20-Oct-2019 09:43

43 वर्षों में हत्यारे समाज का निर्माण करने के लिए आरक्षण का लाभ रामविलास पासवान ने उठाया ?

एक मात्र पढ़ाई के लिए मासूम बच्ची की मौत (हत्या/आत्महत्या) यही 43 वर्षों में रामविलास की हाजीपुर को देन, आरक्षण का लाभ आज वैशाली में एक मासूम बच्ची की हत्या की कहानी लिख डाली..

हाजीपुर लोकसभा क्षेत्र में जोकि 43 वर्षों से आरक्षित है और कमोबेश रामविलास पासवान सांसद रहे है। और इसी हाजीपुर के बदौलत आज अपने पूरे परिवार को राजनीतिक गलियारों में बिहार से लेकर दिल्ली तक स्थापित कर दिया। लेकिन क्या रामविलास पासवान 43 वर्षों में उन जातियों को जिन्हें अतिपिछड़ा, पिछड़ा, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, गरीब, असहाय, दलितों के नाम से जाना जाता है, को खड़ा करने का कोई प्रयास किया। एक मासूम सी बच्ची इस बात के लिए आत्महत्या कर ली या परिवार के लोगों ने मार कर फेंक दिया यह तो जांच के स्पष्ट होगा। लेकिन उसकी हत्या या आत्महत्या की मात्र एक कहानी है और वह है एक गरीब परिवार की लड़की शिक्षा की तरफ अपने कदम बढ़ा रही थी। शायद इन्हीं बिंदुओं के लिए आरक्षण का प्रावधान किया गया था, लेकिन राजनीतिक दलालों के द्वारा सिर्फ अपना और अपने परिवार का फायदा देखा गया। लोकतंत्र की धरती का महत्वपूर्ण क्षेत्र हाजीपुर को लगातार 43 वर्षों से आरक्षित करके रखा हुआ है। लेकिन आज तक यहां पर शिक्षा, चिकित्सा, भोजन व आवास जैसे मामूली आम जरूरतों की पूर्ति करने योग्य रामविलास पासवान गरीब व दलितों को नहीं बनने दिया। किसी बच्ची कि हत्या या आत्महत्या की एक ऐसी कहानी, जो किसी खास व्यक्ति के कारण नहीं हुई। यह घटना अति महत्वपूर्ण, अति महत्वाकांक्षी, अतिवादी, परिवारवादी, रामविलास पासवान की सोच की वजह से हुआ। आप में से कई लोग कहेंगे, इसमें रामविलास पासवान की गलती क्या है ? तो आप स्पष्ट समझ ले कि रामविलास की इसमें पूरी की पूरी गलती है। इस हत्या या आत्महत्या के लिए पुर्ण जिम्मेवार रामविलास पासवान है। वह रामविलास पासवान जो दलित सेना के आजीवन राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे और कुछ समय पहले ही अपने हाजीपुर सीट और दलित सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष का पद अपने छोटे भाई को दे दिया। वह रामविलास पासवान जो अपने गरीब एवं समाज से वंचित लोगों के लिए लगातार राजनीति करते रहते हैं। उन्होंने 43 वर्षों में अपने क्षेत्र के गरीब एवं वंचित समाज को शिक्षित नहीं किया। अपने पैरों पर खड़े होने लायक ना होने दिया और इसका कारण क्या हो सकता है ? मुझे जो कारण लगता है, वह है राजनीति परिवारवाद और संकीर्णता। वही संकीर्णता जो रामविलास पासवान को एक समाजिक महत्त्वकांक्षा को लेकर अपनी परिवारिक महत्व की क्षतिपूर्ति कर बैठे और लगातार करते आ रहे हैं और लगातार करते ही जा रहे हैं।

