लगातार दूसरे दिन जारी नजरबंदी को लेकर समाजसेवी ने जताया आपत्ति :-चन्द्रमणि पाण्डेय |




सत्ता व शासन प्रशासन को मुझसे क्यों लगता है डर किसानों के भारत बंद आन्दोलन को लेकर लखनऊ से घर आये समाजसेवी को कल 8दिसम्बर को नजरबंद किया गया किन्तु जिले के अन्य दलों व संगठनों को रिहा कर देने वाले शासन प्रशासन ने समाजसेवी चन्द्रमणि पाण्डेय को लगातार दूसरे दिन भी नजरबंद कर रखा है जबकि श्री पाण्डेय को आज लखनऊ जाना था |




कारण उनके पिताजी अस्वस्थता के चलते विगत एक सप्ताह से लखनऊ भर्ती है प्रशासन के इस घेराबंदी को समाजसेवी ने अनावश्यक व निजी जीवन में दखल करार दिया है श्री पाण्डेय ने कहा कि या तो तत्काल |



मेरे घर से पुलिस का पहरा हटाया जाय अथवा मुझे जनपद में हुए कृषि घोटाले व कागज में गड्ढा मुक्त की गई 17सडको की शिकायत सम्बंधित ग्यापन मुख्यमंत्री को देने दिया जाय उन्होने कहा कि मुझ अकेले से शासन सत्ता व प्रशासन के लोग भयभीत क्यों रहते हैं बार बार मुझे नजरबंद क्यों किया जाता है प्रशासन जितना प्रयास मुझे रोकने हेतु करता है यदि उतना प्रयास जनसमस्याओं के निस्तारण में करे तो शिकायत की स्थिति ही न खडी हो उन्होंने कहा कि गौशालाओं के गौवंशज विहीन व चाराविहीन होने के चलते मवेशी किसान की फसल बर्बाद कर रहे है |






कृषि योजना में अनियमितता के चलते योजना का लाभ किसान नहीं पा रहा है उपर से उसके उपर पराली का मुकदमा दर्ज किया जा रहा है जनपद की अधिकांश सडकें बदहाल हैं और अधिकारी जनप्रनिधि उसके गड्ढा मुक्त होने का दावा करते हैं ऐसे में गलती ये करते हैं कार्यवाही इनपर होना चाहिए व नजरबंद मुझे करते हैं।ऐसे में आज हम रूकने वाले नही हैं हम यदि हम गलत हैं |






तो मुझे जेल डाला जाय या हमारे घर से पहरा हटाया जाय अथवा मुझे सूबे के मुखिया को ज्ञापन देने दिया जाय बिना किसी लिखित आदेश के अपनी नजरबंदी को मनमाना बताते हुए घर से दर्जनों समर्थकों संग मुख्यमंत्री से मिलने निकले समाजसेवी चन्द्रमणि पाण्डेय सुदामाजी को भारी पुलिस बल के साथ हर्रैया थान्हे में किये गये नजरबंद |

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