31-Mar-2020 05:56

कोरोना वायरस की आर में बिहार विधानसभा चुनाव समय से पहले होने की संभावना : मनीष कुमार

सत्ताभोगियों में कोरोना वायरस एक राम बाण की तरह, हो सकता हैं अनुदान की घोषणा और बिहार विधानसभा चुनाव

भारतीय राजनीति का स्तर जिस तरीके से लगातार अपने निचले स्तर पर पहुंच गया है, उसी स्तर पर कोरोना वायरस का भी प्रभाव पड़ेगा। भारतीय राजनीति में जिस तरीके से पिछले 7 सालों में बदलाव देखी गई है, वह बदलाव विश्वव्यापी कोरोन जैसी भयावह स्थिति पैदा करने वाली है। विभिन्न प्रकार के भारत सरकार की योजनाओं का लाभ अब जनता को शायद मिल सकता है, जिसकी तैयारी या जिसकी पृष्ठभूमि राजनीतिक रूप से तैयार की गई। उसका वक्त आ गया है। इस वक्त जब पूरी दुनिया कोरोना जैसे महामारी से जूझ रही है, वहीं भारत सरकार जोकि एनडीए के नेतृत्व में संचालित है, वह अपनी एक नई दुनिया तैयार करने की ओर बढ़ रही है। यह बात कितनी आगे सच होगी, वह तो वक्त बताएगा, लेकिन जो यथार्थ नजर आ रहा है, उसमें यही कि भारतीय राजनीति एनडीए शासन के नेतृत्व में एक अलग रणनीति पर काम कर रही है।

जिस प्रकार कोरोना के प्रकोप को लेकर पूरा विश्व पिछले दो-तीन महीनों से विचलित है। वही बहुत देर से भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आंखें खुली, तब तक बहुत देर हो चुकी थी। वहीं अचानक 8 बजे रात में आकर और पुनः नोटबंदी की तर्ज पर पूरे देश को अघोषित आपातकाल की तरफ बढ़ा दिया गया। जब 8 नवंबर 2016 को रात 8 बजे बिना तैयारी के ही नोटबंदी जैसे फैसले से लाखों परिवार की खुशहाली को ग्रहण लगा दिया। साथ ही साथ कितने परिवार में मातम छा गई जब उनके पिता, मां, भाई, बहन, बच्चे, बुआ, फुफा विभिन्न प्रकार से कई रिश्ते को खो दिया। वहीं एक राष्ट्रव्यापी दुर्घटना पर खुद जापान की यात्रा के बाद आंसू बहाने वाले भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोई सबक नहीं लिया।

भारतीय को याद रखने की जरूरत है कि आज भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हैं और जब गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी थे, तो पैसे का बागडोर सीधा भारत के प्रधानमंत्री के हाथों में बताया और मनमोहन सिंह को जलील करने में कोई कसर नहीं छोड़ा। लेकिन जैसे ही नोटबंदी की और जो नोटबंदी के उद्देश्य गिनती कराने में घंटे भर भाषण किया था। उसकी हकीकत यहीं से पता चलता है जब नक्सली हमले बंद नहीं हुआ तो स्पष्ट हुआ कि नरेंद्र मोदी ने झूठ का पुलिंदा बांधकर सत्ताधारी बने। लेकिन नरेंद्र मोदी के राष्ट्रवादी फैसले पर तमाचा तब और मजबूती से लगा जब पुलवामा हमले हुए और लगभग 4 दर्जन से ज्यादा भारत माता के वीर सपूतों की बलि चढ़ी। तब यह पैसा और बारूद कहां से कहां तक पहुंचा उसकी जबावदेही नरेंद्र मोदी ने कहीं नहीं उठाई और राष्ट्रवाद के नाम पर युवाओं और देश की जनता को गुमराह करते रहे हैं। जिसके बाद भी दोबारा देश है भरोसा दिखाया और मतदाताओं ने दोबारा सत्ता के शीर्ष पर बैठाया। इसका एकमात्र विश्वास या था कि अपने आपको 56 इंच का कहने वाला व्यक्ति देश की आम जनता के साथ देश की मजबूती के साथ खड़ा रहेगा। लेकिन यथार्थ आज भी कोसों दूर नजर आती है। 6 साल का सफर तय कर चुके नरेंद्र मोदी ने चुनाव के वक्त जिन जिन लोगों को अपराधी घोषित किया था उन पर एक मामूली सा कार्रवाई तक नहीं कर पाया और सत्ता के मद में लगातार तोड़ मरोड़ की राजनीति चलाते रहे हैं। जिस समय देश कोरोना वायरस के कहर से तप रहा था उस वक्त भी मध्यपदेश में सरकार बनाने में व्यस्त रहें और जैसे ही सरकार बनी देशव्यापी अघोषित आपातकाल की घोषणा कर दी गई।

आज भले ही लॉक डाउन के नाम से अघोषित आपातकाल जारी है। लेकिन वैसे ही जारी है जिस तरीके से नोटबंदी के समय भारत के प्रधानमंत्री ने आश्वासन दिया था। आज उससे भी भयंकर भयावह स्थिति में भारत पहुंच चुका है। भारत के विभिन्न कोण से लोगों को अपने राज्य में भागना पड़ रहा है। और खासकर बिहार की जनता, बिहार के मजदूर, जिन्होंने पूरे भारत को बनाने में अपनी पूरी भूमिका निभाई। अपना पूरा जीवन निभा दिया, उन सब को हजारों किलोमीटर पैदल यात्रा करना पड़ रहा है। इस लाॅक डाउन में भारत की आम जनता तक खाने, रहने और चिकित्सा की कोई भी व्यवस्था नहीं कि गई है। और अब ऐसा लग रहा है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था का चिरहरण करने की तैयारी करने में एनडीए सरकार ने कोई कसर नहीं छोड़ी है। आम जनता को पहले भूखे-प्यासे मारने के बाद आरक्षण, अनुदान और ढ़ेरों लोकलुभावन योजनाओं के माध्यम से ठग्गने की तैयारी पूरी हो चुकी है। अब कुछ और हफ्ते आराम करने के बाद संभवतः ही जन-धन खातों, राशनकार्ड धारकों के खाते में कुछ घुट्टी पिलाने की कोशिश की जाएगी। वहीं लाॅक डाउन अगले 84-90 दिन का हुआ तो उसके साथ ही बिहार विधानसभा चुनाव 2020 चुनाव समय से पहले होने की तैयारियां पूरी हो रही हैं। इसके लिए एक अलग व्यवस्था बहुत जल्दी ही देखने को मिलने वाली है। पूरे भारत में बिहारियों को सबसे ज्यादा परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है तो उसके दर्द को और बढ़ाते हुए अनुदानों का मरहम देश के कुछ वर्गे को देने की तैयारी है। बिहार तैयार रहें महामारी के साथ बिहार विधानसभा चुनाव 2020 की।

31-Mar-2020 05:56

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