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17-Apr-2020 10:53

देश को सबसे बड़ी हानि दो प्रधानमंत्रियों के कार्यकाल में हुई... पहला नाम इंद्र कुमार गुजराल

पाकिस्तानी गोलीबारी का भारत मुंहतोड़ जवाब दे रहा है... कुछ सप्ताह पूर्व पाकिस्तानी मीडिया मोदी सरकार आने के बाद अपने 1600 से अधिक सैनिक मारे जाने का दावा करते हुए रोना रो रही थी.

इंद्र कुमार गुजराल पैदाइशी कम्युनिष्ट था, जो पहले कांग्रेस में गया और फिर जनता दल में... 1996 में जब देवेगौड़ा प्रधानमंत्री थे तब कम्युनिष्टों की पहली पसंद गुजराल को विदेश मंत्री बनाया गया और तब से ही इसने भारत के विदेश मामलों को ख़राब करना शुरू कर दिया... इसके कार्यकाल में भारत पाकिस्तान से आगे की कभी सोच ही नहीं पाया... फिर जब ये प्रधानमंत्री बना तो इसने पाकिस्तान के साथ वह समझौता किया जिसमें लिखा था कि भारत अपने सारे कैमिकल हथियार नष्ट कर देगा... जबकि इसके PM बनने के पहले भारत कहता आया था कि उसके पास कैमिकल हथियार हैं ही नहीं... मतलब इस भारत के इस कम्युनिष्ट PM इंद्र कुमार गुजराल ने विश्व में ये सिद्ध करवाया कि भारत अब तक झूठ बोलता रहा है... इसके बाद इसने भारत के PMO से ख़ुफ़िया विभाग और RAW का पाकिस्तान डेस्क खत्म कर दिया... अगस्त 1997 में अमेरिका में पाकिस्तान के PM से मुलाकात होते ही इसने वहां से ही आदेश किया कि इसके भारत लौटने तक RAW का पाकिस्तान डेस्क ख़त्म होना चाहिए... इसके बाद इस दौरान भारत के पाकिस्तान, अफगानिस्तान, सऊदी, कुवैत, यमन, UAE आदि जगहों पर स्थित भारत के 100 से भी अधिक एजेंट मारे गए... इससे एक सप्ताह में ही भारत का सारा खुफिया विभाग ध्वस्त हो गया और RAW लगभग नष्ट हो गई... पाकिस्तान से लेकर फिलिस्तीन पर पूरा का पूरा गोपनीय सूचना तंत्र बर्बाद हो गया।

उसका परिणाम यह हुआ कि भारत को OIC क्षेत्र में उसके विरुद्ध हो रहे षडयंत्रों का पता ही नहीं चलता था... भारत में 1997 से लेकर 2001 तक का समय बेहद कठिन रहा... भारत बिना किसी गोपनीय जानकारी के रहा और कोई ऐसा महीना नहीं गया जब भारत में बम विस्फोट से लेकर सीमा पर छूटपुट आतंकी हमले न हुए हो। फिर 1998 में वाजपेयी सरकार आई और 1999 में कारगिल हुआ... सूचना तंत्र की असफलता पर सरकार को खूब कोसा गया... लेकिन कम्युनिष्ट मीडिया #Gujral_Docterine नामक उस मूर्खता से भरे कागज़ के पुलिन्दे को गोल कर गई जिससे कम्युनिष्टों को अभी भी मुहब्बत है क्योंकि उसमे भारत की असफलता छिपी है... भारत के Intelligence department को ख़त्म करके और RAW के नष्टप्रायः होने, उसके Logistics (रसद) के बर्बाद और एजेंटों के खात्मे के बाद हाल बहुत खराब हो गया... Indian Airline का हाईजैक होकर कंधार जाना, संसद भवन हमला, कोइम्बटूर हमला, अक्षरधाम, लाल किला हमला आदि होता गया और भारत सरकार पूरे 3 वर्ष तक अपने सूचना तंत्र से कुछ जानकारी प्राप्त नहीं कर पाई... अटल सरकार ने आने के कुछ महीने में ही फिर से RAW का पाकिस्तान डेस्क और इंटेलिजेंस का OIC विंग चालू किया था... जिसको भारत में ही खड़ा करने में 2002 तक का समय लग गया... फिर उसका विदेशों में एजेंट बनाना आदि करते करते 2004 में अटल सरकार चली गई... लोगों को अक्सर कारगिल और IC814 के हाईजैक को लेकर अटल सरकार पर हमला करते पाया जाता है लेकिन गुजराल के कारनामे ने भारत का जो नुक्सान कराया उस पर कभी बात ही नहीं हुई।

