15-Aug-2019 09:59

आरक्षण मुक्त भारत से ही भारत का विकास संभव: आशुतोष कुमार

आरक्षण भारत माता के पूरे शरीर पर कोढ़ रूपी अभिशाप के रूप में मढ़ा हुआ हैं

लगातार भाजपा की सरकार द्वारा राष्ट्रवाद पर जो काम किया जा रहा है, वह काबिले तारीफ है। हम इसकी भूरी भूरी प्रशंसा करते हैं और उनके राष्ट्रवादी विचार धाराओं के साथ हमेशा खड़े हैं। हम चाहते हैं कि भारत का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जिस तरीके से देश के विकास के लिए काम कर रहे हैं, उसी तरीके से राष्ट्रवादी विचारों को ध्यान में रखते हुए, भारत को तात्कालिक रूप से आरक्षण मुक्त कर दे। आरक्षण भारत माता के माथे पर कश्मीर से भी बड़ा कलंक हैं। कश्मीर भारत का एक छोटा सा हिस्सा जो हमारे मस्तक का शोभा बढ़ाता रहा है। लेकिन पूरे शरीर पर जो घाव आरक्षण रूपी डाला गया है, वाह घाव बहुत महत्वपूर्ण है कि जल्द से जल्द खत्म कर दिया जाए।आरक्षण के कारण ना जाने कितने भारत माता के सपूत जो देश हित में कितने काम कर सकते थे, वह कहीं आज गुमनामी में जी रहे। उनके सपने राष्ट्रवादी का से हटकर कहीं, गली-कुची में बैठकर एक सामान्य जिंदगी जीने को मजबूर होंगे।

भूमिहार ब्राह्मण एकता मंच यह चाहती है कि एक समान अधिकार पूरे भारत को प्राप्त हो। जाति, धर्म, समुदाय के नाम पर किसी प्रकार का विच्छेद ना हो। यह बहुत बड़ा अभिशाप है कि हम क्षेत्रवाद, धर्मवाद, जातिवाद एवं अनेक विधाओं से बंटे हुए हैं। लेकिन यह भारत माता की रक्षा, सुरक्षा एवं माथे पर एक कलंक जैसा आरक्षण मढ़ा हुआ हैं। इसके लिए सबसे पहले आरक्षण जैसे विशाल घाव भारत माता के शरीर से हटा दिया जाए। हम भारत माता के सपूत हैं और भारत की तरक्की हमारी सबसे महत्वपूर्ण लक्ष्यों में से रहा है। जिसके लिए हम सभी सदैव प्रयास करते रहते हैं। लेकिन सारी परेशानियों के साथ हम विकास की रफ्तार को गति नहीं दे पा रहे हैं और गति नहीं दे पाने का कारण समाज के पैरों में जंजीर बांधी गई है। हम भारत के संविधान में आस्था रखते हैं और आस्था रखने के कारण आह्वान करते हैं कि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी अपने विशाल हृदय से एक विशाल काम करने का प्रयास करें।

हम आजादी की पूर्व संध्या पर यह आह्वान करते हैं कि आने वाले समय में यानी स्वतंत्रता दिवस की 73वीं दिवस पर भारत को भारत के प्रधानमंत्री के द्वारा एक बड़ा सौगात आरक्षण मुक्त भारत का प्राप्त होगा। अगर यह होता है तभी यह माना जा सकता है, वाकई भारत के विकास के लिए भारत का प्रधानमंत्री पद पर हैं। अभी तक जो भी भारत के प्रधानमंत्री के द्वारा कदम उठाए गए हैं, वह सराहनीय है। और इसको और मजबूत करने की जरूरत है। हमारा प्रयास होता है कि हम अपने पूर्वजों का सम्मान करें। अपने बड़ों का आदर करें, जिसको लेकर हम सब सदैव तत्पर रहते हैं। आरक्षण को लेकर लगातार बातें होती रहती हैं, लेकिन आरक्षण को लेकर जो राजनीति खेली जाती है। वह भारत माता के लिए शुभ संकेत नहीं है। राजनीतिक दल अपनी नाकामयाबी को छुपाने के लिए राजनीति के साथ आरक्षण का ढाल लेकर चल रहे हैं।

आज भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लोगों को यह आशा रहती है कि वो "सबका साथ, सबका विकास, एवं सबका विश्वास"। यह बातें तभी संभव हो पाएगी, जब भारत का प्रधानमंत्री भारत को आरक्षण मुक्त करें। जिस तरीके से भारत के प्रधानमंत्री लगातार पूर्व प्रधानमंत्रियों पर हमले करते हैं, उनकी कमियों को जनता के बीच रखते हैं, तो इससे यह स्पष्ट होता है कि अभी तक जो भी प्रक्रिया हुई है, वह सुखद नहीं हैं। अगर पूर्व प्रधानमंत्री नेहरू ने कोई भी गलती कि वह आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी यह कह कर सुधारते कि यह अभिशाप है। पूरे देश के माथे पर यह छाप छोड़ दिया है कि नेहरू ने पटेल को अलग कर धारा 370 एवं 35 ए लगाया। जो बहुत ही बड़ा कलंक था। भारत जिसे आपने हटा दिया। तो उसी तरीके एक बहुत बड़ा कलंक है जो आरक्षण के रूप में भारत पर एक बोझ है। आरक्षण भारत की किसी एक क्षेत्र में नहीं है बल्कि भारत के संपूर्ण राज्य पर लागू होता है। और राष्ट्र की तरक्की में बहुत बड़ी बाधा के रूप में आरक्षण रूपी अभिशाप लगातार जारी है। इसका समाधान हो और आरक्षण अगर रखना है तो आर्थिक रूप से इसे लागू किया जाए।

15-Aug-2019 09:59

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