26-Sep-2019 11:35

ब्रह्मार्षि महाकुंभ में डूबकी लगाने 5 लाख भूमिहार ब्राह्मण 7 नवम्बर को गांधी मैदान की यात्रा पर : आश

आने वाला पीढ़ी आपसे एक सवाल जरूर करेगा, 7 नवम्बर ब्रह्मार्षि महाकुंभ में आपका योगदान क्या था...? आइये मिलकर इतिहास रचे ..

पूरे भारत में जातिगत सम्मेलनों से कोई भी राज्य अछूता नहीं रहा है। हर जाति के लोगों का पिछले सात दशकों में सड़क पर उतर कर अपने हक की लड़ाई लड़ते रहे और ऐसे हक की लड़ाई लड़ी, जिससे पूरा भारत लड़ने लायक आज नहीं बचा। आज भारत की स्थिति को अगर ध्यान से देखा जाए तो आप पाएंगे की जातिगत पैदा करने में उदंड राजनेताओं का बहुत बड़ा योगदान रहा है। और ऐसे जातिगत राजनेता देश में सर्वोच्च स्थान पर बने रहे हैं और आज भी जाति धर्म के नाम पर अपना कुनबा बनाकर लोगों को टुकड़े टुकड़े में बांट दिया है। वही आप देखेंगे, कि छोटी-छोटी जातिगत इकाइयां इतनी बड़ी होती जा रही है, जिसका प्रतिफल यह है कि देश के सर्वोच्च पदों पर बैठे हुए राष्ट्रीयाध्यक्ष द्वारा जाति और धर्म की चर्चा लगातार करते रहते हैं। और करने के साथ ही आते है देश के युवाओं को गुमराह भी बड़े स्तर पर करते हैं। कोई नई बात नहीं चल रही है इस देश में। यह परंपरा लगातार और निरंतर सात दशकों से बढ़ाई जा रही है। वह कौन लोग हैं जिन्होंने जातिगत, धर्मवाद कि इस देश में नींव रख डाली। तो आप देखेंगे आजादी के समय से लेकर ही विपक्ष में बैठे हुए लोगों ने जाति और धर्म की खेती सुनियोजित तरीके से आयोजित किया। और जिसका प्रतिफल आज यह है देश बचाने के लिए, राष्ट्र की गरिमा को बनाए रखने के लिए, देश की अखंडता को बचाने के लिए, पहली बार ब्रह्मर्षि समाज द्वारा एक जातिगत सम्मेलन का आयोजन कर राष्ट्रवादिता को मजबूती प्रदान करेगी।

30 अगस्त 2019 को पटना के कृष्ण मेमोरियल हॉल में जब भूमिहार ब्राह्मण एकता मंच के बैनर तले पूरे बिहार के अलावा 14 राज्यों से जब लोगों का आगमन हुआ, तो राजनीतिक गलियारों में एक अजब सी गुनगुन आहट शुरू हो गई। एक ऐसी गुनगुन आहट जो भारत के निर्माण में अपनी भूमिका को लेकर एक नए स्वरूप में राजनीति की नींव का संकेत दे रही हैं। यह बहुत ही दुखदाई वक्त दिखता है जब सदियों से बनी आ रही परंपरा को एक नया नवयुवक आकर राजनीति की नई परिपाटी लिखने की कोशिश कर सफलता पा रहा है। यह भूमिहार ब्राह्मण समाज एकसाथ होकर इस देश को मजबूर कर देगा। और इसके साथ चलने वाले एक ऐसा समाज जो पूर्णरूपेण सरकार से लेकर सत्ताभोगी और सत्ताधारीओं के बीच बुद्धिजीवी कह जाते हैं, उनकी नींदे उड़ रही है। क्यों ना हो, उनकी नींदे, जब उनकी सोच और मानसिकता इतनी संकीर्ण हो चली है कि वह देश भक्ति और देश की जनता में अंतर कर आगे बढ़ना चाह रहे हैं। राष्ट्रवादीता एक विचार है और राष्ट्रवादी तत्व भी जीवित रह सकती है, जब भारत की आम जनता जीवित रहेगी।

