02-Jun-2018 10:41

इंजनीयरिंग के साथ ही शिक्षा-फैशन और सामाजिक क्षेत्र में सशक्त पहचान बनायी किरण शोभा ने

वक़्त से लड़कर जो अपना नसीब बदल दे, इंसान वही जो अपनी तकदीर बदल दे, कल क्या होगा कभी ना सोचो, क्या पता कल वक़्त खुद अपनी लकीर बदल दे।

साफ्टवेयर इंनीनियर और पूर्व मिसेज इंडिया बॉडीफिट 2016 किरण शोभा  आज के दौर में न सिर्फ फैशन इंडस्ट्री की दुनिया में धूमकेतु की तरह छा गयी हैं गये हैं बल्कि  शिक्षा और सामाजिक दुनिया के क्षितिज पर भी सूरज की तरह चमक रही हैं। उनकी ज़िन्दगी संघर्ष, चुनौतियों और कामयाबी का एक ऐसा सफ़रनामा है, जो अदम्य साहस का इतिहास बयां करता है। किरण शोभा ने अबतक के अपने करियर के दौरान कई चुनौतियों का सामना किया और हर मोर्चे पर कामयाबी का परचम लहराया।किरण शोभा को अभी हाल ही में "यूथ आइकॉन अवार्ड 2018" से सम्मानित किया गया है। देश की प्रतिष्ठित संस्था "नेशनल ह्यूमन वेलफेयर कॉउन्सिल" ने हरियाणा के गुरुग्राम (गुड़गांव) में किरण शोभा को यूथ आइकॉन अवार्ड से सम्मानित किया है।         बिहार के बक्सर जिले के मुसाफिर थाना के इटाढ़ी रोड की रहने वाली किरण शोभा के पिता श्री जयनाथ सिंह और मां श्रीमती रजनी देवी बेटी किरण को डॉक्टर या इंजनीयर बनाना चाहते थे। किरण ने मैट्रिक और इंटरमीडियट की पढ़ाई पश्चिम बंगाल के बागडोगरा से की।माता-पिता की आज्ञा को सिरोधार्य मानते हुये किरण ने उत्तर प्रदेश के मेरठ ने इंजीनीयरिंग की पढ़ाई 2005 में पूरी की। इसके बाद किरण वर्ष 2007 में भुवनेश्वर में साफ्टवेयर के क्षेत्र में अग्रणी इंफोसिस में बतौर इंजीनियर काम करने लगी।।वर्ष 2007 में किरण शोभा शादी के अटूट बंधन में बंध गयी। उनके पति  श्री तरूण शर्मा जाने माने बिजनेस मैन हैं जो उन्हें हर कदम सर्पोट करते हैं। जहां आम तौर पर युवती की शादी के बाद उसपर कई तरह की बंदिशे लगा दी जाती है लेकिन किरण शोभा के साथ ऐसा नही हुआ। किरण के पति के साथ ही ससुराल पक्ष के लोगों उन्हें हर कदम सर्पोट किया।  कुछ कर गुजरने का जज्बा हो तो कोई भी काम नामुमकिन नहीं। इस बात को साबित कर दिखाया है किरण शोभा ने  ।         जिंदगी में कुछ पाना हो तो खुद पर ऐतबार रखना         सोच पक्की और क़दमों में रफ़्तार रखना         कामयाबी मिल जाएगी एक दिन निश्चित ही तुम्हें         बस खुद को आगे बढ़ने के लिए तैयार रखना।   किरण शोभा यदि चाहती तो विवाह के बंधन में बनने के बाद एक आम नारी की तरह जीवन गुजर बसर कर सकती थी लेकिन वह खुद की पहचान बनाना चाहती थी। किरण शोभा ने इंफोसिस में काम करना जारी रखा। किरण शोभा ने इंफोसिस के बाद आइबीएम ,एचसीएल जैसी कई कंपनियों में उच्चअधिकारी के तौर पर काम किया।

        जुनूँ है ज़हन में तो हौसले तलाश करो मिसाले-आबे-रवाँ रास्ते तलाश करो ये इज़्तराब रगों में बहुत ज़रूरी है उठो सफ़र के नए सिलसिले तलाश करो         किरण शोभा सामाजिक और शिक्षा के क्षेत्र में भी काम करना चाहती थी। इसी को देखते हुये उन्होंने वर्ष 2014 में पर्यावरण और शिक्षा के क्षेत्र में काम करने शुरू किये। किरण शोभा अपनी व्यस्त जीवनशैली से समय निकालकर समाजसेवा में भी अपना पूरा योगदान देती हैं। किरण शोभा का का कहना है कि समाज के विकास में शिक्षा का महत्वपूर्ण योगदान होता है इसलिए जरूरी है कि समाज के सभी लोग शिक्षित हो। शिक्षा ही विकास का आधार है। समाज के लोग ध्यान रखें कि वह अपने बेटों ही नहीं बल्कि बेटियों को भी बराबर शिक्षा दिलवाएं।वर्तमान परिप्रेक्ष्य में शिक्षा की महत्ता सर्वविदित है. स्पष्ट है कि सामाजिक सरोकार से ही समाज की दशा व दिशा बदल सकती है। किरण शोभा ने 14 गरीब बच्चों की पढ़ाई का बीड़ा उठाया है।     आज बादलों ने फिर साज़िश की     जहाँ मेरा घर था वहीं बारिश की     अगर फलक को जिद है ,बिजलियाँ गिराने की     तो हमें भी ज़िद है ,वहि पर आशियाँ बनाने की

        वर्ष 2016 किरण शोभा के जीवन में अहम पड़ाव लेकर आया। किरण शोभा ने दिल्ली में हुये मिसेज इंडिया प्रतियोगिता में हिस्सा लिया और मिसेज इंडिया बॉडीफिट का ताज अपने नाम कर लिया। इसके बाद किरण शोभा ग्रेट अचीवर अवार्ड , नेशन प्राइड अवार्ड , हयूमेन अचीवर अवार्ड समेत कई पुरस्कारों से नवाजी जा चुकी है। किरण शोभा आज  कामयाबी की बुलंदियों पर है।किरण अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता ,सास श्रीमती सरस्वती देवी , ससुर रिटायर्ड तहसीलदार श्री गंगा दत्त शर्मा के साथ ही अपने शुभचितंको को देते है जिन्हें हर कदम उन्हें सपोर्ट किया है। किरण अपने पति तरूण शर्मा को रियल हीरो मानती है उन्हें याद कर गुनगुनाती है , मिले हो तुम हमको बड़े नसीबों से चुराया है मैंने किस्मत की लकीरों से , सदा ही रहना तुम मेरे करीब होके चुराया है मैंने किस्मत की लकीरों से।

किरण शोभा युवाओं की रोल मॉडल बन गयी है। वह उन्हें मोटिभेट करते हुये कहती है             टूटने लगे हौसले तो ये याद रखना,                 बिना मेहनत के तख्तो-ताज नहीं मिलते,                 ढूंढ़ लेते हैं अंधेरों में मंजिल अपनी,                  क्योंकि जुगनू कभी रौशनी के मोहताज़ नहीं होते…

02-Jun-2018 10:41

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