जिस बच्ची की हत्या या आत्महत्या हुई, वह महज नौवीं क्लास की छात्रा थी। पढ़ाई में बहुत अच्छी थी और विद्यालयों में उसके आने-जाने से उसके दादा को बहुत परेशानी हुआ करती थी। वह दो-तीन साल पहले से ही शादी का दबाव बना रहे थे और घर में रहकर चुल्हा चौके करने पर जोर दिया करते थे। मां समझदार थी और मां ने बच्ची को पढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया। पति से मार खा कर भी, वह महिला अपनी बच्ची को किसी न किसी प्रकार से पढ़ने के लिए भेज दिया करती थीं। बच्ची भी अच्छे तरीके से कोशिश कर रही थी पढ़ाई का, ताकि एक बेहतर कल का निर्माण कर सकें। वही सबसे ज्यादा परेशानी उसके दादा-दादी के माध्यम से उसके पिता पर दबाव था। वह किसी भी तरीके से उस बच्ची को स्कूल जाने से रोकने का कार्य करने का सारा प्रयास कर रहे थे। वह लोग यह सोचते थे कि कुछ खर्च बढ़ रहा है। वही बच्ची के दादा को परेशानी थी की बच्ची के और दो बहने थी और भाई नहीं हो रहा था। इसको लेकर भी उसकी मां पर अत्याचार होते रहे हैं। जिसके कारण अंततः उस बच्ची को अपना या तो शरीर त्यागना पड़ा या लोगों ने किसी न किसी तरीके से उसकी हत्या कर दी। कोई यह बताने को तैयार नहीं है कि हत्या हुई, तो कैसे हुई ? लेकिन फिर भी हो तो गया है, और कैसे हो रहा है, कैसे हुआ, उसका एक ही विचार है ? आज भी उस समाज में शिक्षा का महत्व नहीं पहुंच पाया ? तो फिर वही मैं कहूंगा, इसके लिए जिम्मेदार सिर्फ और सिर्फ रामविलास पासवान है। इस हाजीपुर क्षेत्र में कुंडी मारकर, अपने अनैतिक सोच और विचारों को लेकर हाजीपुर को किसी न किसी प्रकार से आज तक आरक्षित रखा। वहीं और अगले 5 साल के लिए अपने छोटे भाई को ठेकेदारी पर दे दिया। ऐसे ना जाने कितने परिवार है, जिनकी जिंदगी इसी बात में खत्म हो जाती है कि वह जीये तो जीये कैसे ? समाज में व्याप्त अशिक्षा ने घनघोर घटा बना कर रखी हुई। सरकार अपनी जिम्मेदारियों को निभा पाने में जहां असक्षम है तो वही गलत इरादों वाले राजनीतिक दलों, राजनीति सोच, वाले राजनेताओं के चक्कर में बिहार ही नहीं, भारत की राजनीतिक को भी प्रभावित कर रहे हैं। जिसका परिणाम यही है जो आज देखने और सुनने को मिल रहा है। संविधान में इस पर विचार करने की जरूरत है। रामविलास पासवान जैसे राजनेताओं को इस बात का कोई छूट नहीं मिलना चाहिए। गरीबों और दलितों के समाज के तबके को जीने से ज्यादा मरने के लिए मजबूर कर दे और वह अपने परिवार द परिवार को राजनीतिक रूप से समृद्ध करता आगे बढ़ रहें हैं। बहुत लोगों को मेरी बात समझ में नहीं आएंगे, इसलिए भी नहीं आएगी,

