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हम तो पूछेंगे.........

लेकिन हम तो पूछेंगे...... अब जरा क्रोनॉलजी समझिए। केंद्र सरकार , बिहार सरकार,और बिहार सरकार के सबसे चहेते नौकरशाह और वर्तमान में गृह सचिव मा. आमिर सुबहानी का

आज कल मीडिया खबरों पर अगर गौर फरमाएं तो कुल खबरों का साठ फीसदी हिस्सा तबलीगी जमात और कोरोना के हिस्से में आता है। लेकिन उन तमाम खबरों को देखा जाय तो सब मोटा मोटी उपर की बातें होती है, अंदर की मूल बातों को बताने में या तो भारतीय मीडिया डरता है या फिर उनके आकाओं से ये खास निर्देश है कि जनता को क्या दिखाना है। लेकिन हम तो पूछेंगे...... अब जरा क्रोनॉलजी समझिए।

केंद्र सरकार , बिहार सरकार,और बिहार सरकार के सबसे चहेते नौकरशाह और वर्तमान में गृह सचिव मा. आमिर सुबहानी का। कहने को तो तबलीगी जमात के प्रमुख मौलाना शाद हैं लेकिन शायद आपको जानकारी में हो या न हो लेकिन आपको जानकारी दे दें कि बिहार सरकार के सबसे चहेते और कद्दावर नौकरशाह, वर्तमान में सरकार के गृह सचिव मा. आमिर सुबहानी इस तबलीगी जमात के मुख्य अघोषित लीडर हैं।

बिहार में इस जमात की कई बैठकें अलग अलग जिलों में हुई जिसमें बिहार के मुख्यमंत्री मा. नीतीश कुमार ने भी शिरकत की। उनसे इस जमात की बैठक में शिरकत करने का विशेष आग्रह श्री आमिर सुभानी जी का था। आखिर जनाब मना भी कैसे कर सकते थे, उनके चहेते नौकरशाह का आग्रह जो था। लिहाज़ा आपको इस जमात की ताकत का एहसास तो हो ही गया होगा। अब ज़रा आगे बढ़ते हैं, जमात की तरफ.. .. इस तबलीगी जमात का कई देशों में नेटवर्क है। कई बार यह ख़बरें भी अाई कि इस जमात के ताल्लुकात कुछ आतंकवादी संगठनों और आईएसआई से भी हैं।

ऐसे में भारत के गृह मंत्री मा. अमित शाह जी जो कि टीवी पर आकर कई बार दहाड़ते दिखे थे, उनकी मिमियाहट इस मौके पर साफ तौर से दिखी। उन्होंने अपनी मजबूरी का रोना रोते हुए अजित डोभाल जी से आग्रह किया कि मरकज को खाली करने और वहां उपस्थित लोगों के मेडिकल टेस्ट कराने हेतु मौलाना शाद को मनाएं , न की सख्ती दिखाएं। आखिर अपने दुलरुआ नीतीश जी का मन भी रखना होगा क्योंकि इस जमात से उनकी नजदीकी जगजाहिर थी। और किसी प्रशासनिक और पुलिस पदाधिकारी की क्या औकात की वरिष्ठ नौकरशाह आमिर सुबहानी के संगठन को हाथ लगा दे।

बहरहाल, किसी किसी तरह श्री डोभाल ने मरकज के लोगों को कोरोना वायरस के खतरे से आगाह करते हुए और तबलीगी जमात के अन्य प्रमुख लोगों से अपने संबंधों का हवाला देते हुए, उन्हें जगह खाली करने को मनाया।कोई सख्ती सरकार द्वारा नहीं बरती गई। बल्कि उनसे अनुनय विनय किया गया। उसके बाद उस तबलीगी जमात के लोगों की गुंडई से तो, समाचारों के माध्यम से आप लोग परिचित हो ही गए होंगे।

आपको जानकारी के लिए बता दें कि इस जमात का दबदबा देश में इस कदर हावी है कि मस्जिद के किसी इमाम या मौलाना की ये हैसियत नहीं कि इनके सम्मान में कोई गुस्ताखी कर दे, या तो कोई विरोध का स्वर मुखर कर सके। बिहार में तो हालात ऐसे हैं कि आज भी अगर यहां के मस्जिदों और मदरसों में तलाशी ली जाय तो हजारों की संख्या में देशी विदेशी इस जमात के लोग मिल जाएंगे। लेकिन किसी प्रशासनिक या पुलिस पदाधिकारी की क्या हैसियत कि वो इस मामले में एक कदम भी बढ़ा दे। जानकारी के लिए आपको बता दें कि इस जमात का मुख्य उद्देश्य पूरे विश्व को इस्लाम में तब्दील करने का है। चाहे उसके लिए इन्हें मानव बम ही क्यों न बनना पड़े। इसलिए इनके साथ वैसा ही व्यवहार होना चाहिए। जैसा कि एक आतंकवादी के साथ होता है। लेकिन आज का एक बहुत बड़ा सवाल कि - करेगा का कौन? क्योंकि जिस जमात का अघोषित लीडर नौकरशाह हो, जिसको मुख्यमंत्री का संरक्षण प्राप्त हो और जिसके आगे देश का गृह मंत्री भी घिघियाने या यूं कह लें कि मेमियाने की भूमिका में हो। उसका कोई क्या बिगाड़ लेगा। एक बहुत बड़ा सवाल जिसे कोई पूछे या नहीं पूछे।............ हम तो पूछेंगे।

जानकारी के लिए आपको बता दें कि इस जमात का मुख्य उद्देश्य पूरे विश्व को इस्लाम में तब्दील करने का है

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