05-Jun-2018 01:43

लोकतंत्र की गरिमा गिराते सदनों (लोकसभा) के माननीय

वेंकटेश की राह पर चलने का डरामा करते केंद्रीय राज्यमंत्री उपेंद्र कुशवाहा, लेकिन जातिगत भावनाओं से बाहर नहीं निकल पा रहे हैं। उपेंद्र कुशवाहा मुख्यमंत्री बनने की लालसा ने स्वार्थी बने और मानवीय मूल्यों की पतन की ओर बढ़ रहे हैं। पूरे देश के मानव संसाधन के र

वैशाली की लोकतंत्र भूमि पर जन्म लिए मानव संसाधन विकास विभाग के भारत सरकार के राज्य मंत्री उपेंद्र कुशवाहा, एक शिक्षक भी हैं। लेकिन दुर्भाग्य है कि इस तरह के शिक्षक अगर देश में हैं तो शिक्षा का स्तर क्या हो सकता हैं। जिन्हें जातिवाद फैलाने में मजा आता हो, इतिहास की जिन्हें समझ ना होते हुए भी इतिहास के साथ राजनैतिक छेड़छाड़ करने में जरा भी गुरेज नहीं। लोकतंत्र के सबसे बड़े सदन के सदस्य और मानव संसाधन विकास विभाग के राज्यमंत्री होते हुए भी शिक्षा के विरोध रैली वह भी सदन के जगह सड़कों पर। उन्हें इस बात का ज्ञान हो कि वह एक संवैधानिक पद पर हैं और वह जिस सरकार में मंत्री हैं उन्हीं के खिलाफ रैली करते हैं तो किस तरह की राजनीति कर वैशाली की इज्जत़ बढ़ा रहे हैं। गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के तुफानी रैलियों की वजह से लोकसभा में पहुँचने के बाद राज्यमंत्री का दर्जा तक मिला। लेकिन अपनी किसी भी जिम्मेदारी को सही से निभा नहीं पा रहें। अगर भारत सरकार आज जिस मोदी जी के नेतृत्व में संचालित है अगर वह गलत है तो उसके कंधों के सहारे क्यों हैं ? या यह एक गुमराह करने की घटिया एवं निम्नतम राजनैतिक स्तर हैं। ताकि भारतवासियों को गुमराह कर सकें।

