18-Apr-2019 06:10

भारत में शिक्षा की व्यवस्था करनी है तो एक रेलकर्मी के संकल्प से शिक्षा का गुर ले भारत सरकार

भारत मे प्रतिभा की कमी कभी नही रही है परंतु गिरती शिक्षा व्यवस्था का एक मात्र कारण है प्राइमरी शिक्षा का अस्तर गिर जाना ।

एक सफल रेलकर्मी द्वारा समाज़ के बच्चों को निर्माण का संकल्प ने भारत के गिरती हुई प्राइमरी शिक्षा व्यवस्था से चिंतित एवम व्यथित , पूमरे मुख्यक के यांत्रिक विभाग में कार्यरत इंजीनियर एस के सिंह को शिक्षा से काफी लगाव है जिसके परिणाम स्वरूप इनके सानिध्यता में कई बच्चों ने IIT , NIFT, UPSC में सफलता प्राप्ति की है। विगत कई वर्षों से ये दुनिया के सर्वोच्च 20 देशों के प्राइमरी शिक्षा पर अध्ययन एवं शोध कर रहे है ।

इनका कहना है कि मीडिया और नेट से प्राप्त जानकारी के अनुसार भारतीय शिक्षा व्यवस्था 90 से 100 के बीच मे चल रही है । जब हमारी बच्चों के नीव ही कमजोर है तो वो आगे के शिक्षा के महल और दीवार कैसे खड़ी कर सकते है । श्री एस के सिंह के एक बच्चे IIT दिल्ली से बीटेक करने के बाद 2015 में आईपीएस बने और दूसरे दिल्ली यूनिवर्सिटी से बीकॉम ऑनर्स के उपरांत फ़िल्म।एक्टर है ।

श्री एस के सिंह ब्रेन बूस्टर मिशन के माध्यम से 5वर्ष से 12 वर्षों के बच्चों को आधुनिक शिक्षा वैदिक कालीन पद्धति से देने की कोशिस कर रहे है जिससे कि बच्चों को भविष्य में किसी भी परीक्षा या प्रतियोगिता में कठिनाई के सामना नही करनी पड़े । इन्होंने अपने पढ़ाने के तरीके पर MVAS यानी मॉडर्न वैदिक एडवांस स्टडी सिलेबस तैयार कर रहे है । जिसमे CBSE , ICSC के साथ साथ ईश्वस्तरिये आधुनिक शिक्षा के भी समावेश है । श्री एस के सिंह अपने सुबह मोर्निंग वाक के समय ,विश्राम एवम अवकाश दिवस पर घूम घूम कर अभिभावकों और सरकारी स्कूलों में मिलकर बच्चों के प्राइमरी एडुकेशन संबंधित जागरूकता फैलाते रहते है । इनका कहना है कि भारतीय शिक्षा व्यवस्था में बच्चों को पढ़ाई शिक्षक अपने मन और मूड के अनुसार कराते है जबकि बच्चों को उसके मूड और इच्छा के अनुसार सिखानी चाहिए ।

पूमरे, रेलवे कॉलोनी , कौनहारा घाट , हजीपुर में इन्होने ने कई बार अभिवाको के शिक्षा के संदर्भ में परिचर्चा की एवम बच्चों को कैसे पढ़नी चाहिए उस पर प्रकाश डाला। ब्रेन बूस्टर मिशन के माध्यम से बच्चों को स्वाध्याय एवं यादाश्त बढ़ाने के लिए कार्य कर रहे है । वैदिक कालीन शिक्षा पद्धति में स्वाध्याय एवं मेडिटेशन ही मूलमंत्र था । इनके द्वारा तैयार प्रश्नों को बच्चों द्वारा काफी पसंद किया जाता है और छोटे छोटे बच्चे एक दिन 200 मैथ के प्रश्न खुद से हल कर लेते है ।

18-Apr-2019 06:10

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