CIN : U22300BR2018PTC037551

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21-Oct-2019 04:51

मातृभूमि, मातृत्व और मातृप्रेम की सही परिभाषा हैं लेफ्टिनेंट कर्नल मनमोहन ठाकुर

बाॅर्डर से लेकर मातृभूमि और जन्मभूमि की शान को चार चांद लगाते लेफ्टिनेंट कर्नल मनमोहन ठाकुर

जिन्हें यह समझना हो कि मां क्या होती है और मातृभूमि क्या होता है ? वह आए वैशाली और समझने का प्रयास करें ? राष्ट्रभक्ति, राष्ट्रवाद, सामाजिकता को और सामाजिक न्याय वैशाली के एक महान सपूत लेफ्टिनेंट कर्नल मनमोहन ठाकुर ने ना केवल अपनी मातृभूमि को हमें हमेशा अपने दिल में रखा। बल्कि अपने राष्ट्र धर्म को लेकर एक फौजी होकर अपना संपूर्ण योगदान सेना में दे रहे हैं। वही जब मातृत्व की बात आती है, तो अपने मां के दूध का कर्ज़ तो नहीं कहेंगे, लेकिन उनके दूध का फर्ज निभाने के लिए यह सपूत अपने गांव को अपने माता के यादों में संजोग दिऐ है। लेफ्टिनेंट कर्नल मनमोहन ठाकुर कहते हैं कि मेरी माता की प्रेरणा का ही परिणाम है कि आज हम अपने गांव से लेकर देश के बॉर्डर तक अपनी जिम्मेदारी को निभा पा रहे हैं। यह माता का ही आशीर्वाद है कि हम आज निरंतर अपने दोनों माताओं की सेवा अपने खून के एक-एक कतरे से करने का प्रयास कर रहे हैं। यह मेरे लिए बहुत गर्व की बात है कि मैं वैशाली में जन्म लिया और देश के प्रमुख पदों पर रहते हुए, हमने अपनी मातृभूमि को भी अपना संपूर्ण देने का प्रयास किया। जिसका प्रतिफल है कि हम आज इस मुकाम पर हैं और अपनी माता के चरणों में आज एक छोटे से कार्य के माध्यम से जुड़े हैं। सामान्य जीवन में अक्सर यही हम पाते हैं कि सैनिकों में नौकरियां करने वाले सामाजिक जीवन जीने में असहज महसूस करते हैं। उनका प्रशिक्षण इस प्रकार का होता है कि वह देशभक्ति, राष्ट्रवाद जैसे महत्वपूर्ण विषय के साथ, समाज के विभिन्न स्वरूपों में एक सैनिक का जीवन जैसी बहुत असहज होता है। एक सैनिक का जीवन ईमानदारी, सच्चाई, कर्तव्यनिष्ठा, जाति, धर्म, समुदाय से कोसों दूर, एक राष्ट्रवाद से युक्त होता है। वहीं भारतीय समाज में जीने वाले सामान्य लोगों की जीवन झूठ, फरेब, कामचोरी, जातिवाद, धर्म के नाम पर लूट खसोट करने में 20% से ज्यादा लोगों की अहम भूमिका हो जाती है। जो हमेशा समाज पर हावी होते हैं। जिसे पाटते हुए, एक नई विचारधाराओं के साथ मनमोहन ठाकुर ने सैनिकों और सामान्य जीवन को सेवा में समर्पित कर समांजस्य बनाया। लेफ्टिनेंट कर्नल मनमोहन ठाकुर कहते हैं कि मेरी माता जी के द्वारा दिया गया, संस्कार, संस्कृति, परंपरा, का यह देन है कि आज माताजी के नाम पर एक सामाजिक संस्थान की नींव रख पाया। इस संस्थान को स्थापित करने के लिए मेरे रिश्तेदारों, गांव, समाज के बहुत ही महत्वपूर्ण लोगों की महती भूमिका एवं योगदान है। सरोज सेवा संस्थान आज अपने दूसरे वर्ष पूरे कर लिए और तीसरे स्थापना दिवस के अवसर पर हम आप तमाम समाजसेवी को आमंत्रित करते हैं कि आप आगे बढ़े और समाज निर्माण में अपनी भूमिका आप जहां है, वहीं से शुरू करें। हम कुछ विस्तृत जानकारी देते हुए, आपको बता दें सरोज सेवा संस्थान बहुत कम समय में एक अत्याधुनिक पुस्तकालय की व्यवस्था की। आज लगभग 200 बच्चों को नर्सरी से लेकर सातवीं कक्षा तक बच्चों को पढ़ा रहे हैं और लगातार उनकी पढ़ाई में निरंतरता लाने का प्रयास कर रहे हैं। और आगे की पढ़ाई की व्यवस्था भी हम इसी तरीके से कर रहे हैं। योग्य शिक्षकों के साथ अतिथि शिक्षकों का भरपूर सहयोग मिलता है। टाटा-स्काई और इंटरनेट के माध्यम से अंग्रेजी, गणित को मजबूत करने की पूरी कोशिश शिक्षकों के माध्यम से कराई जाती है। वह खुद सेना में होने का भी फायदा मिलता है और सैनिक स्कूल, जवाहर नवोदय विद्यालय, प्रतिष्ठित संस्थानों में दाखिले के लिए भी पहुंचा रहे हैं।

