24-Dec-2019 10:46

NEET 2020: सुपर स्पेशियलिटी की सीटें भरने के लिए बढ़ेंगे विकल्प!

एमडी, एमएस, डीएम और एमसीएच सुपर स्पेशियलिटी कोर्सेज में 11 और 13 ब्रांच होती है। एमडी में 11 और एमसीएच में 13 ब्रांच।

NEET Super Speciality: राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET - National Eligibility cum Entrance Test) सुपर स्पेशियलिटी परीक्षा पास करने वाले अभ्यर्थियों के लिए अच्छी खबर है। अब कॉलेजों में दाखिले के लिए उन्हें ज्यादा विकल्प दिए जाएंगे। अब तक नीट सुपर स्पेशियलिटी पास करने वाले अभ्यर्थियों को सिर्फ दो विकल्प दिए जाते हैं। जबकि एमडी, एमएस, डीएम और एमसीएच सुपर स्पेशियलिटी कोर्सेज में 11 और 13 ब्रांच होती है। एमडी में 11 और एमसीएच में 13 ब्रांच।

बताया गया है कि एमडी, एमएस, डीएम और एमसीएच की सीटें भरने के लिए अभ्यर्थियों को अधिक विकल्प दिए जाएंगे। इस संबंध में उत्तर प्रदेश के एक कार्डियोलॉजी इंस्टीट्यूट के निदेशक प्रोफेसर विनय कृष्णा ने मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (MCI) के सेक्रेटरी जनरल के समक्ष यह मांग उठाई है। मेडिकल कॉलेज प्रबंधन इस संबंध में एमसीआई को प्रस्ताव भी भेज चुका है। प्रोफेसर कृष्णा ने कहा कि अगर विकल्प अधिक रहेंगे तो सुपर स्पेशियलिटी की सारी सीटें भर जाएंगी। अभी बहुत सीटें खाली रह जाती हैं। अभ्यर्थी जो दो विकल्प भर देते हैं, उन ब्रांचों के अलावा उन्हें कहीं मौका नहीं मिल पाता।

इस पर सेक्रेटरी जनरल डॉ. वत्स ने कहा कि इसके लिए प्रश्न पत्रों में भी बदलाव किए जाएंगे। अभी एमएस और एमसीएच के लिए अलग-अलग प्रश्न पत्र होते हैं। तैयारी चल रही है कि इनका एक ही प्रश्न पत्र हो, जिसमें सभी स्पेशियलिटी के सवाल रहेंगे। हालांकि उन्होंने बताया कि किसी भी बदलाव को लागू करने के लिए छात्रों को एक साल का समय देना होता है। इस वजह से यह व्यवस्था वर्ष 2021 में लागू हो पाएगी।

प्रोफेसर कृष्णा ने कहा कि अगर विकल्प अधिक रहेंगे तो सुपर स्पेशियलिटी की सारी सीटें भर जाएंगी। अभी बहुत सीटें खाली रह जाती हैं। अभ्यर्थी जो दो विकल्प भर देते हैं, उन ब्रांचों के अलावा उन्हें कहीं मौका नहीं मिल पाता। इस पर सेक्रेटरी जनरल डॉ. वत्स ने कहा कि इसके लिए प्रश्न पत्रों में भी बदलाव किए जाएंगे। अभी एमएस और एमसीएच के लिए अलग-अलग प्रश्न पत्र होते हैं। तैयारी चल रही है कि इनका एक ही प्रश्न पत्र हो, जिसमें सभी स्पेशियलिटी के सवाल रहेंगे। हालांकि उन्होंने बताया कि किसी भी बदलाव को लागू करने के लिए छात्रों को एक साल का समय देना होता है। इस वजह से यह व्यवस्था वर्ष 2021 में लागू हो पाएगी।

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