14-Dec-2019 09:30

CAB पर इतना विवाद क्यों ?

आसाम सरकार ने NRC को लागू करने में 16 सौ करोड़ रुपए खर्च किये है जबकि अपनी नागरिकता को प्रमाणित करने में लोगों ने लगभग 8000 करोड रुपए खर्च किए हैं इससे जो निष्कर्ष निकले सरकार के अनुसार उसमें कुल 19 लाख घुसपैठिए शामिल थे जिनमें 14 लाख हिन्दू घुसपैठिए थे औ

नागरिक संशोधन बिल संसद के दोनों सदनों में बहुमत के साथ पारित हो गया है मगर पूर्वोत्तर से लेकर विपक्ष तक तथा आम नागरिक से लेकर विशेष बुद्धिजीवियों तक इवस बिल का विरोध हो रहा है आखिर क्यों? यह बिल केवल इस्लामिक राष्ट्र अफगानिस्तान, पाकिस्तान और बांग्लादेश में धर्म के आधार पर प्रताड़ित किये गए गैर इस्लामिक लोगों को शरण देने हेतु है। इसमें कोई बुराई इसलिए भी नजर नहीं आती क्योंकि इससे भारत के नागरिकों को कोई विशेष हानि नहीं होगी फिर इतनी उथल-पुथल क्यों ? दरअसल यह मामला शुरू होता है जहां NRC लाया गया। आसाम सरकार ने NRC को लागू करने में 16 सौ करोड़ रुपए खर्च किये है जबकि अपनी नागरिकता को प्रमाणित करने में लोगों ने लगभग 8000 करोड रुपए खर्च किए हैं इससे जो निष्कर्ष निकले सरकार के अनुसार उसमें कुल 19 लाख घुसपैठिए शामिल थे जिनमें 14 लाख हिन्दू घुसपैठिए थे और 5 लाख मुस्लिम आदि। इससे सरकार की नीतियों पर सवाल उठ गए कि घुसपैठिए केवल घुसपैठिए होते हैं या तो 19 लाख को बाहर कीजिये या फिर 19 लाख को ही संरक्षण दीजिए इसके एवज में सरकार लेकर आई है #CAB यानि नागरिक संशोधन बिल।

पहले इस कानून को लागू करने से यह होगा कि जो 14 लाख हिन्दू घुसपैठिए हैं उन्हें भारत की नागरिकता मिल जाएगी और उसके बाद 5 लाख धर्म विशेष के लोगों को निकालने में आसानी होगी जिन्हें पहले निकालने में समस्या हो रही थी। हालांकि सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि 2014 तक जो भी भारत मे हैं उनपर कोई तकलीफ नहीं होगी। लेकिन दूसरी विवाद की बात यह कि गृहमंत्री अमित शाह कह चुके हैं कि एनआरसी पूरे देश मे लागू होगा। अब इससे क्या फर्क पड़ेगा वह भी समझें। 2010 में मेरे गांव में रोड़ आई जिसमें हमारा एक पूरा खेत कट गया मगर उसका मुआवजा हमारे ही गांव के एक सवर्ण को मिला क्योंकि उस खेत की खतौनी उनके दादाजी, पिताजी के नाम पर है। जब हम और हमारे साथ अन्य गांववासी उनके पास गए और कहा कि सदियों से खेत हमारे पास हैं तो मुआवजे पर हमारा हक होना चाहिए लेकिन वे इससे मुकर गए। इसपर प्रशासन ने भी हाथ खड़े कर दिए क्योंकि खेत किसी और के नाम पर था। अब सोचिये आप बरसों से अपने गांव कस्बों से दूर रह रहे और सारे कामकाज छोड़कर जमीनों की मिल्कियत और रिहाइश के प्रमाण लेने के लिए अपने गांव आएंगे, इनमें से कुछ यह भी पाएंगे कि पटवारी लेखपाल से सांठगांठ करके लोगों ने जमीनों की मिल्कियत बदल दी है तो?

