15-Apr-2018 03:54

मॉडलिंग के साथ ही अभिनय की दुनिया में सफलता का परचम लहरा रहे हैं नंदन मिश्रा

बारिश की अगर फलक को जिद है ,बिजलियाँ गिराने की, तो हमें भी ज़िद है ,वहीं पर आशियाँ बनाने की

आज बादलों ने फिर साज़िश की जहाँ मेरा घर था वहीं बारिश की अगर फलक को जिद है ,बिजलियाँ गिराने की तो हमें भी ज़िद है ,वहीं पर आशियाँ बनाने की।  बॉलीवुड अभिनेता और जाने माने मॉडल नंदन मिश्रा आज के दौर में न सिर्फ मॉडलिंग और फैशन की दुनिया में धूमकेतु की तरह छा गये हैं बल्कि अभिनय की दुनिया के क्षितिज पर भी सूरज की तरह चमके। उनकी ज़िन्दगी संघर्ष, चुनौतियों और कामयाबी का एक ऐसा सफ़रनामा है, जो अदम्य साहस का इतिहास बयां करता है। नंदन मिश्रा ने अपने करियर के दौरान कई चुनौतियों का सामना किया और हर मोर्चे पर कामयाबी का परचम लहराया।         मां सीता की जन्मभूमि बिहार के सीतामढ़ी जिले के नानपुर थाना क्षेत्र के जानीपुर गांव में वर्ष 1994 में जन्में घर के लाडले नंदन मिश्रा के पिता अशोक कुमार सिंह और मां श्रीमती मधुलिमा पुत्र को इंजीनियर बनाने का ख्वाब देखा करते।बचपन के दिनों से ही नंदन मिश्रा की रूचि गीत-संगीत की ओर थी और वह स्टार बनने का सपना देखा करते। उन्हीं दिनों टेलिविजन पर प्रसारित लोकप्रिय सीरियल चंद्रकांता में इरफान खान और मिर्जा गालिब में नसीरउद्दीन साह के अभिनय से नंदन बेहद प्रभावित हुये । नसीर से प्रभावित होने की वजह से नंदन ने उर्दू की भी तालीम लेनी शुरू की। वर्ष 2005 में नंदन मिश्रा सीतामढ़ी रंगमंच से जुड़ गये और नाटकों में हिस्सा लेना शुरू किया जिसके लिये उन्हें काफी सराहना मिली।         जिंदगी में कुछ पाना हो तो खुद पर ऐतबार रखना         सोच पक्की और क़दमों में रफ़्तार रखना         कामयाबी मिल जाएगी एक दिन निश्चित ही तुम्हें         बस खुद को आगे बढ़ने के लिए तैयार रखना।         वर्ष 2009 में मैट्रिक की पढ़ाई पूरी करने के बाद नंदन मिश्रा आंखो में बड़े सपने लिये राजधानी पटना आ गये जहां वह भारतीय नाट्य कला मंच (इप्टा)से जुड़ गये और तनवीर अख्तर से अभिनय के गुर सीखने लगे। इसके साथ ही वह बुगी बुगी क्लास से गाने की ट्रेनिंग भी लेनी शुरू की। वर्ष 2012 में  नंदन मिश्रा ने भोजपुरी सिनेमा के पुरोधा माने जाने वाले अभय सिन्हा के अभिनय प्रशिक्षण इंस्टीच्यूट यशी फिल्मस में दाखिला ले लिया और छह माह का डिप्लोमा कोर्स पूरा किया। इस दौरान उनकी काबलियत को देखते हुये। उन्हें यशी फिल्मस की ओर से 50 हजार रुपये की स्कॉलरशिप भी दी गयी।                 जुनूँ है ज़हन में तो हौसले तलाश करो                 मिसाले-आबे-रवाँ रास्ते तलाश करो इज़्तराब रगों में बहुत ज़रूरी है                 उठो सफ़र के नए सिलसिले तलाश करो        नंदन मिश्रा फैशन और मॉडलिंग की दुनिया में भी अपना नाम रौशन करना चाहते थे। इसी को देखते हुये नंदन ने खुद से ही अपनी ग्रुमिंग शुरू की। वर्ष 2013 में नंदन मिश्रा ने मॉडलिंग हंट शो देव एंड दिवा सीजन 04 में हिस्सा लिया और शो के विजेता का खिताब अपने नाम कर लिया।                    खोल दे पंख मेरे, कहता है परिंदा, अभी और उड़ान बाकी है,         जमीं नहीं है मंजिल मेरी, अभी पूरा आसमान बाकी है,         लहरों की ख़ामोशी को समंदर की बेबसी मत समझ ऐ नादाँ,        जितनी गहराई अन्दर है, बाहर उतना तूफ़ान बाकी है…         अक्टूबर 2015 में आंखो में बड़े सपने लिये नंदन मिश्रा मायानगरी मुंबई आ गये । मुंबई में नंदन मिश्रा को काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।आश्वासन तो सभी देते लेकिन काम करने का मौका नही मिल पाता। नंदन ने हिम्मत नही हारी। जल्द ही नंदन की मेहनत रंग लायी और उन्हें  हॉरर फिल्म इश्क रूहानी में बतौर मुख्य अभिनेता काम करने का अवसर मिल गया। नंदन का मानना है कि        ज़िन्दगी हसीं है ज़िन्दगी से प्यार करो           हो रात तो सुबह का इंतज़ार करो          वो पल भी आएगा जिस पल का इंतज़ार है आपको          बस खुदा पे भरोसा और वक़्त पे ऐतबार करो इसके बाद नंदन मिश्रा को रक्तबीज और लोभ जैसी हिंदी फिल्मों में भी काम करने का अवसर मिला। नंदन मिश्रा की फैशन की प्रतिभा को देखते हुये उन्हें हाल ही में मिस्टर एंड मिस इंडिया आइवा 2017 शो में बतौर कोरियोग्राफर करने का अवसर मिला जिसके लिये उन्हें काफी सराहना मिली। नंदन मिश्रा लोकप्रिय सीरियल क्राइम पेट्रोल में भी काम कर रहे हैं। नंदन मिश्रा को नवाजउद्दीन सिद्दिकी के साथ फिल्म हाइकिंग में भी काम करने का प्रस्ताव मिला है।         नंदन मिश्रा आज मॉडलिंग-फैशन और अभिनय की दुनिया में कामयाबी की बुलंदियों पर है। नंदन मिश्रा अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता के साथ ही अपने बडे भाई चंदन मिश्रा को भी देते है जिन्हें हर कदम उन्हें सपोर्ट किया है। नंदन मिश्रा अपनी सफलता का मूल मंत्र इन पंक्तियों में समेटे हुये हैं। नंदन का मानना है कि कामयाबी के सफ़र में मुश्किलें तो आएँगी ही         परेशानियाँ दिखाकर तुमको तो डराएंगी ही,         चलते रहना कि कदम रुकने ना पायें         अरे मंजिल तो मंजिल ही है एक दिन तो आएगी ही।

15-Apr-2018 03:54

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