18-Jun-2018 10:49

शिक्षा ही देश और व्यक्तित्व निर्माण का एक ही मार्ग : डाँ. रीना सिंह

किसी भी देश और समाज के जीवन में शिक्षा की भूमिका निर्णायक के महत्व की होती है।

देश का भविष्य वहां की शिक्षा, संस्कृति और संस्कार पर ही टिकी होती है।क्यों कोई देश पिछड़ा रह जाता है आर्थिक रूप से दरिद्र ,शोषित और क्यों वहाँ के निवासी सामाजिक न्याय से वंचित रहते हैं,अपने अधिकारों से दूर किस तरह की राजनैतिक प्रणाली स्वीकार करते हैं,ऐसी तमाम बातें आम आदमी को उपलब्ध शिक्षा के साथ अभिन्न रूप से जुड़ी हैं।शिक्षा के अभाव में देश देश के परिवर्तन की कल्पना करना निराधार है।आज के बच्चे ही कल के कर्णधार होंगे।देश को सुधारने एवं परिवर्तन लाने के लिए यह विचारणीय है कि शिक्षा व्यवस्था कैसी होनी चाहिए? हमारे देश की शिक्षा व्यवस्था उच्च कोटि की रही है, परन्तु वर्तमान परिदृश्य में शिक्षा व्यवस्था में दिन-प्रतिदिन गिरावट चिंता का विषय है।इस शिक्षा व्यवस्था को खोखला होने से बचाने के लिए सरकार के साथ हम सबको भी अपना उत्तरदायित्व सुनिश्चित करना होगा।।इस बात को नकारा नहीं जा सकता कि किसी भी देश को कमजोर और विघटित करने के लिए वहां की शिक्षा व्यवस्था को खोखला कर देना। आज भौतिकतावादी युग में बाज़ारवाद के बढ़ते प्रभाव के कारण शिक्षा व्यवस्था में अस्तरीयता और गिरावट बढ़ी है।शिक्षा के नाम पर शैक्षणिक संस्थानों में व्यवसाय छाया हुआ है,शिक्षा का अभाव है,बाहरी चकाचौंध ज्यादा दिखाई देता है। दिन -प्रतिदिन कुकुरमुत्तों की तरह खुल रहे स्कूलों ने शिक्षा व्यवस्था को हाशिये पर खड़ा कर दिया है।शिक्षकों की पेशागत ईमानदारी भी घटी है।व्यवसायिकता की होड़ में वे शैक्षिक प्रतिमान और मानक विघटित हो गए हैं, जिनके लिए हमारे शिक्षण संस्थान जाने जाते रहे हैं।वर्तमान शिक्षा व्यवस्था में ऊपरी दिखावे और अन्य ताम झाम के अलावा हर अवयव में स्तरहीनता दिख रही है। अब बड़ा सवाल यह है कि इस स्तरहीनता को कैसे रोका जाए ताकि शिक्षा एक अछे भविष्य के निर्माण में अग्रणी भूमिका निभा सके। पिछले कुछ समय से बाज़ारवाद के बढ़ते प्रभाव के कारण इस पेशागत ईमानदारी का ह्रास हुआ है। शैक्षणिक संस्थान और हमारी शिक्षा व्यवस्था आलोचनाओं का शिकार हुई है। शिक्षा को व्यावसायिक रूप देने के चक्कर में जहाँ शिक्षा का ह्रास हुआ ,वहीं सशक्त शिक्षा व्यवस्था एकदम लुप्त हो गयी। इस के में सामाजिक सरोकारों की यथार्थ अभिव्यक्ति भी शिक्षा से दूर होती रही।आज जो कठिनाई का सामना हम सबको करना पड़ रहा है वो सामना हमारे आने वाली पीढ़ी को न करना पड़े।

यह मानना होगा कि आज की शिक्षा व्यवस्था दोषपूर्ण है,जनजागृति का अभाव है।शिक्षा में भेड़ चाल के कारण शिक्षा व्यवस्था में छिछलापन बढ़ा है।नई शिक्षा व्यवस्था में ,दर्शन,मूल्यों और परम्पराओं की आत्मा गुम हो गयी है। शिक्षा में साहित्य एवं संस्कृति के दूर होने से अब पहले जैसी सामाजिक चिंताएं भी नहीं दिख रही हैं।।शिक्षा की सोद्देश्यता पर मानो ग्रहण लग गया है ।हम अपने परिवेश से भी लगभग कट गए हैं।इसका मुख्य कारण बाजार का दबाव और व्यवसायिकता है।भारतीय शिक्षा व्यवस्था में सुधार हो ,इसके लिए शिक्षा व्यवस्था में साहित्य और सामाजिक सरोकारों से जुड़ाव आवश्यक है। हमें शिक्षा और शिक्षा जगत से जुड़े तमाम सामाजिक व्यवस्था के रिश्तों को प्रगाढ़ बनाना होगा।

इसके लिए एक पुनर्जागरण और सम्मिलित प्रयासों की आवश्यकता है।नयी सोच के साथ नया करने का प्रयास करना होगा ।इस तरह के शिक्षा में यात्रा तो पूरी हो सकती है,किंतु इसे एक निरुद्देश्य यात्रा कहा जा सकता है।आवश्यकता इसे सोद्देश्य बनाने की है और इसके लिए शिक्षा व्यवस्था में तब्दील अपरिहार्य है।

इसके लिए कुछ बिंदु पर ध्यानपूरे देना आवश्यक है। 1--पूरे देश में 1 से 12 तक एक ही पाठ्यक्रम हो ,भाषा का माध्यम भले ही अलग हो परन्तु सम्भव हो तो एक भाषा के रूप में हिंदी अनिवार्य हो। 2--भारतीय भाषा के रूप में हिंदी अपनायी जाए ,भूमण्डलीकरण के दौर में सहायक भाषा के रूप में अंग्रेजी या अन्य भाषा भी पढ़ाई जाए ताकि सोच में बदलाव हो और विकास भी हो। 3--पाठ्यक्रम रोचक ,नए आयामों को छूता हुआ ,प्रेणादायक व आशावादी विचारों से अभिभूत हो। 4--आदर्श और यथार्थ के धरातल पर छात्रों को मनोबल देने वाली ,नेतृत्व का विकास करने वाली विश्वसनीय विषय सामग्री को पाठ्यक्रम में स्थान मिले, जिससे देश की दशा और दिशा तय हो सके। 5--भेदभाव से रहित ,वैमन्यस्ता से परे विसंगति नाशक ,श्रेष्ठ विषयवस्तु हो , जिससे शिक्षा समभाव मिल सके। 6--बुनियादी वैज्ञानिक जानकारी ,सामाजिक-राजनैतिक जीवन में जनतंत्र के जिम्मेदार नागरिक की तरह जीवन यापन करने लायक समाज विज्ञानी ज्ञान भी प्राथमिक एवं माध्यमिक शिक्षा का अनिवार्य अंग हो । 7-- नई शिक्षा नीति को तब तक सफल नहीं माना जा सकता जब तक वह स्कूली शिक्षा को वास्तविक में जनतांत्रिक नहीं बनती।

18-Jun-2018 10:49

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