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27-Dec-2019 10:30

पंचायत चुनाव कार्यक्रम को लेकर सतीश पूनिया ने उठाए सवाल, लगाया गहलोत सरकार पर यह आरोप

राठौड़ ने कहा कि 15 नवम्बर 2019 की अधिसूचना से पुर्नगठन के बाद अस्तित्व में आई 11 हजार 142 ग्राम पंचायतों में से मात्र 9 हजार 171 ग्राम पंचायतों के चुनाव की घोषणा करना और बाकी रही लगभग 1 हजार 971 ग्राम पंचायतों के चुनाव अधर में छोड़ना पंचायतीराज को कमजोर क

जयपुर: राजस्थान में निर्वाचन आयोग ने अभी सिर्फ ग्राम पंचायतों के चुनाव की घोषणा की है. जबकि पंचायतीराज में पंचायत समिति और ज़िला परिषद के चुनाव भी अपेक्षित थे. चुनाव के कार्यक्रम के ऐलान के साथ ही बीजेपी ने सरकार पर सवाल उठाना शुरू कर दिये हैं. प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनिया ने आशंका जताते हुए कहा कि सरकार इन चुनाव के बाद ज़िला परिषद और पंचायत समिति के चुनावों के दौरान सरपंचों पर दबाव बनाकर अपने पक्ष में माहौल बनाने की कोशिश कर सकती है.

उन्होंने चुनाव कार्यक्रम को आधा-अधूरा बताते हुए कहा कि यह किसी षड्यंत्र के हिस्से की तरह दिख रहा है।भारतीय जनता पार्टी के प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनिया ने पंचायत चुनाव के कार्यक्रम पर सवाल उठाये हैं. पूनिया ने कहा कि राज्य निर्वाचन आयोग ने सरकार के दबाव में आकर चुनाव की घोषणा की है. उन्होंने कहा कि पंचायत चुनाव के इतिहास में पहली बार हुआ है कि पंच-सरपंच के चुनाव की तिथि घोषित हो गई और पंचायत समिति सदस्य और जिला परिषद सदस्यों के चुनाव का कोई अता-पता ही नहीं है. पूनियां ने कहा कि कांग्रेस की डरी हुई सरकार चुनाव की तिथि को आगे बढ़ाना चाहती है. उसके लिये वो कोर्ट का सहारा लेना चाहती है. उच्चतम न्यायालय में अभी अवकाश चल रहा है, इसलिए सरकार को समय देने के लिये चुनाव आयोग ने इस तरह की आधी-अधूरी घोषणा की है।

सतीश पूनिया ने कहा कि हालांकि चुनाव आयोग स्वतंत्र निकाय माना जरूर जाता है, लेकिन षड्यंत्र के आधार पर कांग्रेस सरकार काम कर रही है. वह प्रदेश की जनता के साथ धोखा है। इस घोषणा में सरकार की रणनीति की छाया स्पष्ट दिखती है. पूनियां ने कहा कि पंचायतीराज संस्था के चुनाव पंचायत समिति के सदस्य, जिला परिषद के सदस्यों के निर्वाचन के बाद दूसरे दिन हो जाते हैं, लेकिन इस बार ऐसा नहीं हो रहा।साथ ही, सतीश पूनिया ने कहा कि सरपंच के चुनाव किसी पार्टी के चिन्ह् पर नहीं होते, लेकिन आमतौर पर राजनीतिक पार्टी के कार्यकर्ता ही चुनाव लड़ते है।बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष ने आशंका जताते हुए कहा कि इसमें सरकार की यह नीयत है कि सरपंचों का निर्वाचन होने के बाद सरपंच की निष्ठा को प्रशासनिक तंत्र के जरिए आगामी चुनाव प्रचार के लिये काम में लिया जा सकता है।

विधानसभा में उपनेता प्रतिपक्ष राजेन्द्र राठौड़ ने भी चुनावी कार्यक्रम पर सवाल उठाये. राठौड़ ने कहा कि चुनाव कार्यक्रम संविधान के 73वें संशोधन की मूल भावना के विरूद्ध है और यह सरकार द्वारा पिछले दरवाजे से पंचायत राज संस्थाओं पर कब्जा करने का कुत्सित प्रयास बताया है. राठौड़ ने कहा कि 15 नवम्बर 2019 की अधिसूचना से पुर्नगठन के बाद अस्तित्व में आई 11 हजार 142 ग्राम पंचायतों में से मात्र 9 हजार 171 ग्राम पंचायतों के चुनाव की घोषणा करना और बाकी रही लगभग 1 हजार 971 ग्राम पंचायतों के चुनाव अधर में छोड़ना पंचायतीराज को कमजोर करने की कोशिश है। इससे पहले बीजेपी ने निकाय चुनाव के कार्यक्रम पर भी सवाल उठाये थे. लेकिन तब भी बीजेपी के आरोप दरकिनार कर दिये गए. अब पार्टी ने इस बार भी सवाल तो उठाए हैं, लेकिन साथ ही आने वाले चुनाव में पूरी तैयारी के साथ जाने का दावा भी किया है. यह बात अलग है कि अभी भी दोनों पार्टियों को लिए पंचायत समिति और ज़िला परिषद के चुनावों की तारीखों का इन्तज़ार ही रहेगा.

27-Dec-2019 10:30

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