लेफ्टिनेंट कर्नल मनमोहन ठाकुर कहते हैं कि मेरी माता जी के द्वारा दिया गया, संस्कार, संस्कृति, परंपरा, का यह देन है कि आज माताजी के नाम पर एक सामाजिक संस्थान की नींव रख पाया। इस संस्थान को स्थापित करने के लिए मेरे रिश्तेदारों, गांव, समाज के बहुत ही महत्वपूर्ण लोगों की महती भूमिका एवं योगदान है। सरोज सेवा संस्थान आज अपने दूसरे वर्ष पूरे कर लिए और तीसरे स्थापना दिवस के अवसर पर हम आप तमाम समाजसेवी को आमंत्रित करते हैं कि आप आगे बढ़े और समाज निर्माण में अपनी भूमिका आप जहां है, वहीं से शुरू करें। हम कुछ विस्तृत जानकारी देते हुए, आपको बता दें सरोज सेवा संस्थान बहुत कम समय में एक अत्याधुनिक पुस्तकालय की व्यवस्था की। आज लगभग 200 बच्चों को नर्सरी से लेकर सातवीं कक्षा तक बच्चों को पढ़ा रहे हैं और लगातार उनकी पढ़ाई में निरंतरता लाने का प्रयास कर रहे हैं। और आगे की पढ़ाई की व्यवस्था भी हम इसी तरीके से कर रहे हैं। योग्य शिक्षकों के साथ अतिथि शिक्षकों का भरपूर सहयोग मिलता है। टाटा-स्काई और इंटरनेट के माध्यम से अंग्रेजी, गणित को मजबूत करने की पूरी कोशिश शिक्षकों के माध्यम से कराई जाती है। वह खुद सेना में होने का भी फायदा मिलता है और सैनिक स्कूल, जवाहर नवोदय विद्यालय, प्रतिष्ठित संस्थानों में दाखिले के लिए भी पहुंचा रहे हैं। प्रतियोगिता परीक्षा के लिए देश के प्रमुख संस्थानों की किताबों के साथ-साथ प्रमुख नोट की भी उपलब्ध कराने का हम प्रयास करते हैं। जिससे शहरों के भागमभाग की जिंदगी से हमारे युवाओं को मदद मिल सके। खेल और मानसिक बौद्धिकता के लिए क्रिकेट, बैडमिंटन, फुटबॉल, कबड्डी एवं खेलकूद में प्रत्येक बच्चे को ध्यान में रखकर उपस्थित कराते हैं। वही समय-समय पर चिकित्सा के माध्यम से बच्चों का अलग से चिकित्सीय जांच की व्यवस्था कर गांव व गांव वासियों में ही हर सुविधा उपलब्ध कराने का प्रयास कर रहे हैं।

