20-Jun-2018 01:21

फैशन के साथ ही सामाजिक सरोकार से भी जुड़ी है ममता रॉय

चले हैं जिस सफ़र पर उसका कोई अंजाम तो होगा         जो हौंसला दे सके ऐसा कोई जाम तो होगा,         जो दिल में ठान ही ली है कामयाबी को अपना बनाने की         तो कोई न कोई इंतजाम तो होगा।

    अपनी हिम्मत और लगन के बदौलत ममता रॉय ने न सिर्फ फैशन के क्षेत्र में बल्कि सामाजिक क्षेत्र में भी अपनी अलहदा पहचान बनाने में कामयाब हुयी है लेकिन इन कामयाबियों को पाने के लिये उन्हें अथक परिश्रम का सामना भी करना पड़ा है।

    झारखंड की लौह नगरी जमेशेदपुर शहर में वर्ष 1983 में जन्मी ममता रॉय के पिता श्री शिवशंकर राय और मां श्रीमती मंजुला रॉय घर की बड़ी बेटी को डॉक्टर बनाने का ख्वाब देखा करते थे। बचपन के दिनों से ही ममता रॉय की रूचि गीत-संगीत और डांस के प्रति थी और वह स्टार बनने का ख्वाब देखा करती थी। ममता रॉय स्कूल और कॉलेज में होने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रमों में डांस और अभिनय किया करती और इसके लिये उन्हें काफी सराहना मिलती। वर्ष 2003 में ममता रॉय की शादी पटना शहर के खगौल के लखानीबिगहा मुहल्ला निवासी श्री अभय सिंह के साथ हो गयी और वह राजधानी पटना आ गयी।

        ममता रॉय के पति उन्हें हर कदम सर्पोट करते हैं। जहां आम तौर पर युवती की शादी के बाद उसपर कई तरह की बंदिशे लगा दी जाती है लेकिन ममता रॉय के साथ ऐसा नही हुआ। ममता के पति के साथ ही सास रामरानी देवी ने उन्हें हर कदम सर्पोट किया। ममता रॉय को पढ़ने में काफी रूचि रही है और इसी को देखते हुये उन्होंने शादी के बाद भी अपनी पढ़ाई जारी रखी और स्नातक की पढ़ाई पूरी की। शादी के बाद ममता रॉय पारिवारिक जिम्मेवारियों में बंध गयी। ममता राय के दो बच्चे त्रुशला सिंह और अदभ्य सिंह है जो उन्हें काफी सपोर्ट करते हैं।           कामयाबी के सफ़र में मुश्किलें तो आएँगी ही         परेशानियाँ दिखाकर तुमको तो डराएंगी ही,         चलते रहना कि कदम रुकने ना पायें         अरे मंजिल तो मंजिल ही है एक दिन तो आएगी ही।