याद रखिए कि #आधारकार्ड और #पैनकार्ड दिखाकर आप अपनी नागरिकता सिद्ध नहीं कर सकते हैं। जो लोग यह समझ रहे हैं कि NRC के तहत सरकारी कर्मचारी घर-घर आकर कागज देखेंगे, उन नादानों को यह मालूम होना चाहिए कि NRC के तहत नागरिकता साबित करने की जिम्मेदारी व्यक्ति की होगी, सरकार की नहीं। इसके अलावा जिसकी नागरिकता जहां से सिद्ध होगी, उसे शायद हफ्तों वही रहना पड़े, करोड़ों लोगों के कामकाज छोड़कर लाइनों में लगे होने से देश का उद्योग व्यापार और वाणिज्य, और सरकारी गैर सरकारी दफ्तरों का कामकाज चौपट हो जाएगा। सोचिये पूरे देश में यह राशि कितनी होगी? इस अनुत्पादक खर्च का इकॉनमी पर क्या असर पड़ेगा? सनक में लाई गई #नोटबंदी और जल्दबाजी में लाए गए #GST ने पहले ही हमारी इकोनॉमी को तबाह कर दिया है। इक्का-दुक्का घुसपैठियों को छोड़कर ज्यादातर जेनुइन लोग ही परेशान होंगे। श्रीलंकाई, नेपाली और भूटानी मूल के लोग, जो सदियों से इस पार से उस पार आते जाते रहे हैं, उन्हें अपनी नागरिकता सिद्ध करने में दांतो से पसीना आ जाएगा. जाहिर है, इनमें से ज्यादातर हिंदू ही होंगे। लगातार अपनी जगह बदलते रहने वाले #आदिवासी समुदायों को तो सबसे ज्यादा दिक्कत आने वाली है। वन क्षेत्रों में रहने वाले लाखों लोग वहां की जमीनों पर वन अधिकार कानून के तहत अपना कब्जा तो साबित कर नहीं पा रहे हैं, नागरिकता कैसे साबित करेंगे? दबित, शोषित, पिछड़े वर्ग के लोगों का क्या होगा जिनके पास अपनी जमीन का एक टुकड़ा तक नहीं कैसे साबित करेंगे? दूरदराज के पहाड़ी और वनक्षेत्रों में रहने वाले लोग, घुमंतू समुदाय, अकेले रहने वाले बुजुर्ग, अनाथ बच्चे, बेसहारा महिलाएं, विकलांग लोग और भी प्रभावित होंगे। लेकिन इसमें कुछ लोगों की पौ बारह भी हो जाएगी। प्रक्रिया को फैसिलिटेट करने के लिए बड़े पैमाने पर दलाल सामने आएंगे। जिसके पास पैसा है, वे व्यक्ति जेनुइन नागरिक न होने के बावजूद #फर्जी कागजात बनवा लेंगे। नागरिकता सिद्ध करने में सबसे ज्यादा दिक्कत उसे होगी, जो सबसे ज्यादा वंचित है! और हां, जो लोग अपनी नागरिकता प्रमाणित नहीं कर पाएंगे उनके लिए देश में डिटेंशन सेंटर बनेंगे। इन डिटेंशन सेंटर्स को बनाने और चलाने में देश के अरबों खरबों रुपए खर्च होंगे। कुल मिलाकर देश का सामाजिक-आर्थिक और राजनीतिक परिदृश्य अस्त-व्यस्त हो जाएगा।

CAB पर भी सवालिया निशान इसलिए लग रहे हैं कि यह संविधान का उलंघन है जहां धर्म के आधार पर आप भेदभाव कर रहे हैं। कुछ लोगों का मानना है कि इस्लामिक देशों में भेदभाव केवल गैर मुसलमानों के साथ ही होगा लेकिन वो गलत हैं क्योंकि शिया सुन्नियों की लड़ाई में जो कमजोर हैं वे प्रताड़ित हैं मगर आपने उन्हें केवल मुस्लिम होने के चलते वंचित किया है। भारत नेपाल में हिन्दू बहुसंख्यक है बावजूद हिंदुओं द्वारा ही निम्न तबकों का शोषण किसी से अनदेखा नहीं रहा है। बेहतर होता यदि इसमें नेपाल, श्रीलंका, भूटान आदि देशों को भी इसमें शामिल करते। सबसे अधिक घुसपैठिए तो इस समय नेपाल से हैं। बेहतर यह भी होता कि घुसपैठियों को रोकने के लिए सख्त प्रक्रिया होती बशर्ते वह किसी भी धर्म के होते। अपने देश मे आधार कार्ड, पैन कार्ड, राशन कार्ड आदि बनाने की प्रक्रिया को सख्त करते। एनआरसी और कैब केवल बदले की भावना दिखाई पड़ती है और आने वाले समय मे गरीब लोगों को फिर से परेशान करना और अंत मे ढाक के तीन पात निकलेगा। सबसे कारगर कदम यह होंगे कि नागरिक संशोधन बिल (CAB) की जगह जनसंख्या नियंत्रण कानून (PCB) लेकर आते। लेकिन इस सरकार को काम नहीं हिन्दू मुस्लिम जो करना है।

14-Dec-2019 09:30

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