भारत आज आरक्षण जैसी अभिशाप के कारण हजारों वर्ष पीछे चल रहा है और जिसका खामियाजा सिर्फ भारत को भुगतना है। वह लोग जो जाति और धर्म के नाम पर अपना दुकान चला रहे हैं, उनके लिए आने वाला वक्त उनसे मुंह फेर लेगी। तो इसमें कोई बड़ी बात ना होगी कि राजनीतिक दलों द्वारा जो बीज रोपा गया, इस देश में वही काटने का उनका वक्त आ रहा है। देश की जनता अगर अभी नहीं समझी तो भारत की स्थिति को समझ पाने की स्थिति में खुद भारत ना होगा। भूमिहार ब्राह्मण एकता मंच के माध्यम से पहली बार भूमिहार ब्राह्मण समाज एक ऐतिहासिक एकजुटता के लिए पटना के गांधी मैदान में आ रहे हैं। यह पीढ़ी दर पीढ़ी सामाजिक संरचनाओं को मजबूत करने वाले इकाइयों को आगे बढ़ाने का वक्त है। इसको लेकर मजबूती के साथ भूमिहार ब्राह्मण एकता मंच अपने समाज को लेकर, एकजुट होकर, भारत का आर्थिक, मानसिक, शारीरिक मजबूती के लिए काम करेगी। आने वाला वक्त भारत एक लोकतांत्रिक रूप से सुदृढ़ राष्ट्र होगा, जिसका प्रतिफल होगा कि भारत की 100% आबादी को शत प्रतिशत योजनाओं का लाभ मिलेगा। जिसमें जाति, धर्म, समुदाय, क्षेत्रवाद की गुंजाइश नहीं रहेगी।

उपर्युक्त बातों को कहते हुए, भूमिहार ब्राह्मण एकता मंच फाउंडेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष आशुतोष कुमार कहते हैं कि यह बहुत आसान डगर ना है। फिर भी बहुत हिम्मत मिलती है, जब अपने समाज के लोगों के बीच में जाने के बाद वह घर से आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करते हैं। हमें एकजुट होकर ना सिर्फ अपने समाज की बात रखनी है, बल्कि देश के लिए उसकी अखंडता के निर्माण में हमारी भूमिका एक महत्वपूर्ण जगह बनाई हुई है। उसे बरकरार रखते हुए, हम अपने समाज को आगे ले जाने का प्रयत्न करेंगे। आशुतोष कहते हैं कि जब हमने शुरू किया था, तो कारवा बहुत छोटा था। लेकिन आज वही कारवां बहुत बड़ा हो गया है। और जिसका प्रतिफल पूरा बिहार ही नहीं, पूरा हिंदुस्तान देखेगा। जब गांधी मैदान 7 नवंबर 2019 को खचाखच भरी होगी और लगभग 5 - 7 लाख लोगों के बीच ब्रह्मर्षि समाज का आगमन होगा। तब जाकर पूरे भारत की राजनीति उसमें समाहित होते हुए दिखाई देगी। इसलिए हम अपने सभी साथियों से निवेदन करते हैं 7 नवंबर 2019 को आप किसी भी प्रकार से अपने पूरे परिवार के साथ पटना के गांधी मैदान में पहुंचे, ताकि समाज को और मजबूती मिले। गांधी मैदान भरना होगा, लेकिन उस में आने वाले लोग, उनकी एकता, कठोरता, समाज को एक नई दिशा देने का काम करे यह संकल्प भी हो। इसलिए समाज के सभी लोगों से निवेदन है कि आप सभी लोग 7 नवंबर 2019 को पटना के गांधी मैदान में आने की कृपा करें। यह हमारी खुद की लड़ाई या हमारे समाज की लड़ाई नहीं है बल्कि यह लड़ाई लोकतांत्रिक व्यवस्था को दुरूस्त करने की भी हैं। और जिसे हम पूरा करके रहेंगे, यही संकल्प ले।

26-Sep-2019 11:35

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