लोकतंत्र की सबसे बड़ी खूबसूरती है कि अपने जनप्रतिनिधि को वह सीधे तौर पर चुनती है। इसमें जनता की भागीदारी की सबसे प्रमुखता होती है। चुनाव प्रक्रिया मात्र नहीं है यह एक बड़ी शक्ति है जो आम नागरिकों को यह अधिकार देता है कि वह देश का संचालन किस रूप में देखना चाहता है। लोकतंत्र की बहुत ही खूबसूरत प्रक्रिया चुनाव में आम जनता की भागीदारी सीधे तौर पर सुरक्षित होती है। आम जनता जो आमतौर पर चुप रहकर यह देखता है कि कौन सी राजनीतिक दल सामाजिक न्याय के साथ मानवतावादी विकास और समाज का विकास को ही अपनी प्रमुखता समझता है। यह एक आवश्यक होता है, जब कुछ लोगों को यह शक्ति जनता के द्वारा मिलता ही है कि वह राज्य एवं राष्ट्र का बेहतर निर्माण कर सकें।


लोकसभा भारतीय संसद का निचला सदन होता है, भारतीय संसद का ऊपरी सदन राज सभा कहलाता हैं। लोकसभा में प्रत्यक्ष रूप से मतदाता अपने जनप्रतिनिधि चुनते हैं। भारतीय संविधान के अनुसार संसद में सदस्यों की अधिकतम संख्या 552 तक हो सकती है। जिसमें 530 सदस्य विभिन्न राज्यों का और 20 सदस्य केंद्र शासित प्रदेशों का प्रतिनिधित्व कर सकते हैं। सदन में पर्याप्त प्रतिनिधि नहीं होने की स्थिति में राष्ट्रपति यदि चाहें तो आंग्ल - भारतीय समुदाय के प्रतिनिधियों को मनोनीत कर सकता है।

भारतीय संसद के निचले सदन का कार्यकाल 5 वर्षों के लिए निर्धारित की गई है। प्रथम लोकसभा 1952 आम चुनाव के साथ देश को अपनी पहली लोकसभा में प्रतिनिधित्व करने का मौका मिला था। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस 364 सीटों के साथ जीत हासिल कर सत्ता में कौन सी थी उस समय भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस को लगभग 45% वोट प्राप्त हुए थे।

लोकसभा एक ऐसी संविधान की संस्थान है जिसका कार्यकाल अपनी पहली बैठक से प्रारंभ हो जाता है और स्वत: 5 साल पूरा होते ही भंग हो जाता हैं। विशेष परिस्थितियों में जब देश के अंदर आपातकाल जैसी स्थिति होती है तो संसद को 1 साल की अवधि के लिए बढ़ाने का मात्र अधिकार प्राप्त है जबकि आपातकाल की घोषणा समाप्त होने की स्थिति में इसे किसी भी परिस्थिति में 6 महीने से अधिक नहीं बढ़ाया जा सकता है।

लोकसभा में मंत्रिपरिषद केवल लोकसभा के प्रति उत्तरदाई होता है अविश्वास प्रस्ताव सरकार के विरूद्ध केवल यही लाया सकती है धन बिल पारित करने में यह निर्णायक सदन के रूप में जाना जाता है। भारत के अंदर राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा यह प्रस्ताव केवल और केवल लोकसभा के अंदर ही लाया या पारित किया जा सकता है।

लोकसभा अपने निर्वाचित सदस्यों में से एक को अध्यक्ष यानी स्पीकर के रूप में चुनता है। कार्य संचालन में अध्यक्ष की सहायता के लिए उपाध्यक्ष द्वारा की जाती है, जिसका चुनाव भी लोकसभा के निर्वाचित सदस्य ऐसे ही होता है। जो केवल संचालन का उत्तरदायित्व लोकसभा में करने की जिम्मेदारी होती है।

लोकसभा की बहुत बड़ी जिम्मेदारी होती है और जी से निभाने के लिए जनता के द्वारा चुने गए सीधे जनप्रतिनिधि कार्य करते हैं।

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