14-Jan-2020 10:07

क्या है अनुच्छेद 19, जिसके तहत सुप्रीम कोर्ट ने इंटरनेट को कहा मौलिक अधिकार

एक लोकतांत्रिक व्यवस्था में बोलने की स्वतंत्रता अनिवार्य तत्व है। इंटरनेट का उपयोग करने का अधिकार अनुच्छेद 19 (1) (ए) के तहत एक मौलिक अधिकार है।'

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार 10 जनवरी को जम्मू-कश्मीर में अस्पतालों, शैक्षणिक संस्थानों जैसी सभी जरूरी जगहों पर इंटरनेट सेवा बहाल करने का निर्देश दिया है। यह निर्देश देते हुए शीर्ष अदालत ने कहा कि 'इसमें कोई संदेह नहीं है कि एक लोकतांत्रिक व्यवस्था में बोलने की स्वतंत्रता अनिवार्य तत्व है। इंटरनेट का उपयोग करने का अधिकार अनुच्छेद 19 (1) (ए) के तहत एक मौलिक अधिकार है।'

क्या आप जानते हैं कि संविधान का अनुच्छेद 19 क्या है? इसके तहत हमें क्या अधिकार मिले हुए हैं? क्या आप जानते हैं कि देश के एक राज्य ने करीब तीन साल पहले ही इंटरनेट को मूलभूत अधिकार (Basic Right) घोषित कर दिया था? कई देश भी पहले ही इंटरनेट की पहुंच को इंसान का मूलभूत अधिकार घोषित कर चुके हैं। इन सभी चीजों के बारे में आगे पूरी जानकारी दी जा रही है।

क्या है अनुच्छेद 19 भारतीय संविधान का अनुच्छेद 19 भारत के नागरिकों के लिए कुछ चीजों की स्वतंत्रता की बात करता है। अनुच्छेद 19 (1) के तहत ये हमारे मौलिक अधिकार हैं, जिन्हें हमसे कोई नहीं छीन सकता। ये अधिकार हैं - अनुच्छेद 19(1)(a) : सभी नागरिकों को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार है। अनुच्छेद 19(1)(b) : बिना हथियार किसी जगह शांतिपूर्वक इकट्ठा होने का अधिकार है। अनुच्छेद 19(1)(c) : संघ या संगठन बनाने का अधिकार है। अनुच्छेद 19(1)(d) : भारत में कहीं भी स्वतंत्र रूप से घूमने का अधिकार है। अनुच्छेद 19(1)(e) : भारत के किसी भी हिस्से में रहने और बसने का अधिकार है अनुच्छेद 19(1)(f) : इसे हटाया जा चुका है (पहले इसमें संपत्ति के अधिकार का प्रावधान था) अनुच्छेद 19(1)(g) : कोई भी व्यवसाय, पेशा अपनाने या व्यापार करने का अधिकार है

क्या कहता है अनुच्छेद 19 (2) भारतीय संविधान का अनुच्छेद (1) जहां मौलिक अधिकारों की बात करता है, वहीं अनुच्छेद 19 (2) के तहत इन अधिकारों को सीमित भी किया गया है। अनुच्छेद 19 (2) में कहा गया है कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से किसी भी तरह देश की सुरक्षा, संप्रभुता और अखंडता को नुकसान नहीं होना चाहिए। इन तीन चीजों के संरक्षण के लिए अगर कोई कानून है या बन रहा है, तो उसमें भी बाधा नहीं आनी चाहिए। राज्य जिसने तीन साल पहले ही इंटरनेट को बताया था मूलभूत अधिकार सुप्रीम कोर्ट अब इंटरनेट को मौलिक अधिकार बता रहा है। लेकिन भारत का एक राज्य ऐसा है जिसने अब से करीब तीन साल पहले ही इसे लोगों का मूलभूत अधिकार घोषित कर दिया था। वो है देश का सबसे शिक्षित राज्य केरल। मार्च 2017 में ही केरल ने हर नागरिक के लिए भोजन, पानी और शिक्षा की तरह इंटरनेट को भी मूलभूत अधिकार की श्रेणी में रख दिया था। अपने बजट में इस राज्य ने अपने 20 लाख गरीब परिवारों तक इंटरनेट की पहुंच देने के लिए योजना बनाई थी और फंड आवंटित किया था।

14-Jan-2020 10:07

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