10-Jun-2019 12:27

राजीव गांधी ने नवोदय विद्यालय के रूप में संस्कृति, संस्कार एवं सामाजिक न्याय की स्थापना की

नवोदय विद्यालय भारत को एक जीवनशैली दिया जो भारत के युवाओं को मार्गदर्शित करता हैं।

आज एक ऐसे प्रधानमंत्री पर लिखने की इच्छा हो रही हैं, जिसने भारत को एक मजबूत आधार तैयार कर दिया। मानवीय जीवन का मूल शिक्षा में ही समाहित होता हैं और बेहतरीन जीवनशैली शिक्षा के बगैर संभव नहीं है। इसका लाखों उदाहरण हैं, परंतु शिक्षामुक्त भारत बनाने के आज की राजनीतिक प्रयासों की घोर निंदा करते हुए कहना चाहता हूँ कि राजीव गांधी एक संस्कृति, संस्कार और सामाजिक न्याय के साथ आदर्श भारत की कल्पना या हवा-हवाई बातें करने की जगह स्थापित कर दिया "नवोदय"। महज बहुत कम राजनीतिक अनुभव के ही अपने कुछ मात्रसमय कार्यकाल में शिक्षाकी महत्त्वपूर्ण बुनियाद की स्थापना कर दौड़ा दिया। शिक्षा ही एकमात्र माध्यम होता हैं, अपने जीवन को जानने और समझने के लिए। एक छोटा सा प्रयास कर भारत के तमाम जिलों में स्थापित कर दिया "जवाहर नवोदय विद्यालय"।

जवाहर नवोदय विद्यालय के शिक्षण शैली से काफी बार अवगत हुआ, लेकिन इसका महत्व समक्ष आया तब जब उनके यहाँ के पढ़े बच्चों में राष्ट्रवाद और संघर्षरत जीवन को महत्व देते देखा। हमेशा महसूस किया करता हूँ कि नवोदय विद्यालय जैसी व्यवस्था प्रत्येक भारत के विद्यालयों की हो जाए तो भारत को विश्व गुरू बनाते देर नहीं लगेगी। जवाहर नवोदय विद्यालय से परिवारिक संबंध बनने के साथ ही संघर्ष और समर्पण की शैली मैं अपनी पत्नी में देखा। वहीं जब छह साल पहले बिहार आया और उसकी सहेलियों और सहपाठियों से मिला तो एक बहुत अलग माहौल मिला। नवोदय विद्यालय एक व्यक्ति निर्माण के लिए नहीं बना, "एक राष्ट्र- एक परिवार" की नींव रखनेवाली व्यवस्था को महसूस किया और जाना। धीरे धीरे यह नवोदियनों की टीम बढ़ते देखा, तो एक बात बहुत अलग लगी कि यह टीम नहीं बढ़ा रहे हैं यह एक संयुक्त परिवार का आधुनिकीकरण परिवार हैं।

पत्नी के साथ उनके पहले के बैंच के लोगों से मिला तो भईयाँ, छोटी बहन, एक मातृत्व का अहसास हुआ। वहीं बड़े भईयाँ से मिलने पर एक ऐसा सामाजिक प्यार मिला, जो क्या किसी को ससुरालों में सम्मान मिलेगा। एक आदर्श परिवार जो दूरस्थ दुनिया के बावजूद पूरे भारत में एक हैं। मुझे गर्व महसूस होता हैं कि भारत को एक ऐसा प्रधानमंत्री मिला था, जिसे सही समझ थी कि शिक्षा के बल पर हम भारत को पुनः विश्व गुरू के रूप में स्थापित करेंगे। जाति, धर्म, समुदाय, क्षेत्रवाद की सारी बुराईओं से परे नवोदियनों का संस्कार नज़र आता हैं। बहुत समय से इसपर काम करने की इच्छा है और इसपर एक बहुत जल्द समीक्षात्मक रिपोर्ट तैयार कर आपतक लाऊँगा।

अब जब भले ही आज राजनीति के व्यक्तिवादी अंधभक्ति में भक्तों को अपने पूर्वजों को गाली गलौज करना आसान लग रहा है, उस दौड़ के लिए भी तैयारी कर ले जब आने वाली पीढ़ियाँ सारी राजनैतिक महत्वाकांक्षा की बलि चढ़ायेगा। भारत के वर्तमान प्रधानमंत्री और खुद को सरकार समझने वाले नरेंद्र दामोदरदास मोदी उर्फ मोदी सरकार जिनके पास लगभग 20 वर्षों का सरकार चलाने का अनुभव है। लेकिन घृणा होती हैं कि नरेन्द्र मोदी जैसे राजनीति के सफलता की सीढ़ियाँ छोटी करते जा रहे पर भारत को संस्कृति, संस्कार, सामाजिक न्याय और सभ्यता के लिए एक भी कदम नहीं उठा पायें। जो प्रधानमंत्री पद पर बैठकर इतनी हिम्मत दिखाता हैं कि राजीव गांधी पर टिप्पणी कर सकें। वर्तमान सरकार मोदी सरकार पिछले 20 सालों में मानवीय मूल्यों की हत्या करने की सीख दे पाये। नफ़रत की बीच हिंदु, मुस्लिम में युवा भारत को व्यस्त रखा हुआ है और इसी का परिणाम है कि मुख्यमंत्री के बाद दुबारा प्रधानमंत्री बने तो सिर्फ़ हिंदुत्व की दुकान खोलकर। अभी भी वक्त हैं कि नवोदय विद्यालय जैसी शिक्षा व्यवस्था संपूर्ण भारत में तत्काल प्रभाव से लागू हो, ताकि कैंडल मार्च करने में और हरा, नीला और भगवा रंग के कपड़ो के बलपर युवा भारत बदलने से मुक्त हो कर भारत नव निर्माण करें।

10-Jun-2019 12:27

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