रामविलास, नित्यानंद का रामाशीष चौक !





पांच दशक तक रामविलास पासवान सांसद रहे और उत्तर बिहार को जोड़ने वाली रामाशीष चौक उनके पूरे जीवन काल को व्यक्त करती हैं। उसी प्रकार 14 सालों तक नित्यानंद राय जो आज केंद्रीय गृह राज्य मंत्री हैं उनके विधायक काल में जूता बिहार के प्रमुख रामाशीष चौक का निर्माण उनके व्यक्तित्व का परिचय देता है। यह जो फोटो आप देख रहे हैं वह वर्तमान हाजीपुर के रामाशीष चौक का है। यह वही रामाशीष चौक है जहां से होकर उत्तर बिहार की शुरुआत होती है। लगभग 20 जिलों का सफर कार्य प्रमुख रास्ता कहां है और आज भी उत्तर बिहार को जोड़ने के लिए रामाशीष चौक में महत्वपूर्ण स्थान रखती है।



रामविलास पासवान का पैतृक घर खगड़िया है और इसीलिए हाजीपुर को सिर्फ राजनीतिक लूट का अड्डा बनाए रखने के लिए उन्होंने संविधान की सारी मर्यादाओं को ध्वस्त कर दिया। एनडीए एवं यूपीए के दोनों के साथ रामविलास पासवान ने अपने जीवन का 5 दशक से ज्यादा समय सत्ता भोग के साथ ही अपना जीवन अंत किया।



आजीवन रामविलास पासवान मंत्री बने रहे और सत्ता के सर्वोच्च स्थान पर अपनी मौजूदगी से कितना बेहतर विकास किया उसकी यही तस्वीर सामने खड़ी है। भारतीय राजनीति में यह पहला मौका है या यह पहला रास्ता है जो इतने बड़े स्तर पर जिलों को जोड़ता है और लगभग 8 करोड़ लोगों को इस रास्ते से गुजरना पड़ता है।



बिहार की आबादी का लगभग 65 से 70% आबादी उत्तर बिहार के इसी सड़क से अपने जीवन यापन के लिए कोई भी कदम उठाने के लिए इन्हीं सड़कों पर आश्रित हैं। आप देख सकते हैं कि वही कमोबेश स्थिति आज वर्तमान में नरेंद्र मोदी की टीम के महत्वपूर्ण सदस्य नित्यानंद राय जिनका पैतृक घर भी हाजीपुर में है। फिर भी नित्यानंद राय नहीं अपने 14 साल के कार्यकाल में हाजीपुर के मुख्य मार्ग रामाशीष चौक जो कि उत्तर बिहार को जोड़ता है उसका निर्माण नहीं होने दिया।



इसका कारण यह भी था कि हाजीपुर अगर विकसित होता है तो यहां के आम आवाम रामविलास पासवान के बाद उनकी गुलामी नहीं कर पाएगा। रामविलास के कद बढ़ने के साथ-साथ उनकी सोचने की क्षमता जिस तरीके से संक्रमित होती गई, उससे कहीं ज्यादा अपने घर को बर्बाद करने में नित्यानंद राय ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। शायद यह लेख पढ़कर बहुत लोगों को तकलीफ होगी लेकिन क्या कोई जवाब दे पाएगा कि आखिर 8 करोड लोगों के लिए जो सड़क का महत्वपूर्ण मुख्य द्वार था या है आज भी उसका निर्माण क्यों नहीं कराएगा।






रामाशीष चौक की कहानी खुद में या बयां करती है यहां के नेताओं ने जिसमें रामविलास पासवान नित्यानंद राय जैसे लोगों ने लोकतंत्र की जिस तरीके से हत्या की वैसी परिस्थिति पूरी दुनिया में कहीं देखने को नहीं मिलेगी। मानवता को मानव से दूर रखना और उसकी मूलभूत संरचना ऊपर राजनीतिक और संवैधानिक चोट देना है रामविलास और नित्यानंद राय किस सोच में कूट कूट कर भरा हुआ था।






रामविलास पासवान पांच दशक तक केंद्रीय मंत्री के रूप में बने रहें। और वैसे ही कम हो वैसे स्थिति नित्यानंद राय की है जो विधायक भी रहे, अब सांसद और फिर केंद्रीय गृह राज्य मंत्री फिर भी उत्तर बिहार को जोड़ने वाली सड़क जो कि उनके ही क्षेत्राधिकार क्षेत्र में आता है आज भी निर्माण के लिए आंखें बिछाए बैठा है।