अभी तक संस्थान के उद्घाटन सत्र से 2 साल का समय हो चुका है और आग तीसरा स्थापना दिवस है। वही इस 2 साल के लंबे सफर में हमने प्रबुद्ध शिक्षाविद, सैनिकों के वरीय अधिकारियों, समाजसेवियों एवं साहित्यकार व पत्रकार द्वारा संस्थान को मार्गदर्शन प्राप्त करवाया। आने वाले समय में यह कड़ी बड़ी होती जा रही है और इस बार और भी प्रमुख शिक्षाविदों को, साहित्यकारों को, पत्रकार बंधुओं को हम बुलाकर अपने समाज को एक और कदम आगे बढ़ने का प्रयास कर रहे हैं। जिससे समाज को एक नई विचारधारा, एक नई सोच एवं राष्ट्र के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का अनुभूति हो सके। लेफ्टिनेंट कर्नल मनमोहन ठाकुर जम्मू-कश्मीर में भारत सरकार की नीतियों को जन-जन तक पहुंचाया। वहीं आज उत्तर बिहार की बागडोर संभालने का बीड़ा उठा रहे हैं। अपनी कर्त्तव्य को हर तरह और हर स्थिति में लागू करने के लिए तैयार होकर देश भक्ति के साथ अपनी जिम्मेदारियों को निभाने में सक्षम हैं। आज जहां बिहार बारिश के कारण संपूर्ण बिहार जल मग्न होकर गया था। जिसमें सैनिकों की तरफ से महत्वपूर्ण क्षेत्रों में मदद पहुंचाई गई। जिसमें लेफ्टिनेंट कर्नल मनमोहन ठाकुर अपने नेतृत्व में एनसीसी के बच्चों को लेकर जो जरूरतमंद लोगों तक पहुंचने का प्रयास किए और यथासंभव बाढ़ पीड़ितों तक पहुंचने में सफलता भी पाई। आज एनसीसी के माध्यम से एक मजबूत सैन्य शक्ति तैयार करने में लेफ्टिनेंट कर्नल मनमोहन ठाकुर दिन रात एक कर लगे हुए हैं। जिसका फायदा यह भी हो रहा है कि अपने क्षेत्र के लोगों को देश की सेवा करने एवं सैनिक में बहाल होने का सरल एवं सुदृढ़ माध्यम भी प्राप्त हो रहा है। एक मजबूत कड़ी के रूप में ना केवल उत्तर बिहार का नेतृत्व कर रहे हैं बल्कि अपने क्षेत्र के प्रत्येक शिक्षण संस्थानों में जाकर कुछ महीनों में एनसीसी को मजबूती प्रदान कर दी। और बच्चों में सामाजिकता व समाजिक भावनाओं को कुटकुट करने का काम किया। एक सफल राष्ट्रवादी, मातृत्ववादी व्यक्तित्व के धनी हैं लेफ्टिनेंट कर्नल मनमोहन ठाकुर।

वह द्वितीय वार्षिक महोत्सव 22 अक्टूबर 2019 मंगलवार को बघनोचा, महनार, वैशाली मैं आयोजित होगी। जिसमें बिहार के प्रमुख विद्वत जनों का आगमन सुनिश्चित है। शिक्षा स्वास्थ्य कृषि एवं कौशल के क्षेत्र में ग्रामीण स्तर पर कैसे विकास हो। इसके लिए एक सेमिनार गोष्ठी का आयोजन किया गया है। जिसमें एलएस कॉलेज मुजफ्फरपुर के प्राचार्य डॉक्टर (प्रोफेसर) ओम प्रकाश राय, कृषि विश्वविद्यालय पूसा से डॉक्टर देवेंद्र प्रसाद सिंह, जिला कृषि पदाधिकारी मुजफ्फरपुर, डॉ कृष्ण कुमार वर्मा, पशुपालन विभाग बिहार सरकार, श्री सुजीत कुमार चौधरी, श्री अरविंद कुमार सिंह सुपौत्र राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर, हाजीपुर के सांसद प्रतिनिधि अवधेश प्रसाद सिंह, श्री उदय प्रसाद सिंह रेड क्रॉस सोसाइटी मुजफ्फरपुर, श्री ए के दास प्राचार्य आरसी एन डी कॉलेज कांटी, मनोज कुमार झा, झाझा, श्री दयाराम मशरूम विशेषज्ञ कृषि विश्वविद्यालय पूसा, समाजसेवी सुयोग कुमार गोगी एवं प्रधान संपादक अहान न्यूज़ मनीष कुमार सिंह की उपस्थिति गौरव पूर्ण होगी। इसके अलावा प्रोफेसर एन के चौधरी, कमल प्रसाद बौद्ध, कैप्टन डॉ प्रवीण कुमार, श्रीमती भावना वर्मा, श्रीमती प्रेमलता अध्यक्ष जिला परिषद समस्तीपुर, कर्नल राजा गोपाल यह विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे। वहीं मुख्य अतिथि के रूप में माननीय श्री संतोष कुमार निराला, परिवहन मंत्री, बिहार सरकार, अति विशिष्ट अतिथि के रूप में ब्रिगेडियर तुषार मिश्रा, उप महानिदेशक, एनसीसी, बिहार शामिल होंगे।

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