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18-Apr-2020 12:41

नियोजित शिक्षकों ने ठाना है कोरोना वायरस और नियोजनवाद को मिटाना है

कोरोना वायरस जनित वैश्विक महामारी और बिहार सरकार जनित नियोजनवाद रूपी बिहारी महामारी को बिहार से जड़ सहित उखाड़ फेंकेंगे.

वैशाली / दिन- शनिवार 18 अप्रैल 2020/ कोरोना वायरस के संक्रमण से उत्पन्न वैश्विक महामारी के बावजूद वैशाली जिले के हजारों नियोजित शिक्षक अपनी मांगों के समर्थन में अनिश्चितकालीन हड़ताल पर डटे रहने को बाध्य हैं. वैशाली जिले के हड़ताली नियोजित शिक्षक कोरोना वायरस के संक्रमण से उत्पन्न आपदा और सरकार की संवेदनहीनता के खिलाफ अंतिम दम तक लड़ते रहेंगे. ये हड़ताली नियोजित शिक्षक अपनी प्रमुख मांग सहायक शिक्षक, राज्यकर्मी का दर्जा, पूर्ण वेतनमान समेत पुराने शिक्षकों की भांति समान सेवा-शर्त को लेकर मांग पूरी नहीं होने तक अनिश्चितकालीन हड़ताल पर डटे रहेंगें. ये बातें बिहार राज्य शिक्षक संघर्ष समन्वय समिति के अघ्यक्ष मंडल सदस्य सह टीईटी- एसटीईटी उत्तीर्ण नियोजित शिक्षक संघ गोपगुट के जिलाध्यक्ष श्री प्रेमशंकर सिंह ने कहीं.

उन्होंने बिहार सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि बिहार में जितनी मृत्यु कोरोना वायरस के संक्रमण से नहीं हुई है उतनी मृत्यु बिहार में बिहार सरकार के शिक्षा एवं शिक्षक विरोधी दमनकारी नीति के संक्रमण से हुई है. बिहार में अभी तक कुल 51 हड़ताली नियोजित शिक्षकों की मृत्यु सरकार के दमनकारी नीति के संक्रमण से हो चुकी है. कोरोना वायरस के संक्रमण को सोशल डिस्टेंसिंग के माध्यम से फैलने से रोका जा सकता है लेकिन बिहार के लाखों नियोजित शिक्षकों और उनके परिवार को बिहार सरकार जनित नियोजनवाद रूपी वायरस के संक्रमण से रोकने का एक मात्र संवैधानिक उपाय हड़ताल है, जिसे सरकार अपने कुटिल प्रयासों से दबाना चाहती है. लेकिन जिले के नियोजित शिक्षकों ने यह ठान लिया है कि कोरोना वायरस जनित वैश्विक महामारी और बिहार सरकार जनित नियोजनवाद रूपी बिहारी महामारी को बिहार से जड़ सहित उखाड़ फेंकेंगे.

वहीं दूसरी तरफ गोपगुट संघ के जिलासचिव संजीव कुमार, रमण कुमार शर्मा, जिलाउपाध्यक्ष विमलेश कुमार सिंह, रणवीर पासवान, जिला कोषाध्यक्ष रणविजय कुमार, जिला संयोजक दिनेश कुमार ओझा, जिलामहासचिव पंकज कुमार, और जिला मीडिया प्रभारी राजेश कुमार पासवान ने कहा कि वर्तमान में बिहार के शिक्षा मंत्री कोरोना वायरस के संक्रमण से उत्पन्न वैश्विक महामारी के बीच भी घड़ियाली आँसू बहाने से बाज नहीं आ रहे है. बिहार को गरीब राज्य की संज्ञा देकर वे अपने कर्तव्यों से विमुख होने का प्रयास कर रहे है. बार-बार हड़ताली शिक्षकों से हड़ताल तोड़कर विद्यालय में योगदान करने की अपील कर रहे है. लेकिन शिक्षा मंत्री के अपील करने के बावजूद वैसे शिक्षक जो गलतफहमी में आकर विद्यालय में योगदान कर भी लिए थे वह भी अब पुनः हड़ताल में वापस आ रहे है.

उन्होंने कहा कि एक तरफ बिहार में कोरोना वायरस के संक्रमण से मात्र 01 व्यक्ति की मृत्यु हुई है इसलिए सरकार संवेदनशील बनी हुई है वहीं दूसरी तरफ अनिश्चितकालीन हड़ताल में शामिल हड़ताली नियोजित शिक्षकों के बीच उत्पन्न आर्थिक संकट के कारण बेहतर इलाज नहीं होने से अभी तक 51 नियोजित शिक्षक दम तोड़ चुके है. इस पर ये हठधर्मी सरकार असंवेदनहीनता की पराकाष्ठा पार कर रही है।

18-Apr-2020 12:41

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