मनीष कुमार सिंह: वैशाली पुलिस अधीक्षक अवैध हथियारों का व्यापारी कैसे ? : मनीष कुमार ।





मनीष कुमार सिंह: विगत 7 वर्षों में मैंने यह महसूस किया जो मैं लगातार लिखता रहा हूं कि वैशाली जैसे लोकतांत्रिक भूमि पर पुलिस जैसी व्यवस्था की आवश्यकता नहीं है। सभी जानते हैं कि पिछले 7 वर्षों में जो भी पुलिस अधीक्षक बनकर वैशाली में आए, वह सभी ने अपराध की सभी सीमाओं को निरंतर आगे बढ़ाते रहें हैं। अपराध की सीमाओं को लांघने में पुलिस अधीक्षक वैशाली ने अपनी सीमा को इस तरीके से तोड़ा है कि जैसे मानवता की हत्या उनका धर्म बन गया है। लगातार बढ़ रही अपराधिक घटनाओं को लेकर देखेंगे कि किसी भी प्रकार की जिम्मेवारी वैशाली पुलिस अधीक्षक के अंदर नजर नहीं आती है। वैशाली पुलिस अधीक्षक मनीष के आने के बाद मैं कई बार बातचीत किया तो यही पता चला कि पहले भी घटनाएं होती थी कि नहीं और यह सवाल के साथ अपनी जिम्मेदारियों से मुक्त हो जाते थे।



वैशाली जिले में लॉक डाउन का खेल जिस प्रकार से प्रशासन द्वारा खेला गया उसे ना जाने कितने परिवार की जिंदगी उत्तल पुथल हो गई। लोगों को यह कभी समझ में ही नहीं आया कि वह दिन रात मेहनत कर जिस देश को बनाने के लिए टैक्स भरते हैं, उसी टैक्स के पैसे से जो प्रशासन उनकी सुरक्षा में आते हैं वह गुंडा कैसे बन जाते हैं। लाॅक डाउन के नाम पर जिस प्रकार से वैशाली पुलिस ने काम किया उससे यही लगा कि भारत का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के महत्वकांक्षी योजना आपातकाल की नियम इतनी ही बेहतर हो सकती है। और इसीलिए वैशाली पुलिस अधीक्षक ने टैक्स देने वाले लोगों की भूमिका की जगह टैक्स के पैसे से अपनी जीवन यापन जीने वाले राजनेताओं के महत्वकांक्षी और उनकी राजनीतिक कुंठाओं को धरातल पर लाने में सारी ताकत लगा दी।






आज वैशाली जिले में जिस तरीके से अपराध की सीमा लगातार बढ़ती जा रही है तो आप देख रहे हैं कि किस प्रकार से पुनः लोगों को जंगल लाल अनुभूति हो रही है। बिहार विधानसभा चुनाव खत्म हुआ है और पूरे बिहार विधानसभा चुनाव में जंगलराज की कल्पना को लेकर डराते हुए नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में चुनाव लड़ा गया। लेकिन भारत के संविधान के तहत जिस पद पर नरेंद्र मोदी बैठे उन्हें इस बात की भनक भी नहीं है कि हाजीपुर वैशाली जिले में किस तरीके से हत्या और अपराध की घटनाएं निरंतर बढ़ती जा रही है। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जिस प्रकार से अपने भाषणों में व्यस्त रहते हैं तो उसी स्तर पर वैशाली पुलिस अधीक्षक में अपने आपातकालीन व्यवस्थाओं में व्यस्त रहते हैं।






भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक और पूछना चाहिए वैशाली पुलिस अधीक्षक से पुछना चाहिए कि वैशाली जिले में अवैध हथियारों का जखीरा कैसे आता है ? अवैध हथियारों का व्यापार वैशाली पुलिस अधीक्षक की अधिकार से करते या कराते हैं। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जिस तरीके से वैशाली जिले की जनता से लोकसभा एवं विधानसभा में मतों की चोरी की है ठगने का काम किया है वह धरातल पर भी वैशाली पुलिस अधीक्षक के माध्यम से दिख रहा है। भारत के प्रधानमंत्री के गैर जिम्मेदाराना भाषण और जन भावनाओं के साथ आघात करने वाले कदमों से जो परिणाम निकला है वह यही है कि वैशाली पुलिस अधीक्षक वैशाली में अपराध की घटनाओं को करने एवं कराने में अपनी पूरी ताकत का इस्तेमाल कर रहे हैं। आजकल लगभग 1 सप्ताह में या कहें रोजाना एक ऐसी घटनाएं गोलीबारी की हो रही है जो वैध हथियारों से नहीं है। तो आखिर अवैध हथियार का व्यापार बगैर वैशाली पुलिस अधीक्षक के मिलीभगत के कैसे हो सकता है। यह सवाल पहले भी खड़ा था और आज भी करा है ?