क्योंकि उनकी राजनीतिक चाटुकारिता, इतनी चरम पर है, उस बात को समझने का प्रयास भी नहीं कर सकते। एक बच्ची की हत्या या उसे आत्महत्या के लिए उकसाना यह मात्र अपराधी की श्रेणी में जरूर आता है। परंतु यही मामला अगर आगे पुलिस छानबीन करती है तो उसके दादा पर, उसके पिता पर सीधा-सीधा आरोप बनता है। लेकिन सरकार को यह बताना पड़ेगा, कि यह नौबत आज भी क्यों है ? क्या बड़े-बड़े विज्ञापन चिपका देने के से ? क्या लोगों में समझ विकसित हो जाएगी ? बड़े-बड़े ब्रांड एंबेसडर को हायर करने से, क्या हम शिक्षा की स्थिति में सुधार कर सकते हैं ? सिनेमा के माध्यम से हम समाज को एक दिशा और दशा दे सकते हैं। अब्दुल कलाम जी के उदाहरण को लेकर उदाहरण के लिए ही इंतजार कितना करते रहेंगे ? सरकार की नींव इसी बात के लिए रखी गई है या आजादी के बाद रखी गई या आरक्षण का प्रावधान इसलिए रखा गया कि भारत के शत-प्रतिशत लोगों को एक दूसरे के साथ लेकर इस राष्ट्र का निर्माण कर सकें। आरक्षण इस मद में दिया गया था, इसके आधार पर समाज को जोड़ा जाए। उन्हें इस लायक बनाया जाए कि वह भारत के निर्माण में अपनी भूमिका निभा सकें। लेकिन आज हम भारत की बात नहीं करेंगे। भारत के दलितों के नेता के रूप में सबसे बड़े नेता रामविलास पासवान कहलाते हैं या अपने आप को कहलवाते हैं। वहीं और पिछले 43 साल से रामविलास पासवान हाजीपुर पर कुंडी मारकर बैठे हुए और 2019 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने अपने छोटे भाई को ऐसे सुपुर्द किया जैसे राजा महाराजाओं ने अपने उत्तराधिकारी को सौंपा ? लोग कहेंगे कि आपके पास मत का अधिकार है, आप बदल देते हैं ?लेकिन बदल देते जब, हमें उम्मीदवार चुनने का मौका दिया जाता ? यहां तो उम्मीदवार इंपोर्ट-एक्सपोर्ट हो रहे हैं ? तो कैसे होगा ? उम्मीदवार का चुनाव आज दुर्भाग्य है की यह लोकतांत्रिक भूमि पर है जो लोकतंत्र की जननी कही जाती है और आज लोकतंत्र की धरती पर लोकतंत्र का अस्तित्व तक नहीं बचा ?लगातार 43 वर्षों से लोकतंत्र के साथ हत्या, बलात्कार , अशिक्षा, बीमारी ना जाने कितने प्रकार के हथियारों से रामविलास पासवान ने हाजीपुर का विनाश किया। वह और फिर भी आज लोग या यह चमक धमक की दुनिया ने आम आदमी को इस बारे में सोचने का मौका नहीं दिया। आज आप दिन रात मेहनत कर जो खून पसीने से इस देश को सीखने के लिए टैक्स भरते हैं, यह महानुभाव उसका कितना उपयोग, या उपभोग कर पाते हैं ? सारा का सारा दुरुपयोग की कड़ी लिखी जाती है और गुमराह आम जनता को किया जा रहा है ?

महनार थाने के चकेशो गांव में जैसे ही 15 वर्षीय एक लड़की की आत्महत्या की कहानी लिखती है, वैसे ही लोकतंत्र की आत्मा वैशाली को धिक्कार उठती है। हम कैसे वैशाली में रहते हैं, हम कैसे लोकतंत्र की जननी भूमि पर रहते हैं, जहां पर आज तक लोकतंत्र की स्थापना सांसदों द्वारा नहीं की गई। यह दुर्भाग्य का विषय कि हमारे लोग शिक्षित नहीं हो पा रहे हैं और इस कानून और संविधान की देन है की जिनकी जिम्मेदारी थी वह निभाए ? वह इस संविधान के कटघरे में खड़े होकर, अब जेल की कालकोठरी में अपना जीवन व्यतीत करेंगे तभी लोकतंत्र जीवंत रह पाएगा। कमोबेश उस लड़की के पिता की उम्र अपने जीवन का 60% जी लिया होगा, वही उसके दादा लगभग अपने जीवन के 90% से ज्यादा जी चुके होंगे ? उनकी मानसिकता अगर आज विकसित नहीं है या विकसित नहीं हो पाई, तो उसके पीछे राजनीतिक षड्यंत्र है ? वह और इस हत्या या आत्महत्या के लिए रामविलास पासवान जैसे षड्यंत्रकारिर्यों पर कानूनी या संवैधानिक रूप से सजा का प्रावधान होना चाहिए ?

20-Oct-2019 09:43

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