20-Jan-2020 09:08

साप्ताहिक कोर्स ठीक प्रकार न समझने से क्या क्या दिक्कतें भविष्य में आती हैं

🔑 साप्ताहिक पाठ्यक्रम हमारे जीवन से जुड़ी हर समस्या के समाधान की चाबी है।

🎌 यह हमारा अनुभव है जिस प्रकार से कोई व्यक्ति जब किताब पढ़ने से पहले क्या सीखता है alphabet सीखता है क ,ख, ग सीखता है abcd सीखता है अगर उसमें से अगर वह कोई शब्द को ठीक से नहीं पहचान पाता तो आगे वह किताब पढ़ते समय वहाँ पर आकर बार - बार अटकता है, उसको ढंग से पढ़ नहीं पाता। 🎌 उसी प्रकार से जब हम कोर्स कराते हैं उसके बाद में फर्स्ट डे से ही आपके प्रश्न आने शुरु हो जाते हैं तो जो हम समाधान देते हैं, उत्तर देते हैं वह हमारा ज्ञान के आधार पर होता है। लेकिन जब तक आपने आत्मा का लेसन , परमात्मा का लेसन ठीक से नहीं किया होगा तो उस प्रश्न के उत्तर को नहीं समझ पाएंगे क्योंकि 7 डेज कोर्स सिस्टेमेटिक है। जब हम पहले आत्मा को समझेंगे तो परमात्मा को समझेंगे । आत्मा परमात्मा को समझेंगे तब अपने असली घर को समझेंगे। इन तीनों को समझने की बाद में फिर समय की पहचान होती है कि इस प्रकार से समय चलता है सतयुग ,त्रेता ,द्वापर, कलयुग उसकी पहचान होती है उसके बाद में किस प्रकार से हम सृष्टि रंगमंच पर जन्म लेते हैं तो एक-दूसरे से चैप्टर लिंक है । अगर नहीं समझते हैं तो हमारे प्रश्न खड़े रहते हैं और उसका परिणाम यह होता है कि हम हमेशा प्रश्न ही करते रहते हैं उलझे ही रहते हैं क्योंकि कोई भी सब्जेक्ट क्लियर नहीं होगा तो उसका आंसर समझ नहीं आएगा।

🎌 साप्ताहिक कोर्स को ठीक प्रकार से ना समझने के कारण ,जिन्होंने अच्छी भक्ति की हुई है जिनको भक्ति मार्ग की बहुत सारी कहानियां कथाएँ याद हैं अनेक शास्त्र पढ़े हुए हैं , वे आत्माएं इस ज्ञान को सहज प्रकार से स्वीकार नहीं कर पाती हैं।क्योंकि उनको अपने ज्ञान का तो नशा है ही लेकिन वो इस ज्ञान को ठीक रीति अगर नहीं समझते हैं आत्मा क्या, परमात्मा क्या, सृष्टि चक्र क्या, तो वे कहानियों में उलझे रहते है। श्री कृष्ण भगवान नहीं है देवता हैं , गीता का भगवान शिव है श्रीकृष्ण नहीं शिव और शंकर एक नहीं अलग हैं ये बात को आप स्वीकार नहीं कर पाएंगे इसपर भी आपको यकीन नहीं होगा। उसमें बहुत कंफ्यूज होंगे। दूसरा जो भी हमारे देवी देवता हैं जैसे हनुमान जी हैं, गणेश जी हैं,माँ दुर्गा हैं इनका वास्तविक स्वरुप क्या है? ये सब आप कोर्स पूरा करने के बाद ही समझ पाएंगे। 🎌 आत्मा से संबंधित पूर्ण ज्ञान न होने से आत्मा में निहित स्वगुणों जैसे सुख, शांति, आनंद आदि की अनुभूति नहीं कर पाते है और वे इन्हें प्राप्त करने के लिए बाहर ही भटकते रहते हैं। 🎌 परमात्मा जो सर्व गुणों, सर्व शक्तियों और कलाओं के स्त्रोत हैं उनका स्पष्ट परिचय न होने से प्राप्तियों से बहुत दूर रहते है l

🎌 ज्ञान में निश्चिय न होने से सृष्टि विनाश में लाखो वर्ष समझते हैं l इसलिए कुम्भकरण की नींद में सोए रहते हैं l पुरूषार्थ नहीं करते हैं, आध्यात्मिक जीवन का लक्ष्य नहीं बना पाते है। 🎌 योग में मन नहीं लगता है l जिससे विकर्म विनाश नहीं होते हैं और अनुभूतियाँ नहीं कर पाते हैं।परिणाम स्वरूप एकाग्रता न होने के कारण मुरली (परमात्म महावाक्य) में मन नहीं लगता है, मुरली ठीक से नही समझ पायेंगे।मुरली हमारे मन और बुद्धि का भोजन है, समझो हमारा सर्वस्व है। बाबा उसमे रोज-रोज ज्ञान की गुह्य बातें बताते ।इससे धारणा नहीं कर पाते हैं l धारणा नहीं कर पाने से संस्कारों में परिवर्तन नहीं हो पाता है। 🎌 अष्टशक्तियों का पूर्ण ज्ञान न होने से परिस्थितियों के सामने झुक जाते है और विघ्नों से झूझते रहते हैं। 🎌 यदि शिव पिता परमात्मा (भगवान) पर निश्चय नही तो ज्ञान में चलते चलते किसी परिस्थिति वश भगवान में निश्चय ना होने की वजह से ज्ञान में चलना छोड़ देंगे । लेकिन यदि शिव बाबा (भगवान)पर निश्चय हो तो जो बात समझ भी नही आ रही हो उस पर भी यही सोचेगा भगवान ने कहा है न तो सही ही होगा।कभी संकल्प विकल्प नही उठेगा। शिवबाबा पर निश्चय नहीं होने पर व्यक्ति को ड्रामा पर निश्चय नहीं हो पाता है। यदि आत्मा को सृष्टि चक्र व ड्रामा का सम्पूर्ण ज्ञान स्पष्ट नहीं है तो उस आत्मा को स्वयं को परिवर्तित करने में कठिनाई होगी, वह दूसरों पर दोषारोपण करती रहेगी और संगम के महत्व ना समझ कभी भी त्रिकालदर्शी स्थिति का अनुभव नहीं कर पाएगी।

