20-Jun-2019 12:37

"भ्रष्टाचार महोत्सव" का पहला आयोजन वैशाली जिले में भी प्रारंभ : सत्ताभोगी एवं नौकरशाही

आम जनता के पैसे से पल रहे राजनेताओं, जनप्रतिनिधियों सहित नौकरशाहों की बल्ले -बल्ले

भारतीय संविधान में आस्था के साथ, धर्मवादी सरकारों के सहयोगियों द्वारा धारा 144 का प्रयोग कर लूटेरों को बचाया गया। वातावरण में सूर्य के वर्चस्व को टक्कर देने में सहयोगी के रूप में सामने आया धारा 144। यह धारा आखिर किस पर लागू हैं ? शायद इसका जबाव सत्ताभोगियों और सरकारी धनों से पेट पालने वालों के पास नहीं होगा। यह धारा 144 पहली बार प्रयोग ऐसे हुआ है जिसका कोई औचित्य नज़र नहीं आता। इस गतिविधियों को हम यह कहकर समझ सकते हैं कि यह पहली " भ्रष्टाचार महोत्सव " का आयोजन सत्ताभोगियों और नौकरशाहों को संरक्षण के लिए किया गया है। भ्रष्टाचार की बुनियादी सुविधाओं पर खड़ी भारतीय संसद में हर बातों में अच्छाई नज़र आती हैं। भ्रष्टाचार खत्म करने आई सरकारें आज और भ्रष्टाचार में लिप्त हैं और आम आवाम़ को जातिवाद और धर्मवाद पर गुमराह कर रखी हैं।

कुछ दिनों से मौत का खेल पूरे बिहार में चलाया जा रहा है और संपोषित हो रहे राजनीतिक दलों से। मौत से भटकाव करने के लिए संविधान के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। एक अतिमहत्वकांक्षा के साथ नौकरशाहों के बदौलत प्रकृति के साथ खेल खेला जा रहा है। धारा 144 प्रकृति के साथ एक प्रतियोगिता का दौड़ चलाया जा रहा है और यह समझने की कोशिश हैं कि भारतीय संविधान भगवान और प्रकृति पर भारी हैं। 1990 के समय से लगभग 30 साल का सफ़र तय हो चुका हैं और जंगल राज के 15 साल के सफ़र के बाद अच्छे दिन वाली गठबंधन वाली सरकार का उदय हुआ। याद करने वाली बातें हैं कि इस अच्छे दिन वाली गठजोड़ पार्टी लूटरों की भाँति समाज को टुकड़े - टुकड़े कर रही हैं। आज चिकित्सा के नाम पर बच्चों की बलि चढ़ा रहे हैं बिहार सरकार के स्वास्थ्य मंत्री और भारत सरकार के केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री। हद तो यह हैं कि दोनों स्वास्थ्य मंत्री भारतीय जनता पार्टी (BJP) के हैं, जिसका नेतृत्व ही जुमलेबाज के हाथों में है।

आज कैंडल मार्च और राजनेताओं की दलाली करने वाले गैंग राष्ट्रवाद के नाम पर बच्चों के मौत को भी सदमा नहीं समझ रहे हैं। बच्चे उनके मर रहे हैं जो पूर्णतया भारत सरकार की दया पर जीवन यापन करते हैं। भोजन की गारंटी योजना भी इन्हीं को प्राप्त हैं, पर सवाल है कि उन्हीं गरीबों के मसीहा अपने जात और जमात के हक का पोषाहार कहाँ खा जाते हैं। आज भारत सरकार की तिलांजली देकर स्थापित मोदी सरकार के केन्द्रीय मंत्री डाँ. हर्षवर्धन और बिहार सरकार के मंत्री मंगल पाण्डेय मिलकर नीतीश कुमार की सरकार को कोमा में भेज दिया हैं। यह सही वक्त हैं जब मोदी सरकार के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी "सबका साथ सबका विकास" के तहत डाँ. हर्षवर्धन और मंगल पाण्डेय को सीधे तौर पर हत्यारे होने के कारण फाँसी देकर राष्ट्रवाद का सही परिचय दें। ताकि आने वाले समयों में यह तय हो जाए कि जिसकी मंत्रालय में ऐसी गड़बड़ी होगी, उसके साथ ऐसे ही बरताव किया जाएगा। अगर नरेंद्र मोदी और छोटा बिहार मोदी जो बिहार सरकार में उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी के नाम से झूठेबाज के रूप में प्रचलित हैं, यह दोनों अगर मंत्रालय से हटाकर गुमराह करने का काम कर दिया तो समझ जाना चाहिए आम आवाम़ को कि जुमलेबाज नरेंद्र मोदी झुठ की बुनियादी ढांचे पर टीकी हैं।

यह वक्त आरोप प्रत्यारोप का नहीं है यह सुनने को टेलीविजन चैनलों के डिबेट में मिल रहा है। अभी राजनीति के मुड में सत्ता पक्ष नहीं है। क्यों अभी बोलती बंद जनता कर देगी। मोदी सरकार के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी आजीविका और नाम के लिए एक राष्ट्र एक मतदान पर जोड़ दे रहे हैं। उनके पास इतना वक्त नहीं है कि वह उन लोगों के बच्चों के लिए संवेदना के एक शब्द ही कह सकें। भारत की आम आवाम़ को यह नहीं भूलना चाहिए कि मोदीजी कहते हैं कि वो चायवाले हैं, अतिपिछड़ा हैं, गरीब का बेटा हैं और बाबा साहब की कृपा से वो प्रधानमंत्री बन गयें। भारत की आम आवाम़ को यह कभी नहीं समझ आया कि फेंकू राम और जुमलेबाज देश के नाम पर वोट की बलि लेकर सत्ता तक का सफ़र कर रहे हैं। अब बस इंतजार रहेगा, राष्ट्रवाद के उस आयाम का जिसके बल पर भारत का ध्यान खींच कर बच्चों की हत्या और प्राकृतिक संसाधनों के दुरुपयोग के कारण आज भारत का मौसम विनाश की ओर ले जा रहा है। प्रकृति पर बाबा साहेब अंबेडकर के द्वारा निर्मित संविधान के बदौलत ही मुकदमा दर्ज किया जा सकता है लेकिन गरीब, दलित, वंचितों को सुरक्षा नहीं दिया जा सकता है। जबकि बाबा साहेब अंबेडकर के ही संविधान के बदौलत देश में पहला दलित राष्ट्रपति और एक चायवाले का बेटा प्रधानमंत्री बना यही कहानियाँँ खुद मोदी सरकार के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कहते हैं। लेकिन उसी चायवाले का बेटा मर रहा है और कारण नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार का हैं। दलित का बेटा मर रहा है जिसके बदौलत राष्ट्रपति तक बना डाला। अच्छे दिन आने वाले हैं, कोई सर्जिकल स्ट्राईक होने वाले हैं और मौतों को भुलाने वाले हैं ?

20-Jun-2019 12:37

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