18-Apr-2020 05:27

पॉजिटिव पॉलिटिक्स के साथ औराई में मिसाल बने हैं डा. सादात ख़य्याम

20 साल की सेवा के बाद 2014 में ये सेवानिवृत्त हुआ। सेवा काल के दौरान 1999 के कारगिल की लड़ाई में भी शामिल हुए और इन्हे ऑप्स विजय मेडल से अलंकृत किया गया

कारगिल लड़ाई में अपने पिता के बल पर इतिहास रचने वाले बिहार के लाल डा सादात ख़य्याम इन दिनों मुजफ्फरपुर के औराई विधानसभा क्षेत्र में लोगों की सेवा में जी-जान से जुटे हुए हैं प्रचार माध्यमों से दूर यह लोगों तक राहत सामग्री पहुंचा रहे हैं साथ ही साथ जहां कहीं से भी किसी व्यक्ति के भूखे रहने की खबर आ रही है वहां तक मदद भेजवा रहे है। अपने अनूठे कार्यों के बल पर यह सामाजिक चेतना के साथ ही साथ कौमी एकता की भी मिसाल कायम कर रहे है.एक तरफ जहा कोरोना संकट के बीच देश मे एक सुनियोजित साजिश के तहत धार्मिक उन्माद पैदा किया जा रहा है ऐसे मे आज हम आपको मुस्लिम समाजिक अग्रदूतसे मिलाने जा रहे है जो न सिर्फ देश भक्ति की मिसाल पेश कर रहे हैं बल्कि सामाजिक क्रांति के अग्रदूत भी बने है. बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के औराई विधानसभा में जहां एक अवकाश प्राप्त सैनिक डा सादात ख़य्याम सेवा भाव के अलख को जगा रहे हैं जो हमें कौमी एकता के साथ ही साथ ग्रामीण विकास की भी एक अनूठी मिसाल दे रहा है. औराई विधानसभा क्षेत्र में विगत 20 दिनों से इनके द्वारा गरीब और लाचार लोगों के बीच अनाज सब्जियां दवाइयां मास्क वितरित किया ही जा रहा है साथ ही साथ लोगों को सोशल डिस्टेंस का पालन करने घरों के अंदर रहने अफवाहों से बचने के लिए भी जागरूक किया जा रहा है अभी तक इनके द्वारा औराई विधानसभा क्षेत्र में हजारों लोगों को मदद पहुंचाई गई है. टीवी डिबेट में जो लोग मुंह फाड़ फाड़ कर मुस्लिमों के रहनुमा बनने के स्वांग रच रहे हैं उन्हें डा सादात ख़य्याम से सीख लेनी चाहिए कि सही मायने में एक सच्चा मुसलमान और एक हिंदुस्तानी होने का फर्ज अदा कर रहे हैं प्रगतिशील व विकास परक राजनीति के तहत औराई विधानसभा क्षेत्र में स्वरोजगार का अलख जगाकर लोगों के आर्थिक पक्ष को मजबूत करने में जुटे हैं वे कहते हैं कि भारत की आत्मा गांवों में बसती है और देश के आजादी के बाद चाहे जितनी भी सरकारी योजनाएं बनी हो गांव पहले से बदहाल हुए अगर ऐसा नहीं होता तो बिहार जैसे पिछड़े प्रांत में पलायन की इतनी बड़ी पीड़ा भी नहीं होती इसी कारण से उन्होंने अपने औराई विधानसभा क्षेत्र में कृषि गत व्यवसायिक कार्यों को मूर्त रूप देकर एक मिसाल कायम की है.बिहार के ग्रामीण इलाकों में कृषि गत स्वरोजगार को बढ़ावा देने में जिन युवाओं ने साहसिक प्रयास किया है उनमें मुजफ्फरपुर जिले के रहने वाले डा सादात ख़य्याम का नाम काफी प्रमुख है बिहार में मछली पालन अंडा उत्पादन औषधीय पौधों की खेती केला उत्पादन के साथ ही साथ ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार के प्रति लोगों में जनजागृति लाने का जन आंदोलन चला रहे समाजसेवी व युवा उत्प्रेरक संजीव कुमार श्रीवास्तव के सहकर्मी है डा सादात, इनके पिता का नाम मोहम्मद ख़य्याम है,डा सादात खय्याम ने बिहार से ही इंटर तक कि पढ़ाई करने के बाद भारतीय वायुसेना की परीक्षा 1994 में दी जिसमे ये अपने ग्रुप में टॉप आये. वायु सेना में अपनी सेवा के दौरान इन्होंने देश भर में भ्रमण किया. जिसमे अंडमान निकोबार द्वीप समूह और इलाहाबाद जो अब प्रयागराज है यादगार रहे।

20 साल की सेवा के बाद 2014 में ये सेवानिवृत्त हुआ। सेवा काल के दौरान 1999 के कारगिल की लड़ाई में भी शामिल हुए और इन्हे ऑप्स विजय मेडल से अलंकृत किया गया। 26 जनवरी 2001 में गुजरात भूकम्प में जामनगर में इनकी पोस्टिंग थी, भुज में राहत कार्य के दौरान इनके टीम के तीन सदस्यों को शौर्य चक्र से सम्मानित किया गया जो गर्व की बात है। 13 दिसम्बर में जब संसद पर आक्रमण हुआ था तब भी इन्हे छुट्टी से रिकाल किया गया था। 2002 के गुजरात दंगों में इनकी पोस्टिंग जामनगर, गुजरात मे थी जिसमे इन्होने कानून व्यवस्था को पटरी पर लाने में प्रशासन का पूरा सहयोग किया। 2004 में इनका विवाह एक दन्त चिकित्सक से हुआ.

सेवाकाल के दौरान इन्होंने इग्नू से उच्च शिक्षा हासिल की. सामाजिक गतिविधियों में भी इनका योगदान अनुकरणीय है.मोतियाबिंद मुक्त बिहार कार्यक्रम के अंतर्गत मुज़फ़्फ़रपुर आई हॉस्पिटल के साथ मिलकर मुफ्त में मोतियाबिंद का चेक-अप, दवा, चश्मा और अगर आपरेशन की ज़रूरत हो तो हॉस्पिटल तक गाड़ी में लेकर जाना, आपरेशन, रहना, खाना-पीना, काला चश्मा, दवा आदि उपलब्ध कराना भी इनके सेवा मे शामिल है. बिहार के बड़े अस्पतालों से सामाजिक गतिविधि समन्वय के साथ टाईअप कर के ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य शिविर का आयोजन भी करवाते हैं तथा गरीब लाचार मरीजों के इलाज में रियायत करने के लिए भी अस्पतालों को बाध्य करते हैं.

शिक्षित बिहार कार्यक्रम के तहत किए उच्च शिक्षा और तकनीकी शिक्षा प्राप्त करने वाले छात्रों को निजी कॉलेजों तक पहुंचाने में भी मदद करते हैं तथा आर्थिक रूप से भी उन्हें रियायत व अन्य सुविधाएं प्रदान करवाते हैं. इनके द्वारा किए जा रहे निस्वार्थ भाव से कार्यों को देखते हुए पूरे औराई विधानसभा क्षेत्र में आने वाले विधानसभा चुनाव में लोग इन्हें अपने विधायक के रूप में देखना चाहते हैं युवाओं में इनको लेकर खासा उत्साह है.

18-Apr-2020 05:27

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