        ममता रॉय को समाज सेवा में भी गहरी रूचि थी। ममता रॉय महिला सशक्तीकरण को बढ़ावा देना चाहती थी और इसी को देखते हुये वह वर्ष 2015 में महिला सशक्तीकरण की दिशा में काम करने वाली दैनिक जागरण संगिनी क्लब से जुड़ गयी जहां उनकी काबलियत को देखते हुये उन्हें बाद में उपाध्यक्ष भी बनाया गया। ममता रॉय का मानना है अब जरूरत है महिलाओं को सशक्त बनाने की ,अब हर किसी को जगना होगा, और सबको जगाना होगा बहुत खो लिया नारी ने, अब उसे उसका हक दिलाना होगा स्त्रियों को खुद इसकी शुरुआत करनी होगी स्त्रियों को खुद, स्वयं को आगे बढ़ाना होगा उम्मीद है जल्द हीं हालात बदलेंगे उम्मीद है अब वक्त करवट लेगा और नहीं रहेगी किसी स्त्री के चेहरे पर शिकन।         वक़्त आने दे दिखा देंगे तुझे ऐ आसमाँ         हम अभी से क्यूँ बताएँ क्या हमारे दिल में है         ममता रॉय मॉडलिंग और फैशन की दुनिया में अपनी पहचान बनाना चाहती थी। वर्ष 2018 में ममता रॉय ने जमशेदपुर में हुये मिसेज बिहार में हिस्सा लिया विजेता का ताज अपने नाम कर लिया। ममता रॉय का का मानना है कि जिंदगी में कुछ पाना हो तो खुद पर ऐतबार रखना ,सोच पक्की और क़दमों में रफ़्तार रखना कामयाबी मिल जाएगी एक दिन निश्चित ही तुम्हें ,बस खुद को आगे बढ़ने के लिए तैयार रखना। इसके बाद ममता रॉय ने गोआ में हुये मिसेज इंडिया आईएमपी में हिस्सा लिया और मिसेज इंडिया फिटनेस क्वीन और मिसेज इंडिया टूरिज्म वर्ल्ड वाइड फर्स्ट रनर अप का खिताब अपने अपने नाम कर लिया।         ममता रॉय के मिसेज इंडिया फिटनेस क्वीन और मिसेज इंडिया टूरिज्म वर्ल्ड वाइड फर्स्ट रनर  बनने के बाद बिहार की मॉडलस उन्हें प्रेरणाश्रोत मानते हुये उनके नक्शे कदम पर चलना चाहती है। ममता रॉय ने बताया कि वह जल्द ही राजधानी पटना में एक इंस्टीच्यूट खोलेंगी जिनके जरिये वह मॉडलस की ग्रुमिंग करेंगी।ममता रॉय ने कहा कि आज फैशन के प्रति हमें सोच को बदलने की जरुरत है।फैशन शो के द्वारा हम अपने कला को कपड़ों के माध्यम से प्रदर्शित करते है। फैशन हमारे जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा है। ये हमें समाज में एक अलग पहचान दिलाता है।         वाक़िफ़ कहाँ ज़माना हमारी उड़ान से         वो और थे जो हार गए आसमान से      रेशम फैशन एंड ज्वैलरी प्राइवेट लिमिटेड और अनुमाया ह्यूमन रिसोर्स फाउंडेशन के सौजन्य से राजधानी पटना के गंगा रिसोर्ट में फैशन और मॉडलिंग हंट शो मिस एंड मिसेज फैशनिस्टा (नार्थ इंडिया) का क्राउन लांच किया गया। इस अवसर पर पिंकशी फाउंडेशन के सौजन्य से 15 महिलाओं को उनके  उल्लेखनीय योगदान को देखते हुये पिंकशी पावर वुमेन अवार्ड से सम्मानित किया गया। ममता रॉय को फैशन के क्षेत्र उनके उल्लेखनीय योगदान को देखते हुये पिंकशी अवार्ड से नवाजा गया है। अपने मकसद में कामयाबी हासिल करने के लिए ….ताकत से ज्यादा हिम्मत की ज़रूरत होती है।ममता रॉय हाल ही में स्वयं सेवी संगठन भर ले उड़ान की ओर से सशक्त महिला सम्मान से नवाजी गयी।         ज़िन्दगी की असली उड़ान अभी बाकी है,         ज़िन्दगी के कई इम्तेहान अभी बाकी है,         अभी तो नापी है मुट्ठी भर ज़मीं हमने,         अभी तो सारा आसमान बाकी है...         ममता रॉय को कई फिल्म और टीवी सीरियल में काम करने के प्रस्ताव मिल रहे है लेकिन वह फैशन और सामाजिक क्षेत्र में ही काम करना चाहती है।ममता रॉय ने बताया कि वह अपनी कामयाबी का पूरा श्रेय अपने पति को देती है जिन्होंने उन्हें हमेशा सपोर्ट किया है।ममता रॉय अपने पति को रियल हीरो मानती है उन्हें याद कर गुनगुनाती है , मिले हो तुम हमको बड़े नसीबों से चुराया है मैंने किस्मत की लकीरों से , सदा ही रहना तुम मेरे करीब होके चुराया है मैंने किस्मत की लकीरों से।

20-Jun-2018 01:21

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