17-Jun-2018 11:33

शिक्षा देने के नाम पर सब क्यों चुप : ई. रविन्द्र कुमार सिंह

वैशाली को हर स्तर पर कमजोर करने का प्रयास किया जाता रहा है। लेकिन वैशाली फिर अपने पैरों पर खड़ा होकर लोकतंत्र को मजबूती प्रदान करेग।

आज बहुत ही खा़स बातों में वैशाली जिले के महनार निवासी ई. रविन्द्र कुमार सिंह से शिक्षा पर एक बहुत अलग विचार आया। विचारों का दायरा कभी एकल नहीं होता, लेकिन बातों-बातों में कुछ अच्छी बातें निकल पड़ती हैं। लगभग दो वर्षों से बिहार की शिक्षा पद्धति को लेकर सवालें उठती रही हैं। वहीं हाल इस साल भी रहा, लेकिन रिजल्ट का स्तर बहुत ही अलग और पूरी राजनैतिक और ब्यूरो क्रेट्स के दामन उपर से नीचे तक दागदार हो गया। शर्म और सरकार के मंत्री व ब्यूरो क्रेट्स के मुँह पर तमाचा हैं। ई. सिंह बताते हैं कि लगातार पाँच सालों से राजनीति एवं समाजिक कार्यों में 10-15 सालों से सक्रिय हैं, लेकिन वैशाली की बातें आते ही राजनेताओं की बत्ती गुल हो जाती हैं।

आगे बातों के क्रम में ई. सिंह बताते है कि हमलोगों ने कुछ अलग प्लान किया हैं और कुछ ही समय में हम शिक्षा पर सही स्वरूप में काम शुरू कर रहे हैं। वैशाली हमारा घर हैं, तो पहले हम अपने घर से शिक्षा पर काम शुरू करेंगे। हमलोग सभी प्रकार की शिक्षण संस्थानों के छात्रों के साथ सीधा संवाद करेंगें। मूलरूप से राजनेताओं, सांसदों एवं विधायकों को इस मुहिम से दूर रखना है। सांसदों, विधायकों एवं प्रशासनिक अधिकारियों को जिला के लिए हमलोग आम आदमी की कमिटी बनाकर देंगें। उन्हीं कमिटियों द्वारा जो पूर्ण रूप से शिक्षाविद् और शिक्षण संस्थानों के लोगों को शामिल कर आम आदमी और छात्रों की समस्याओं से निकले समाधान पर कठोर रूप से काम करने के लिए करेंगे। अगर व्यवस्था में बैठें लोगों से काम नहीं होगा, तो हमारी संस्थाओं के माध्यम से सभी सरकारी एवं गैर सरकारी संस्थानों में छात्र हितो पर काम किया जाएगा। जिसमें हमलोग आम आदमी को साथ में रखकर काम करेंगें। करोड़ों रूपये सिर्फ़ मासिक वेतन में वैशाली जिले में जाता हैं। लेकिन शिक्षा का स्तर शिक्षा लायक शायद 10% से भी कम हैं। वहीं वैशाली जिले को एक साल में उदाहरण के तौर पर तैयार कर बिहार एवं बाद में भारत स्तर पर बदलाव के लिए हमलोग प्रयास करेंगें। ई. रविन्द्र कुमार सिंह का कहना है कि शिक्षा नीति संपूर्ण भारत में एक हो, एक ही पुस्तकों से पढ़ाई हो। एक राष्ट्र और एक शिक्षा की बातें हों एवं भाषाओं के आधार पर पुस्तकों का निर्माण हो, ताकि क्षेत्रवाद की समस्याओं का सामधा राष्ट्र को ना करना पड़े।

