखिये की बहुत हाथ उठेगा राजनैतिक पार्टियों के तरफ से, और तब हमें समझदारी से काम लेना होगा कि कौन हमारे हितों के लिए वास्तविक तौर ओर आवाज उठाएगा। मेरा समाज बुद्धिजीवी है, इन मुद्दों को समझ जाने की उम्मीद रखता हूँ। जय परशुराम

24-Sep-2019 11:14

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