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Blog >> समाज >> शिशिर शर्मा

हम तो पूछेंगे.........

आमिर सुबहानी जैसे सरीखे नौकरशाह जिस तबलीगी जमात के अघोषित संरक्षक हैं

आपको जानकारी दे दें कि आमिर सुबहानी जैसे सरीखे नौकरशाह जिस तबलीगी जमात के अघोषित संरक्षक हैं उसे विश्व के चार इस्लामिक देशों ने प्रतिबंधित किया हुआ है। दरअसल सुन्नी मुस्लिम के वहाबी परम्परा का वाहक ये जमात इस्लाम के उम्मा विचारधारा को मानता है।जिसका नेटवर्क विश्व के करीब 130 देशों में है। इसका एक मात्र उद्देश्य है पूरे विश्व को इस्लाम का अनुयायी बनाना। भारत में भी ये जमात गजवा ए हिन्द के सिद्धांतों का पोषक है। अब सबसे बड़ा सवाल है कि जिस जमात के इरादे इतने खतरनाक हैं, और जिस जमात के संरक्षक आमिर सुबहानी सरीखे देश के कई बड़े छोटे लॉबिस्ट नौकरशाह हैं।

क्या उनके खिलाफ जांच की गुंजाइश नहीं बनती है? कोई इस मामलों के मद्देनजर सवाल उठाए या न उठाए। हम तो पूछेंगे.... साथ ही और कौन कौन नौकरशाह ऐसे जमातों के पोषक हैं, जांच तो इन मामलों पर भी होनी चाहिए।आखिर ये जिम्मेवारी किसकी बनती है। लाजमी है कि जिसकी वर्तमान में सरकार है। अब जरा इसके दूसरे पहलू पर गौर करें तो इस देश में या फिर अन्य राज्यों में 1947 के बाद से लेकर आज तक जिस किसी भी पार्टी की सरकारें अाई, उसने इस जमात की चिरौरी की है।

उसकी वजह या उनकी राजनीतिक मजबूरियां चाहे जो भी रही हो। लेकिन राष्ट्रवाद पर किसी तरह के कोई समझौता न करने एवम् उसके खिलाफ सख्त रुख अख्तियार करने का वादा कर सत्ता पाने वाली आज की सरकार भी पिछली सरकारों की तरह उसकी चिरौरी ही करे। तो फिर आपमें और उनमें क्या अंतर है। आखिर इस मामले में एक्शन लेने की जिम्मेवारी किसकी है?? इस मामले पर कोई सवाल उठाए या न उठाए।

गृह मंत्रालय का इंटर्नल विजिलेंस आखिर क्या कर रहा है? ऐसे कई सवाल हैं , जिन पर जांच होनी चाहिए। साथ ही एक बहुत बड़ा सवाल कि जब तबलीगी जमात की गतिविधियां इतनी संदिग्ध हैं, तो बाकी के देशों की तरह भारत में भी इन्हें प्रतिबंधित क्यों नहीं कर दिया जाता?? जब सिमी पर प्रतिबंध लग सकता है,स्टूडेंट इस्लामिक ऑर्गनाइजेशन पर प्रतिबंध लग सकता है,पीएफआई को प्रतिबंधित किया जा सकता है और ऐसे अन्य संगठन जो की इस तरह के संदिग्ध गतिविधियों में संलग्न हैं ,उसको प्रतिबंधित किया जा सकता है। तो फिर इसे क्यों नहीं। आखिर ये जिम्मेवारी किसकी बनती है?

अंत में एक बहुत बड़ा सवाल कि जिस तरह से लश्कर ए तैयबा, जैश ए मोहम्मद,हिज्बुल मुजाहिद्दीन सरीखे आतंकवादी संगठन मानव बम बनाकर पठानकोट, उरी और अन्य जगहों पर हमला करते हैं, उसी तरह जमात के लोग इस देश में कोरोना जैसे जैविक हथियार से संक्रमित मानव बम बनकर समाज के लोगों पर हमला कर रहे हैं। आखिर इनके उपर कार्रवाई क्यों नहीं?? इन्हें सरकार पाकिस्तानी आतंकवादी अजमल कसाब की तरह कबतक देश के पैसे से बिरयानी खिलाकर इलाज करबायेगी?

आज लॉक डॉउन के कारण देश की अर्थव्यवस्था तार तार हो चुकी है। बावजूद इसके इनकी हरकतों की वजह से लॉक डॉउन को बढ़ाने की तरफ सरकार अग्रसर दिख रही है। लिहाज़ा इसका खामियाजा जो पूरा देश भुगत रहा है,इसका हर्जाना इस जमात के एक एक लोगों से क्यों न वसूल किया जाय साथ ही इनके खिलाफ आतंकवादियों जैसी कार्रवाई क्यों न की जाय??? एक बहुत बड़ा यक्ष प्रश्न है, जिसे कोई पूछे या न पूछे।........... हम तो पूछेंगे

गृह मंत्रालय का इंटर्नल विजिलेंस आखिर क्या कर रहा है? ऐसे कई सवाल हैं , जिन पर जांच होनी चाहिए।

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