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11-Apr-2020 06:01

लालू, नीतीश, रामविलास, मोदी के बाद नरेंद्र मोदी के हत्थे चढ़े मासूम बच्चे, मां की गोद हो गई सुनी

दुनिया भर के राष्ट्राध्यक्ष में सबसे बड़े घुमक्कड़ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को भारत की आम जनता की चिंता कभी रही ही नहीं

अगर इसे ही कहते हैं अच्छे दिन, तो खुद पर कानूनी कार्रवाई करे मोदी, भारत सरकार का नेतृत्व छोड़कर। देश को समझने में कभी समय ना देना और देश की परिस्थितियों को ना समझना ही आज आम जनता भोजन और स्वास्थ्य के लिए तरस्त हैं। गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी जब 2013 में प्रधानमंत्री बनने के लिए राजनीतिक गोले दागे जा रहे थे, तो जो नरेंद्र मोदी की कार्यशैली नहीं जानते थे, वह भक्त बन गये। राजनीतिक भक्तों ने इतना झूठ की खेती कर डाली कि आज एक मामूली से दवाओं के लिए भी दुआओं की जरूरत पड़ती हैं। मोदी के अच्छे दिन ने मां की गोद सुनी करने में कोई कोताही नहीं बरती। आम जनजीवन को लगातार अंधेरे में धकेलने में नरेंद्र मोदी ने महत्ती भूमिका निभाई है। पिछले 6 सालों में भी भारत के 730 जिलों तक नहीं पहुंच पाए भारत के स्वघोषित प्रधान सेवक। यह दुर्भाग्य ही हैं कि गद्दहे से ज्ञान प्राप्त करने वाले लोगों से उम्मीद भी क्या किया जा सकता है। दुनिया का इतना सैर करने वाले दुनिया के एकलौते प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ही होंगे। किसी भी देश का राष्ट्राध्यक्ष देश की जनता से ज्यादा दुनिया भ्रमण में व्यस्त रहे।

कल शाम से यह कहानी फेसबुक की सबसे बड़ी राजनीतिक भक्ति का परिणाम है। एक जनप्रतिनिधि को भगवान बनाने की होड़ का ही परिणाम है, इसे समझे ? व्यवस्था के नपुंसक कर्णधारों बताओ ज़रा की ये क्या है ? क्या यह तुम्हारी नामर्दगी का सुबूत नही ! आज़ादी के 70 सालों बाद भी बिहार के सरकारी स्वास्थ्य का आलम है यह। Air conditioned कमरों में बैठ कर तमाम नृत्य-कृत्य कर लिए जाते हैं। करोड़ों अरबों की बातें हो जाती हैं? दवाइयों और संसाधनों की कागजी खरीद भी हो जाती है, धरातल पर क्या उतरता है ? "#ठेंगा"...👎 बस जनता पर दमन की बात हो या उत्पीड़न की वहां मज़ाल की इनसे चूक हो जाए ! कतई नहीं ? असल दिक्कत हमारे समाज में भी है। वोट जाति पर करेंगे, खुद की सुविधा को तवज़्ज़ो देंगे, अनुशासनहीनता पसन्द करेंगे, कानून तोड़कर स्वार्थ सिद्धि में लग जाएंगे। एक दूसरे की मदद से कतराएंगे, ढांचा विकसित करने में विद्वान और समाजसेवी भाग नही लेंगे। जब आप सिर्फ खुद के चक्कर में रहिएगा तो यही नेता और व्यवस्था मिलेगा और घनचक्कर में फंसे रहिएगा।

AC चैम्बर में बैठकर बिहार में स्वास्थ्य सेवाओं का हाल आल इज वेल बताने वाले बिहार के स्वास्थ्य मंत्री मंगल पाण्डेय और अधिकारी आपको क्या इस बेबस माँ की चीत्कार सुनाई देगी ? क्या आप अब भी कहेंगे "आल इज वेल"। आज इस बेबस माँ के जिगर का टुकड़ा आपके सिस्टम के आगे दम तोड़ दिया। लेकिन जरा सोचिए ..मौत इस मासूम की हुई है या सिस्टम की। दरअसल यह मामला जुड़ा है बिहार के जहानाबाद से। कई दिनों से पहले ही विभिन्न लोगों ने आगाह किया था। फेसबुक पोस्ट भी की थी मामूली बीमारी में भी जिले के डॉक्टर मरीज को पटना रेफर कर दे रहे है, इलाज नहीं कर रहे है। जहानाबाद में भी वही हुआ ? अरवल जिले के कुर्था थाना क्षेत्र के लारी सहोपुर गाँव में एक बच्चे की तबियत खराब हो गई थी। जिसके बाद परिजनों ने कुर्था प्रथमिक स्वस्थ्य केंद्र में इलाज के लिये भर्ती कराया। जहाँ डाक्टरों ने उसे बेहतर इलाज के लिये जहानाबाद रेफर कर दिया। परिजन किसी तरह ऑटो से सवार होकर उसे इलाज के लिये जहानाबाद सदर अस्पताल लाया। जहाँ डाक्टरों ने बच्चे की गंभीर स्थिति को देखते हुए पटना रेफर कर दिया। लेकिन मरीज के परिजन एम्बुलेंस के लिये लगभग दो घण्टे तक इधर से उधर भटकते रहे। तब तक उस बच्चे की मौत हो गईं। सिस्टम का नाकारापन देखिए मासूम की मौत के बाद भी उसे एम्बुलेंस नहीं मिला और मासूम की लाश को गोद में लिए बिलखती माँ 25 किलोमीटर दूर अपने गांव के लिए पैदल ही निकल पड़ी। हलाँकि थोड़ी दूर पर मामले की जानकारी मिलते ही एक सामाजिक कार्यकर्ता ने अपनी गाड़ी से उन्हें उनके गांव तक पहुंचाया।

इस तरह के कई महत्वपूर्ण पोस्ट फेसबुक पर पोस्ट हो रहे हैं और रामविलास पासवान, लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी, नीतीश कुमार, सुशील मोदी, उपेन्द्र कुशवाहा ने 30 साल तक बिहार को बर्बाद कर आज भी बिहार की राजनीति में आने और लूटने की योजना बना रहे हैं। वहीं कुछ के बेटों ने भी अपने अपने पिता की राजनीतिक लूट का हिस्सा बनकर जातिवाद की खाई बो अपनी जिम्मेदारियों से इतर समाज को तोड़, अपनी मौजूदगी राजनीति में जीवंत कर लिया है। उपरोक्त सभी ऐसे बिहार के नेता हैं जो बिहार का सौदा समय समय पर विभिन्न दलों के साथ किया है। अभी भी वक़्त है हालात को संभालिये, नहीं तो जितने लोग कोरोना से नहीं मरेंगे, उतने इन छोटी छोटी बीमारियों और सिस्टम की लाचारी से मर जाएंगे। लेकिन संभालने लायक तो कोई भी राजनेता आज भारत में नज़र नहीं आ रहा है। नरेंद्र मोदी और अमित शाह की जोड़ी ने भारतीय राजनीति में अपनी पहचान संविधान की प्रस्तावना से उपर कर लिया है। संवैधानिक रूप से चुनकर आज भारत सरकार की प्रतिष्ठा दांव पर लगाकर राजनीति की जा रही है। जिसका संरक्षण प्राप्त कर नीतीश कुमार ने बिहार के 12 करोड़ बिहारियों के साथ खिलवाड़ कर रखा है।

11-Apr-2020 06:01

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