आगे बताते हैं कि कराकाट से सांसद होते हुए सिर्फ़ शादी-विवाह एवं सराथ कार्यक्रम में ही शामिल होते हैं। या प्राईवेट विद्यालय में फीता काटते देखा जाता रहे हैं। कुछ घटनाओं की चर्चा करते हैं तो आप पायेंगे कि उपेंद्र कुशवाहा कि राजनीति किस स्तर पर है। काराकाट क्षेत्र के सांसदीय क्षेत्र से मिली जानकारी के अनुसार गोह प्रखंड के पोखराहा निवासी विनय दास पहले अपनी पत्नी सोना देवी के इलाज के लिए परेशान रहा। उसके पत्नी की मृत्युपरांत भोजन के लिए संघर्ष किया था। महादलित समाज से होने के बावजूद विनय को न तो रहने का छत सरकार से मिला है ना ही खाने को राशन मिलता है।अम्बेडकर जयंती के दिन अन्न के अभाव में अपने तीन बच्चो को भूख से व्याकुल देखकर विनय सामाजिक कार्यकर्ता वेंकेटेश शर्मा से मदद मांगते हुए कहा कि एक तरफ अम्बेडकर जयंती धूमधाम से मनाई जा रही है, तो दूसरी ओर हमारे बच्चे भूखे सोने को विवश हैं। अब आप ही हमारे बच्चो को बचा सकते हैं। वेंकटेश ने विनय को कुछ आर्थिक सहयोग देते हुए कुछ समय पहले ही एक दिवसीय सांकेतिक उपवास रखा। उपवास में वेंकेटेश को सहयोग देने हेतु विनय एवं विनय के बच्चों के अलावा राजेन्द्र ठाकुर जिनका इलाज दिल्ली एम्स में वेंकटेश के माध्यम से चल रहा है वह भी शामिल हुए थे। शिवशंकर चौधरी जिनके बहु का इलाज वेंकेटेश ने एम्स में कराया था। विनय ने प्रखंड पदाधिकारी को कहा कि "अगर वेंकटेश बाबू न रहतन हल तब हमनी सब परिवार न बचती" । पांच वर्षीय शिवम ने लोगों को बताया कि हम दो दिन से भर पेट खाना न खाइली हा। विनय के परिवार की स्थिति को देखकर वहाँ उपस्थित कर्मचारियों ने कुछ आर्थिक सहायता भी की। प्रखंड विकास पदाधिकारी ने उसकी स्थिति को देखते हुए तुरंत राशन कार्ड बनाने के लिए कहा तथा डीलर को अनाज पहुंचाने को कहते हुए कहा हम व्यक्तिगत स्तर पर भी जब जरूरत हो मदद करते रहेंगे। विनय ने बताया कि हमारे पास हमारी स्थिति से अवगत होते हुए भी कोई भी जनप्रतिनिधि पंचायत स्तर से लेकर लोकसभा स्तर तक नहीं आया। विनय बार-बार सामाजिक कार्यकर्ता वेंकटेश शर्मा का नाम ले रहा था। वहीं पता किया कि वेंकटेश शर्मा कौन हैं तो पता चला कि एक सवर्ण जाति का वेंकटेश शर्मा निरंतर दलित और महादलितों के बीच उनके सेवा में रहते हैं। जब वेंकटेश शर्मा से बाते कि तो उन्होंने बताया कि क्या करें। मैं एक सामाजिक कार्यकर्ता हूँ और लोगों का दुख देखकर मैं दर-दर जाकर कुछ आर्थिक मदद, राशन से मदद आदि जुटाता रहता हूँ। कल विनय हमारे पास आये तथा कहा कि उसका मकान में अब रहना सम्भव नहीं है। क्योंकि मकान का छत पुआल का है जो पानी पड़ने पर घर में गिरने लगेगा। इस पर हम कुछ आर्थिक सहायता करते हुए कहा कि हम आपके मकान निर्माण के लिए कुछ लोगों से आर्थिक सहायता लेने के लिए आपके साथ खुद चलेंगे। महादलित परिवार को सरकारी राशन भी नहीं मिलता है। महादलित विनय बार-बार अपने बच्चो के साथ आत्महत्या करने की बात कर रहा था। जबकि आरक्षित चपुक पंचायत दो बार से दलित महिला आरक्षित सीट होने के बावजूद भी इस महादलित परिवार को सरकारी आवास एवं सरकारी राशन की सुविधा नहीं मिला।

