25-Apr-2018 08:57

लघु फ़िल्म “ अनामिका दी बिट्रेयर ” का प्रीमियर सिनेपोलिस में संपन्न

वर्तमान समय में समाज का एक विस्तृत आईना

फिल्म को समाज का आइना कहा जाता है जिसके माध्यम से मनोरंजन के साथ साथ विभिन्न तरह के मुद्दे, समस्या एवं उसके निदान के साथ जनचेतना का जन जन तक अलख जगाता है | वैसे तो फिल्म के कई प्रकार हैं जिसमें एक प्रकार लघु फिल्म ( शार्ट फिल्म ) भी है | बड़ी फिल्मों से ज्यादा सशक्त लघु फिल्म को मना जाता है क्योंकि किसी भी ज्वलंत मुद्दे को कम समय में समाज तक पहुँचा कर फिल्म अपनी बात कह डालती है और समाज में अपना असर छोड़ जाती है |   आईकोनॉक्लास्ट्स के बैनर तले बनी ये फ़िल्म लिक से हट कर एक ज्वलंत मुद्दा उपभोक्तावाद पर आधारित है “ अनामिका दी बिट्रेयर ” मंगलवार को पी एंड एम मॉल के सिनेपौलिस मल्टीप्लेक्स के ऑडी 4 पर फ़िल्म का प्रीमियर कियागया। फ़िल्म देखने के लिए काफी लोगों की भीड़ उमड़ी। दर्शक दीर्घा में बैठे कई रंगकर्मी, फिल्मकार, नाटककार, कथाकार, साहित्यकार के साथ जानेमाने फ़िल्म समीक्षक विनोद अनुपम भी उपस्थित रहे। विशिष्ट अतिथि में पूर्व मंत्री श्याम रजक, विधान पार्षद नवल किशोर यादव, विधायक संजीव चौरसिया , विनोद अनुपम, पूर्णिमा शेखर सिंह आदि गण्यमान व्यक्ति उपस्थित रहे और अपने अपने वक्तव्य में इन्होंने फ़िल्म को समाज का आयना बताते हुए उपभोक्तावाद को केंद्र में रखते हुए युवाओं को इस फ़िल्म से बहुत कुछ सीखने को कहा। लिक से हट कर यह फ़िल्म समाज में एक ऐसा मैसेज बयां कर रही है जो आज के युवाओं के बेहद करीब है, जिसके कुछ क्षण की मस्ती में गुम हो जाती है पूरी की पूरी ज़िन्दगी | फिल्म के निर्देशक हैं अमलेश आनंद हैं जो रंगमंच और सिनेमा के अनुभवी निर्देशक माने जाते हैं। फ़िल्म के निर्देशक अमलेश आनंद ने बताया कि यह शॉर्ट फिल्म वर्तमान समय में अपनी बात समाज तक पहुँचा कर अपनी बात कह डालती है और समाज में अपना असर छोड़ जाती है |   फिल्म समाज को एक ऐसा मैसेज बयां कर रही है जो आज के युवाओं के बेहद करीब है, जिसके कुछ क्षण की मस्ती में गुम हो जाती है पूरी की पूरी ज़िन्दगी | फिल फ़िल्म के निर्देशक अमलेश आनंद ने बताया कि यह शॉर्ट फिल्म वर्तमान समय मे बढ़ रहे उपभोक्तावाद के बढ़ते दुष्प्रभाव के कारण समाज मे बढ़ रहे अपराध से युवाओं की ज़िंदगी तबाह हो रही है। आज की युवतियां अपनी आधुनिक जीवनशैली की प्रतिस्पर्धा के कारण तुच्छ सामान, उपहार, के लोभ से अपने संस्कार और नैतिकता को भूल कर ग्लैमर और मॉडर्न लाइफस्टायल की चकाचोंध में जीना चाहती है | अपने खूबसूरती के जाल में युवाओं को फंसा कर इस कदर मोहित कर देती है जिसे पाने के लिए युवा उसकी कठपुतली बना रहता है और उसके हर डिमांड को पूरा करने के लिए पैसे के जुगाड़ में लग जाता है जो आसानी से संभव नहीं हो पता है | वह धीरे धीरे आपराधिक घटनाओं को अंजाम देने लगते हैं या फिर प्रेमिका के छोड़ने पर आत्महत्य कर लेते हैं या फिर कहीं लूट , चोरी के मामले में पुलिस के हत्थे चढ़ कर सलाखों के अन्दर अपनी ज़िन्दगी गुजार देता है । इस तरह उपभोक्तावाद एक जाल जैसा पूरे समाज में  फैला है जिसमें युवाओं जी ज़िन्दगी फंस कर बर्बाद हो जाती है । आनंद ने कहा कि यह फ़िल्म हम फ़िल्म फेस्टिवल के लिए बनारहे हैं जिसमे उपभोक्तावाद और दहेज प्रथा पर कराडा प्रहार साबित होगा । इस फ़िल्म में पटना और मुम्बई के कलाकारों ने मिल कर बेहतर काम किया है। मुम्बई से सुलगना चटर्जी , पटना से अजय झा मुख्य भूमिका में रहकर सशक्त अभिनय    किया है। जबकि पटना से परविंद्र, शांति प्रिया, अनुराग कपूर एवं दिघवारा बॉक्सिंग क्लब के बॉक्सिंग चैम्पियन धीरज और 25 खिलाड़ियों ने भी अपनी अपनी भूमिका बखूबी निभाई । फ़िल्म की शूटिंग पटना के एसके पुरी पार्क के पास , पेंटालून मॉल, आनंदपूरी ,कंकड़बाग आदि जगहों पर किया गया है।

25-Apr-2018 08:57

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