पेट्रोल डीज़ल, आलू मटर टमाटर के भाव, IT के स्लैब में बदलाव और एरियर को अपना सबसे बड़ा समस्या समझने वाली जनता को पता ही नहीं कि देश को असुरक्षा के किस दल दल में धकेल दिया गया था... समय रहते अटल सरकार ने कदम उठाया लेकिन ध्वस्त करना आसान है, खड़ा करना बहुत कठिन, वो भी ख़ुफ़िया जैसा विभाग... जिसमें योग्य एजेंट खोजने में कई कई वर्ष लग जाते हैं। #दूसरेहैंहमारेईमानदारप्रधानमंत्रीमनमोहनसिंह... जिन पर कभी कोई दाग नहीं लगता... ये अगर दिल्ली के नज़फगढ़ नाले में कूद के निकलें तो भी गंगोत्री में नहाए जैसे पवित्र निकलते हैं... इन्होने गुजराल जैसा तो नहीं किया और RAW तथा intelligence से छेड़छाड़ नहीं की, लेकिन पाकिस्तान और भारत के कम्युनिष्टों के बनाए भंवरजाल और जालसाज़ी को खूब आश्रय दिया... इन्होने intelligence और सुरक्षा विभाग को इस योग्य नहीं छोड़ा कि वो विभाग देश में मुंबई के हमले से लेकर अनेकों शहरों, ट्रेनों में बम विस्फोट आदि के षड्यंत्रों को पहले से जानकर रोक पाए। 2007-2008 के आसपास पाकिस्तान के लाहौर में एक घटना घटी... वहां की पाठ्य पुस्तकों में भगत सिंह और उनके साथियों राजगुरु तथा सुखदेव के लिए लिखा गया कि "पाकिस्तान के भगत सिंह और उसके दो काफिर साथियों ने हमारे पड़ोसी देश भारत की आज़ादी के लिए काम किया, उस देश के लिए जो हमारा दुश्मन है और जिसकी आज़ादी की लड़ाई से हमें कोई सरोकार नहीं, हम उनके बारे में क्यों पढ़े ? ये उनके हीरो हैं, हमारे हीरो हमारे खुद के देश में हैं जिनको हम पढ़ेंगे।" पाकिस्तान में इस तरह के मामले की शुरुआत होने के खिलाफ पाकिस्तान के प्रसिद्ध स्तंभ लेखक और परिचर्चा एक्सपर्ट हसन निसार ने मोर्चा खोला... हसन निसार खुले मंचों पर भगत सिंह को पाकिस्तान देश की आज़ादी का सिपाही और हीरो घोषित करने लगे... उन्होंने लाहौर चौक का नाम भी भगत सिंह चौक रखने की मांग रखी... इस सबके बीच ये बात चलाई गई कि ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि दोनों देश के लोगों में कोई संवाद नहीं है... दोनों देश के लोगों के बीच संवाद बढ़ना चाहिए... इस संवाद को बढ़ाने के लिए पाकिस्तान के अखबार The Jung और भारत के Times of India ने आपस में मिलकर कार्यक्रम आरम्भ किया... गायक, कलाकार, खिलाड़ी लोगों का आना जाना, मुशायरों का आयोजन आदि सब शुरू किया... बस यहीं पर, इसी माध्यम से पाकिस्तान ने भारत के अंदर बहुत अंदर तक घुसपैठ कर ली... पाकिस्तान से जो भी कलाकार आते थे वो सब ISI की निगरानी में उनके सिखाए, उन पर निगाह रखने वाले और सीधे ISI एजेंट उनके मैनेजर आदि के रूप में खूब आए... भारत के intelligence और RAW को मनमोहन सरकार ने इनके दूर रहने का आदेश दिया... सरकार ख़ुफ़िया विभाग से पाकिस्तान की तरफ से आने वाले लोगों की लिस्ट से लेकर कार्यक्रम आदि सब छिपा के रखती थी... उधर से आए ये ISI के एजेंट यानी "अमन की आशा" गिरोह पूरे भारत की रेकी करते, अपने स्लीपर सेल बनाते और निकल जाते और फिर पीछे से भारत में मुम्बई हमला, कई अलग अलग शहरों में बम ब्लास्ट, कश्मीर में बेरोक टोक हमले कराते रहते... कम्युनिष्टों के अमन की आशा गैंग के निर्देश पर कश्मीर में तैनात सेना पर आरोप लगाकर जेल में डालना आदि जैसे कारनामे मनमोहन सरकार ने खूब किये... भारत की अधिकांश मूर्ख जनता इन अमन की आशा वालों के जाल में फंसी हुई नुसरत फतह अली आदि के गीतों पर झूमती... जबकि उसका खरीदा हर एक CD-DVD का पैसा पाकिस्तान परस्ती और उसके अपने ही सेना के खून बहाने में लगता।