वहीं क्षेत्रिय लोगों ने बताया कि एक तरफ तो केन्द्रीय राज्य मंत्री उपेंद्र कुशवाहा अपने जाती के मृतक परिवार से मिलने उसके घर पर जाते हैं एवं उसके आश्रितों को मदद दिलाने की आश्वासन देते हैं। लेकिन रुकुन्दी से तीन किलोमीटर की दूरी पर अवस्थित पोखराहा गांव में महादलित परिवार से मिलने एवं मदद करने की चर्चा तक नहीं की। क्योंकि विनय राम जो महादलित था। वहीं पता चला कि पप्पू यादव की तरह ही पूरी जन अधिकार पार्टी के कार्याकर्ताओं ने महादलित वस्तीयो में 17 अप्रैल को जाकर बड़ी-बड़ी घोषणाएँ की। पता चला कि गोह प्रखंड के पोखराहा गांव के महादलित टोले को गोद लेने की बातें कहीं गई। जन अधिकार पार्टी (लोकतांत्रिक) ने साथ ही इस टोले के विनय रविदास के पूरे परिवार को शिक्षा-स्वास्थ्य व रोजगार सुनिश्चित कराया जाएगा। वहीं घोषणा की कि इस टोले के वैसे गरीब परिवार को भी चिह्नित किया जाएगा, जिनकी माली हालत खराब है। अब इस टोले पर किसी गरीब को बीमारी से मरने नहीं दिया जाएगा। गौरतलब हो कि बीते दिनों विनय रविदास का परिवार में बीमारियों की वजह से कई परिवारों की मृत्यु हो गयी है। जिसके कारण राजनीति गरमाई भी और जिसका फायदा उठाने में जन अधिकार पार्टी भी पीछे नहीं रही। जन अधिकार पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता श्याम सुंदर ने बताया कि हमारी पार्टी महादलितों के लिए समर्पित हैं। लेकिन दो महिने बीत गये और कोई सूध तक नहीं लेने आया। दी। पार्टी प्रवक्ता ने यह भी कहा था कि गोह विधानसभा के दलित-पिछड़े व अल्पसंख्यक गांवों को चिन्हित किया जा रहा है। जहां आजादी के 70 वर्षों के बाद भी आधारभूत सुविधाएं नहीं पहुंची है। सरकार के भरोसे सबकुछ नहीं छोड़ा जा सकता। लंबी बातों में चर्चा यह भी हुआ था कि झिकटिया जैसे महादलित टोले में सड़क निर्माण क्यों नहीं होने दिये? इलाके के एक भी हाईस्कूल में एक ईंट तक नहीं जोड़ने दिया गया। सर्वविदित है कि आजकल पप्पू यादव जनता की समस्याओं को लेकर हर जगह पहुँच रहे हैं। लगातार दर-दर की ठोकरें खा रहें हैं, बड़े-बड़े मंचों से सवर्ण जाति को खड़ीखोटी बोलते हैं, लेकिन अपने कथनी और करनी पर विचार नहीं करते हैं। उसी परिपाटी का ही नतीजा है कि पप्पू यादव की पूरी टीम झूठ बोलने की कला में माहिर होकर वादें करते फिरतें हैं, पेपरों में छपते हैं और घर जाकर सो जाते हैं। जहाँ उपेंद्र कुशवाहा जातिवाद फैलाने में लगे है तो वहीं पप्पू यादव भी कुछ कम नहीं हैं। यह सब सीख देने में गुजरात के 2013 के मुख्यमंत्री माननीय नरेन्द्र मोदी और वर्तमान भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की देन हैं। झूठ बोलने की कला में पी एच डी किये भारत के प्रधान सेवक ने पूरे भारत को झूठ में समाहित कर दिया है। उनके मंत्रिमंडल से लेकर कार्याकर्ताओं द्वारा दिन रात झूठ की खेती बो रहे हैं। तो उपज का परिणाम भी क्या होगा, वह चार साल में लोगों ने देख लिया हैं।

आज यह सवाल कराकाट में खड़ा है कि क्या उपेंद्र कुशवाहा के केन्द्रीय सरकार में मंत्री बनने से कुछ भी विकास हुआ यहाँ, तो हर चेहरा यहीं कहता हैं नहीं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी अब जातिवाद का सहारा लेकर ही राजनीति करते हैं। राष्ट्र हित अब अभिप्राय बन गया हैं। अंबेडकर के नाम पर निरंतर गरीबों को गुमराह किया जा रहा है। कभी आरक्षण के नाम पर तो कभी संविधान बदलने के नाम पर। क्या बिना शिक्षा के बाबा साहेब का सपना पूरा हो सकता है? जिस जगह की चर्चा हमने आज की है वह स्टेट हाइवे के बगल में बसा झिकटिया में महादलितों की 5 हजार आबादी है, बावजूद इसके यह गांव पहुँच पथ से दूर है। ऐसे दर्जनों गांव हैं जहां आधारभूत सुविधाएं नहीं पहुंची है। मुख्यमंत्री का नल-जल योजना भी महादलित गांव से दूर है। संविधान निर्माण कर बाबा साहेब ने देश में समानता का अधिकार दिया और उनके नाम पर सियासत करने वाले जातिवादी नेता वोट के लिये घड़ियालू आंसू बहा रहे हैं। लेकिन ना तो भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इच्छा शक्ति है गरिबों का भला करने का और ना ही नीतीश कुमार और ना ही लालू यादव और पप्पू यादव की। सब अपनी अपनी रोटी सेंक रहे हैं और हकीकत में जाने से डर लगता है तो बड़ी-बड़ी डिंगहाँक कर भा जाते हैं।

05-Jun-2018 01:43

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