14-Apr-2018 12:07

शिक्षा का स्तर उजागर करते उपेंद्र कुशवाहा

✍डाॅ रुपक कुमार सिंह

बिहार की शिक्षा व्यवस्था चौपट हैं, अगर शिक्षा व्यवस्था सही होता तो एनडीए की सरकार मे एनडीए के नेता ही शिक्षा सुधार पुस्तक उपहार कार्यक्रम नहीं चलाते। देश का एच आर डी मंत्री बिहार में शिक्षा सुधार आंदोलन चलाए तो अनुमान लगाइए कैसा शिक्षा व्यवस्था होगा इस राज्य का, हम समझते है इसके दोषी कुल मिलाकर सरकार ही है, जो जगह जगह अनगिनत डिग्री बांटने के लिए स्कूल कालेज और प्रशिक्षण महाविद्यालय को स्थापित करने हेतु मान्यता दे रखी है, ऐसी संस्थान बिना पढ़ाई के पंजीयन फाॅर्म आदि फिलप करवाकर परीक्षा में उतीर्ण करवाने का ठेका लेती है। इसका साक्ष्य चाहिए तो बच्चा राय और फर्जी घोटाला सबसे बेहतर उदाहरण हैं। इधर एक अजीब नौटंकी जनता के सामने है कि जिन्हें शिक्षा को लेकर नीति-योजना बनाकर लागू करने की जिम्मेदारी है, वे ही शिक्षा सुधार के नाम पर आंदोलन चला रहे हैं। जी मैं बात कर रहा हूँ केन्द्रीय मानव संसाधन विकास राज्य मंत्री श्री उपेन्द्र कुशवाहा के बारे में, आप ही बताइए कि देश में शिक्षा के लिए बजट की कोई कमी नहीं हैं साथ ही यह विषय केन्द्र और राज्य दोनों से संबंधित हैं। फिर जो मंत्री है उनको चाहिए कि शिक्षा विभाग के लिए कौन सा कानून बनाए, शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने हेतु कौन-कौन से उपाए किए जाए, शिक्षा सुधार के लिए कौन से कदम उठाए जाए, कैसा मैकेनिज्म डेवलाॅप करे कि शिक्षा के क्षेत्र में हमें बेहतर परिणाम मिले, आदि-आदि। पर दुर्भाग्य कि एक मंत्री ही अपने दायित्व से हटकर आम जनता और विपक्षी पार्टी की तरह आंदोलन चलाकर सबको मूर्ख बनाने का काम कर रहे हैं। माननीय मंत्री जी आप शिक्षा विभाग की मोनेटरिंग करवाइए, शिक्षक कर्तव्य और दायित्व से भागते हैं उनपर कार्रवाई करिए, फर्जी स्कूल कालेज और फर्जी संस्थान पर नकेल कसिए, शिक्षक की कमी को पूरा करवाइए, भवन विहिन विद्यालय में निर्माण कार्य करवाइए, विद्यालय को साधन संसाधन से लैस करिए, समय से परीक्षा लिजिए, संस्थानों मे बायोमैट्रिक अटेंडेंस प्रणाली की व्यवस्था करे, पुस्तकें उपलब्ध करवाइए और शिक्षक को समान काम के लिए समान वेतन दिजिए। यह आपका मूल कार्य है न कि आंदोलन करना... आप सत्ता मे है इसलिए सरकार के स्तर पर अपनी बात रखे न कि जनता के बीच में... शिक्षा भले ही चौपट है पर बिहार की जनता इतनी भी अशिक्षित नहीं कि आपके राजनीतिक स्टैंड को न समझ सके। अंत में इतना ही कहूँगा कि *हमको मालुम हैं जन्नत की हकीकत क्या हैं?लेकिन दिल को खुश रखने के लिए गालिब, ये ख्याल भी अच्छा हैं*

14-Apr-2018 12:07

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