इधर से जो जाते थे उनको पाकिस्तानी पश्तून, कश्मीरी, अफगानी, यूक्रैन की लड़कियां, महँगी शराब, महँगी घड़ियां आदि देकर अपने ओर रखते थे... अय्याशी के गर्त में डूबे इन अन्धों और लालची अमन की आशा वाले लोगों ने इस तरीके से देश को आतंकवादियों के आकाओं के हस्त जमकर बेचा... इस गैंग को प्रायोजित करने का काम भी मनमोहन सरकार ने किया है... पाकिस्तान में हुई भगत सिंह वाली घटना के बाद ही भगत सिंह को आतंकवादी बताने वाले कम्युनिष्टों ने उनको अपना हीरो बनाकर पेश करना शुरू किया... कम्युनिष्टों के पाकिस्तानी मिलीभगत से किए जा रहे इस जालसाज़ी को फिर कभी खोलेंगे। इधर 4 वर्षो से अमन की आशा गैंग का धंधा बंद है... कश्मीर में आतंकी मारे जा रहे हैं... देश में गड़बड़ी फैलाने से पहले स्लीपर सेल वाले दबोच लिए जा रहे हैं... पत्थरबाजॉन को बख्शा नहीं जा रहा है... मनमोहन सरकार द्वारा फंसाए गए सेना के सभी अधिकारी न्यायालय से बरी किए जा रहे हैं... पाकिस्तान और म्यांमार सीमा पार करके आतंकियों के खिलाफ सेना सर्जिकल स्ट्राइक कर रही है... पाकिस्तानी गोलीबारी का भारत मुंहतोड़ जवाब दे रहा है... कुछ सप्ताह पूर्व पाकिस्तानी मीडिया मोदी सरकार आने के बाद अपने 1600 से अधिक सैनिक मारे जाने का दावा करते हुए रोना रो रही थी... भारत अपनी सुरक्षा के लिए फ्रंट फुट पर खुलकर खेल रहा है... अभी भारत को ऐसे ही करना चाहिए... पाकिस्तान से लेकर चीन मीडिया में रोज एक प्रोग्राम मोदी पर कोई ऐसे ही नहीं होता ही है।

17-Apr-2020 10:53

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