वहीं सर्वविदित है कि बिहार बोर्ड इंटर परीक्षा की लापरवाही का जम कर विरोध हो रहा हैं। बिहार बोर्ड इंटर परीक्षा का परिणाम मेंं व्याप्त गड़बड़ियोंं के खिलाफ राष्ट्रीय युवा गाँधी संघ के जिला अध्यक्ष नवनीत कुमार एवं जिला उपाध्यक्ष सौरव कुमार के नेतृत्व में गाँधी टोपी पहन कर एवं श्लोगन युक्त तख्तियाँँ को लिए हुए सैकड़ो छात्रों के साथ शहर के मड़ई रोड से लेकर गाँधी चौक तक बिहार सरकार के मुख्यमंत्री एवं बिहार विद्यालय परीक्षा समिति के अध्यक्ष आनंद किशोर का आक्रोशित छात्रो ने "शव यात्रा" सह अर्थी जुलुस निकाला। आंदोलित छात्रों ने जगह जगह नुक्कड़ नाटक एवं नुक्कड़ सभा के माध्यम से बिहार बोर्ड एवं बिहार सरकार की शिक्षण व्यवस्था की पोल खोल कर रख दी। राष्ट्रीय युवा गाँधी संघ के जिला अध्यक्ष ने संबोधित करते हुए कहा कि जिस राज्य में शिक्षा का स्तर सबसे निचले पायदान पर हो, छात्रों का रिजल्ट लगातार तीसरा साल विवादों मेंं हो, ऐतिहासिक संख्या मेंं छात्रों को फेल कर दिया गया हो, वहाँँ की सरकार चुप चाप बैठी हो और पुलिस से छात्रोंं पर लाठी चार्ज करवाती हो, ऐसे संवेदनहीन सरकार को हम मृत समझते है। अगर बिहार बोर्ड की कार्यशैली मेंं बदलाव नहीं आया, तो छात्र विरोधी सरकार के खिलाफ आंदोलन तेज होगा। जिला उपाध्यक्ष सौरव कुमार ने माँग करते हुए कहा कि सभी गड़बड़ियोंं को दूर कर के बोर्ड फिर से रिजल्ट प्रकाशन करें। आनंद किशोर को अध्य्क्ष पद से अविलम्ब हटाया जाए, पुरे प्रकरण का उच्यस्तरीय जांच हो, अन्यथा छात्रों एवं युवाओं का आक्रोश बढ़ता जाएगा। जिला संयुक्त सचिव संतोष कुमार एवं जिला प्रवक्ता प्रिंस कुमार ने कहा कि नीट एवं जेईई परीक्षा पास मेधावी छात्रों को बोर्ड ने फेल कर दिया गया। किसी पेपर मेंं छात्रों को अधिकतम से भी अधिक अंक आया है और किसी पेपर मेंं शून्य अंक मिला है। पुरे प्रकरण को देखा जाये तो बिहार बोर्ड की कार्यशैली से छात्रों मेंं असंतोष की भावना है और छात्रों का भविष्य अंधेरे मेंं है। इस अर्थी जुलुस मेंं राजन कुमार, सुनील कुमार चौहान, प्रो.अजित कुमार, विभीषण कुमार, रबिन्द्र कुमार सिंह, अजय कुमार गुप्ता, शशिकान्त, शिवम्, सोनू, संतोष कुमार पिन्टू, देव कुमार पोलु इत्यादि शामिल हुए।

हमारे संवाददाताओं से मिली जानकारी के अनुसार वैशाली इस वर्ष सरकार की नीतियों का पूरजोर विरोध करेगा। छात्रों से लेकर लगभग शिक्षित सामाजिक संस्थाओं द्वारा विरोध किया गया हैं। सरकार को हर बार की तरह लंबा समय देने के विचार में ना तो छात्र है, ना ही अभिभावक और ना ही सामाजिक संस्थाएँ। एक छात्र और शिक्षक को बोर्ड और सरकार के रबईयों के बीच पीसना पड़ता हैं। सरकार सिर्फ़ वादें चुनाव के समय करती हैं और पाँच साल लाठी चार्ज करती हैं। भाषणों की मार और लाठी की मार का समय समय पर तरीका नेता बदलते हैं, परंतु आम आदमी पर पहले जैसे पड़ती थी वो आज भी वैसी ही हैं। राष्ट्रीय युवा गाँधी संघ के जिला अध्यक्ष नवनीत कुमार बतातें हैं कि हर बातों के लिए अनशन और धरना प्रदर्शन सर्वेपरी नहीं हैं। व्यवस्था में बैठे राजनेताओं और ब्यूरो क्रेट्स हर बार हमें गुमराह करते हैं। लेकिन भोजन एक समय ना करों चलता हैं पर एक साल शिक्षा से खिलवाड़ पूरी जिंदगी पर छाप छोड़ती हैं। वहीं ई. रविन्द्र कुमार सिंह खुद एक अच्छी संस्थान के छात्र रहे हैं और देश कि शिक्षा व्यवस्था पर हमेंशा सवाल उठाते रहे हैं। अब ई. रविन्द्र कुमार सिंह अपने जिले के लिए नई पीढ़ीयों को हो रही समस्याओं को लेकर व्यवस्था परिवर्तन के लिए जन भागीदारी से आगे बढ़ेंगे। ई. सिंह ने बताया कि आंदोलन से आम आदमी को ही गुनेहगार बना देते हैं और हम कोर्ट कचहरी में ही लग जाते हैं। पुलिस को पैसा कमाने का हथियार मिल जाता हैं और प्राथमिकी दर्ज कर लोगों को परेशानी में डालती हैं। छात्रों पर लगातार शक्ति प्रदर्शन किया जाता हैं। छात्र मासूम हैं, उन्हें वादें की जगह शिक्षा दें। राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, सांसदों और विधायकों की सैलरी बंद हो। उनकी सुविधाएँँ बंद हो, ताकि उस पैसे से शिक्षा को मजबूती मिले। राजनीति सामाज सेवा हैं और सेवा के सैलरी की जरूरत क्यों हैं।

17-Jun-2018 11:33

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