ड्रामा का कोई सीन आने पर घबरा जायेगे। क्या ,क्यों मे अटक जायेगे। 🎌 स्वयं भगवान हमारा बाप, टीचर, सतगुरु बनकर आया हैं वो हमें सतयुग के लिए पढाई पढ़ा रहा हैं ये निश्चय नही बैठ पाता। 🎌 व्यर्थ की बातो में इंट्रेस्ट होगा।ज्ञान में नही। बुद्धि शुद्ध नही हो पाएगी।ज्ञान रत्नों को धारण नही कर पाएंगे। सबकी कमियों को निकालते रहेंगे।खुद की कमियों को नही देख ेंगे।ना ही उन्हें निकालने का पुरूषार्थ करेंगे। 🎌 पवित्र सात्विक भोजन व पवित्र रहने को भी मुश्किल समझेंगें। भगवान को जानने के बाद भी उसके मिलन का सुख नही ले सकेंगे। 🎌 ब्राह्मण जीवन की दिनचर्या ठीक से फॉलो नहीं कर पाएंगे।आत्मा को पावन बनाने का पुरुषार्थ नही करेगे। देह को ही देखकर बात करेंगे।आत्मिक स्म्रति नही होगी।आत्मा के सातों गुणों और अष्ट शक्तियों को अनुभव नही कर पाएंगे।जीवन में असंतुष्ट रहेंगे।ख़ुशी का अनुभव नही होगा।मन हमेशा अशांत रहेगा।शांति प्राप्त नहीं हो पाएगी। आनंद की अनुभूति नहीं कर पाएगे।परमात्म प्रेम की अनुभूति नहीं कर पाएगे वह आत्मा अतृप्त ही रहेंगे। 🎌 शिव बाबा से शक्ति लेना नहीं आएगा।योग में बैठेंगे तो योग लगेगा नही ।बुद्धि में व्यर्थ विचार आते रहेगे।जीवन में कुछ परिवर्तन दिखाई नहीं देगा।पुराने संस्कार से युद्ध चलेगा। 🎌 कोर्स करने का मुख्य लक्ष्य है, परमात्मा की प्राप्ति,उससे भी वंचित होंगे।ईश्वरीय जीवन का आनन्द नहीं ले पायेंगे। पुरुषार्थ का उमंग कम होगा।अलबेलापन आलस्य आयेगा। 🎌 कोर्स पूरा होने के बाद सेंटर पर मुरली सुनने नही जायेंगे। रेगुलर स्टूडेंट नही बनेगें। योग भी नहीं करेंगे। दुनिया की बातों को सुन कर कन्फ्यूज़ हो जाते हैं।उन्हें अपने में कोई बदलाव दिखाई नही देने से उनका उमंग उत्साह समाप्त हो जाता हैं l इससे वे असंतुष्ट रहने लगते हैं और धैर्य खो बैठते हैं l और सागर तक पहुँच कर भी प्यासे लौट जाते हैं l उन आत्माओं का यह कदम उनके लिए एक ऐसी क्षति है जिसकी पूर्ति नहीं की जा सकती। 🎌 कई ऐसे भी ज्ञान में चलने वाले हैं। जिन्हें कोर्स करे 10 साल हो गए 20 साल हो गए लेकिन अगर उन्होंने ज्ञान के सिद्धांतों को 7 डेज कोर्स को अच्छे से नहीं किया होगा तो वो आत्माएं बीच में रहती है एक प्रकार से वह बाबा-बाबा भी कहती हैं और एक प्रकार से उनके अंदर शिव बाबा क्या है, exact उसका स्वरूप क्या है, वह नहीं समझ पाती हैं। 🎌 उनके जो भक्ति के संस्कार है वो बने रहते हैं और सबसे बड़ी बात कि जो भी घटना हमारे साथ होती हैं उनको हम समझ नहीं पाते हैं कि हमारा क्या रोल है उसमें तो हम दूसरों को दोषारोपण करते हैं।भगवान को भी दोषारोपण कर देते हैं कि भगवान ने ऐसा किया। ज्ञान में आने के बाद अगर नहीं समझा है। तो हम 50- 50 हो जाते हैं। "Little knowledge is dangerous thing" 🎌 इसलिए हमारा सभी से यही अनुरोध है कि इस ज्ञान को अगर समझना है तो फंडामेंटल को समझना है। हिज तरह से सच्चे दिल से भक्ति की है तो ज्ञान को भी अच्छे से समझे । सात दिन का जो कोर्स है उसको कम से कम सात बार रिपीट करें, सात बार समझें। तो वो अच्छी तरह से समझ में आएगा। तो इस प्रकार ज्ञान को समझे तो आप सही रीति इसे धारण कर पाएंगे।

20-Jan-2020 09:08

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